O Romeo Review: ‘उस्तरा’ से ‘रोमियो’ तक की कहानी में थोड़ा भटके Vishal Bhardwaj; Avinash Tiwary और Nana Patekar पड़े भारी

मुंबई। Vishal Bhardwaj और Shahid Kapoor की मच अवेटेड फिल्म ‘O Romeo’ 13 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। गैंगस्टर ड्रामा और लव स्टोरी के मिश्रण के रूप में पेश की गई इस फिल्म में एक्शन, इमोशन और बदले की कहानी को साथ पिरोने की कोशिश की गई है। हालांकि फिल्म कई जगह प्रभावित करती है, लेकिन ‘उस्तरा’ को ‘रोमियो’ बनाने की यात्रा में कहानी थोड़ी बिखरती नजर आती है।

1995 के मुंबई की पृष्ठभूमि
फिल्म की कहानी 90 के दशक के मुंबई अंडरवर्ल्ड पर आधारित है। शाहिद कपूर ने उस्तरा नाम के एक शार्पशूटर का किरदार निभाया है, जो आईबी ऑफिसर खान (नाना पाटेकर) के लिए काम करता है। खान ने कभी उस्तरा की जान बचाई थी, इसलिए वह उसके इशारों पर गैंगस्टरों का सफाया करता है।

कहानी तब मोड़ लेती है जब अफ्शा (Triptii Dimri) चार खतरनाक लोगों की सुपारी लेकर उस्तरा के पास पहुंचती है। इसके पीछे उसकी निजी दुश्मनी और पति महबूब कुरैशी (Vikrant Massey) से जुड़ी दर्दनाक कहानी है।
इंटरवल से ठीक पहले जलाल (अविनाश तिवारी) की एंट्री फिल्म को नई दिशा देती है। स्पेन में बैठकर मुंबई के अंडरवर्ल्ड को कंट्रोल करने वाला जलाल बेहद खौफनाक अंदाज में दिखाया गया है। सेकेंड हाफ में फिल्म गैंगवार से आगे बढ़कर एक इमोशनल लव स्टोरी में तब्दील हो जाती है, जहां उस्तरा अपने प्यार के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाता है।

अभिनय ने मारी बाजी
शाहिद कपूर अपने इंटेंस अवतार में प्रभावशाली हैं। कई दृश्यों में उनका अंदाज ‘कमीने’ और ‘हैदर’ की याद दिलाता है। हालांकि इस बार उनके सामने अविनाश तिवारी और नाना पाटेकर ज्यादा मजबूत नजर आते हैं।
अविनाश तिवारी ने जलाल के किरदार में जान डाल दी है। उनकी आंखों का वहशीपन और क्लोज-अप शॉट्स में झलकता गुस्सा दर्शकों पर असर छोड़ता है। वहीं नाना पाटेकर अपनी खास शैली और संवाद अदायगी से फिल्म में हल्कापन भी लाते हैं।

तृप्ति डिमरी ने भी इस बार सिर्फ ग्लैमर नहीं बल्कि एक्शन और इमोशन दोनों में दम दिखाया है। उनका किरदार कहानी की धुरी बनकर उभरता है।

सहायक कलाकारों का योगदान
Tamannaah Bhatia, Disha Patani और Farida Jalal सीमित समय में भी अपनी छाप छोड़ते हैं। खासकर फरीदा जलाल का बदला हुआ अंदाज चौंकाता है।
निर्देशन और संगीत
विशाल भारद्वाज का निर्देशन वातावरण रचने में सफल रहता है, लेकिन पटकथा कुछ हिस्सों में कमजोर पड़ती है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर प्रभावशाली है, हालांकि कहानी की रफ्तार कहीं-कहीं धीमी हो जाती है।

कुल मिलाकर ‘O Romeo’ एक स्टाइलिश गैंगस्टर ड्रामा है, जो अपने दमदार अभिनय के कारण देखने लायक बनती है। हालांकि कहानी का संतुलन और कसावट और बेहतर हो सकती थी।

रेटिंग: 3/5

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