कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों के बंटवारे की अधिसूचना जारी कर दी है। नई सूची के अनुसार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गृह, बिजली, भूमि एवं भूमि सुधार, सूचना एवं संस्कृति समेत कई महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं।
राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी आदेश के साथ ही नए विभागीय आवंटन तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। इससे राज्य सरकार की प्रशासनिक संरचना को अंतिम रूप मिल गया है और अब सभी मंत्री अपने-अपने विभागों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में 35 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई थी। इसके बाद राज्य मंत्रिपरिषद की कुल संख्या बढ़कर 41 हो गई है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पास कौन-कौन से विभाग?
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी गृह एवं पर्वतीय मामले, भूमि एवं भूमि सुधार, शरणार्थी राहत एवं पुनर्वास, बिजली, सूचना एवं संस्कृति तथा कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे।
इसके अलावा जिन विभागों का आवंटन किसी अन्य मंत्री को नहीं किया गया है, वे भी मुख्यमंत्री के अधीन रहेंगे।
वित्त से लेकर स्वास्थ्य तक, प्रमुख मंत्रालयों का बंटवारा
मंत्रिमंडल में कई वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए हैं। स्वपन दासगुप्ता को वित्त विभाग की जिम्मेदारी मिली है, जबकि डॉ. शरद्वत मुखर्जी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का नेतृत्व करेंगे।
जगन्नाथ चट्टोपाध्याय को उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग सौंपा गया है। वहीं दूध कुमार मंडल को कृषि विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
स्कूल शिक्षा विभाग दीपक बर्मन को मिला है, जबकि शंकर घोष को पर्यटन एवं संसदीय कार्य विभाग का प्रभार सौंपा गया है।

उद्योग, परिवहन और शहरी विकास विभाग किसे मिले?
तपस रॉय को उद्योग, वाणिज्य एवं उद्यम, सार्वजनिक उपक्रम तथा औद्योगिक पुनर्निर्माण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
अर्जुन सिंह को श्रम एवं परिवहन विभाग का कार्यभार मिला है। वहीं अग्निमित्रा पाल को शहरी विकास एवं नगर मामलों का विभाग सौंपा गया है।
निशीथ प्रामाणिक को उत्तर बंगाल विकास और जल संसाधन जांच एवं विकास विभाग दिया गया है। अशोक किर्तनिया खाद्य एवं सहकारिता विभाग का नेतृत्व करेंगे।
आदिवासी, अल्पसंख्यक और पर्यावरण विभागों की जिम्मेदारी
खुदीराम टुडू को जनजातीय विकास, अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा विभाग सौंपा गया है। वहीं मनोज कुमार उरांव को वन एवं पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी मिली है।
कल्याण चक्रवर्ती सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण एवं बागवानी विभाग संभालेंगे।
अरूप कुमार दास को सिंचाई एवं जलमार्ग विभाग तथा अजय कुमार पोद्दार को लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण विभाग का प्रभार दिया गया है।
स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों को भी मिली अहम जिम्मेदारी
सरकार ने कई नेताओं को स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारियां सौंपी हैं।
मालती रावा रॉय को महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, स्वयं सहायता समूह एवं स्वरोजगार तथा कार्यक्रम निगरानी विभाग दिए गए हैं।
राजेश महाता पशु संसाधन विकास एवं मत्स्य पालन विभाग संभालेंगे। वहीं इंद्राणी खान को युवा कल्याण एवं खेल तथा उपभोक्ता मामले विभाग की जिम्मेदारी मिली है।
इसके अलावा कई अन्य राज्य मंत्रियों को विभिन्न विभागों में सहयोगी भूमिका सौंपी गई है।
प्रमुख मंत्रियों और विभागों की सूची
| मंत्री | विभाग |
|---|---|
| स्वपन दासगुप्ता | वित्त |
| तपस रॉय | उद्योग |
| डॉ. शरद्वत मुखर्जी | स्वास्थ्य |
| जगन्नाथ चट्टोपाध्याय | उच्च शिक्षा |
| दूध कुमार मंडल | कृषि |
| दीपक बर्मन | स्कूल शिक्षा |
| शंकर घोष | पर्यटन एवं संसदीय कार्य |
| अर्जुन सिंह | श्रम एवं परिवहन |
| कल्याण चक्रवर्ती | आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स |
| मनोज कुमार उरांव | वन एवं पर्यावरण |
| अग्निमित्रा पाल | शहरी विकास |
| निशीथ प्रामाणिक | उत्तर बंगाल विकास |
| अशोक किर्तनिया | खाद्य एवं सहकारिता |
| खुदीराम टुडू | जनजातीय विकास एवं अल्पसंख्यक मामले |
क्या संकेत देता है यह विभागीय बंटवारा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विभागों का यह आवंटन सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। मुख्यमंत्री ने गृह, बिजली और भूमि सुधार जैसे रणनीतिक विभाग अपने पास रखे हैं, जबकि वित्त, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख मंत्रालयों को अनुभवी नेताओं के हवाले किया गया है।
आने वाले समय में इन विभागों के कामकाज के आधार पर राज्य सरकार के प्रशासनिक एजेंडे और विकास योजनाओं की दिशा अधिक स्पष्ट होगी।
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा विभागों के आवंटन के साथ ही नई मंत्रिपरिषद पूरी तरह सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में गठित टीम अब राज्य के विकास, प्रशासनिक सुधार और जनकल्याण योजनाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेगी। वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग जैसे प्रमुख विभागों में किए गए आवंटन पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर बनी रहेगी।