अहमदाबाद। गुजरात में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर लाखों योग्य मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रची जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से संचालित की जा रही है, ताकि असली मतदाताओं का मतदान अधिकार प्रभावित हो सके।
क्या है पूरा मामला?
गुजरात में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई थी। कांग्रेस के मुताबिक 2002 की वोटर लिस्ट की तुलना में करीब 74 लाख नाम हटाए गए।
चुनाव आयोग ने 18 जनवरी तक फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा तय की थी। फॉर्म-7 का उपयोग किसी मतदाता का नाम हटवाने या गलत पंजीकरण पर आपत्ति दर्ज करने के लिए किया जाता है।
कांग्रेस का आरोप: 12 लाख से ज्यादा आपत्तियां संदिग्ध
Amit Chavda, अध्यक्ष, Gujarat Pradesh Congress Committee ने आरोप लगाया कि 15 जनवरी तक फॉर्म-7 की संख्या बेहद कम थी, लेकिन 15 जनवरी के बाद अचानक बड़ी संख्या में आवेदन जमा हुए।
उनके अनुसार, 22 जनवरी को चुनाव आयोग ने बताया कि कुल 12,59,229 आपत्तियां दर्ज की गई हैं। कांग्रेस का दावा है कि इनमें से बड़ी संख्या फर्जी या बिना संबंधित मतदाता की जानकारी के दाखिल की गई हैं।
चावड़ा ने कहा कि कई लोगों ने एफिडेविट देकर बताया है कि उनके नाम पर आपत्तियां उनकी जानकारी या सहमति के बिना दर्ज कराई गईं।

CCTV फुटेज की मांग
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांग की है कि 18 जनवरी को फॉर्म-7 जमा कराने वालों की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आपत्तियां किन लोगों ने दाखिल कीं।
पार्टी का आरोप है कि यह सब भाजपा के इशारे पर किया गया है, ताकि लाखों मतदाताओं को मतदान से वंचित किया जा सके।
शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस, ‘वोट चोरी’ का मुद्दा गरमाया
कांग्रेस ने राज्यभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को उठाया है। वडोदरा शहर कांग्रेस अध्यक्ष रूत्विज जोशी ने दावा किया कि कई विधानसभा क्षेत्रों में हजारों फर्जी फॉर्म-7 आवेदन जमा किए गए।
उनके अनुसार:
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वडोदरा सिटी – 4569 आवेदन
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सयाजीगंज – 8195 आवेदन
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अकोटा – 13188 आवेदन
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रावपुरा – 19045 आवेदन
कांग्रेस ने फर्जी दस्तावेज जमा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
सूरत के दो कांग्रेस नेताओं ने राज्य में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण को Gujarat High Court में चुनौती दी है।
10 फरवरी को दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है।
राज्य में अंतिम मतदाता सूची 17 फरवरी 2026 को प्रकाशित होने की उम्मीद है। दावे और आपत्तियों की समयसीमा समाप्त हो चुकी है।
आंकड़े क्या कहते हैं?
सूत्रों के मुताबिक इस पुनरीक्षण के दौरान:
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लगभग 6.88 लाख नए नाम जोड़ने के आवेदन
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लगभग 9.88 लाख नाम हटाने के आवेदन प्राप्त हुए
मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद राज्य के बड़े शहरों में होने वाले महानगरपालिका चुनाव इसी नई सूची के आधार पर कराए जाएंगे।
गुजरात में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस इसे ‘वोट चोरी’ की साजिश बता रही है, जबकि चुनाव आयोग की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
अब नजरें गुजरात हाईकोर्ट की सुनवाई और 17 फरवरी को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची पर टिकी हैं। यह विवाद आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।