वडोदरा/अहमदाबाद। देशभर में बढ़ते डीजे कल्चर के बीच गुजरात के वडोदरा ने एक अलग मिसाल पेश की है। यहां शहर पुलिस ने सेंसिटिव पुलिसिंग का उदाहरण देते हुए पुराने शहर में डीजे पर प्रभावी रोक लागू कर दी है।
मामला तब उठा जब डीजे की तेज आवाज और वाइब्रेशन से शहर की ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई। इसके बाद Vadodara Municipal Corporation (वीएमसी) ने मई 2024 में चार दरवाजों के भीतर आने वाले पुराने शहर क्षेत्र को ‘नो डीजे जोन’ घोषित किया।
हालांकि, इस आदेश को जमीनी स्तर पर लागू करने की जिम्मेदारी Vadodara City Police पर थी।
सॉफ्ट अप्रोच से मिली सफलता
शहर पुलिस ने डंडे की बजाय संवाद का रास्ता चुना। 1996 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी नरसिम्हा कोमार के नेतृत्व में कम्युनिटी मोबिलाइजेशन शुरू किया गया। धार्मिक आयोजकों, स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों से लगातार बैठकें की गईं।
लोगों को समझाया गया कि विरासत सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि शहरवासियों की भी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के ‘विरासत के साथ विकास’ विजन का हवाला देते हुए हेरिटेज संरक्षण की अहमियत बताई गई।
धीरे-धीरे लोगों का सहयोग मिला और आज पुराने शहर में डीजे प्रतिबंध प्रभावी रूप से लागू है।

चार ऐतिहासिक दरवाजों की सुरक्षा
वडोदरा कभी गायकवाड़ रियासत का केंद्र रहा है और यहां कई ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं। पुराने शहर में चार प्रमुख दरवाजे हैं:
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मांडवी गेट (केंद्र)
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लेहरीपुरा गेट (पश्चिम)
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चंपानेर गेट (उत्तर)
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पानी गेट (पूर्व)
इनके अलावा भव्य Laxmi Vilas Palace भी शहर की पहचान है।
डीजे पर रोक सिर्फ पुराने शहर तक सीमित है। नए शहर में नियमों के तहत अनुमति दी जाती है।
अहमदाबाद से प्रेरणा
गुजरात का Ahmedabad वर्ष 2017 में यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज सिटी घोषित किया जा चुका है। वडोदरा भी अपनी सांस्कृतिक पहचान और विरासत संरक्षण के जरिए नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
वडोदरा को ‘गरबा कैपिटल’ के रूप में भी पहचान मिली है, जहां बड़े पैमाने पर आयोजन होते हैं। बावजूद इसके, पुराने शहर में विरासत संरक्षण को प्राथमिकता दी गई।
हेरिटेज लवर्स में खुशी
शहर पुलिस की इस पहल से हेरिटेज प्रेमियों और सांस्कृतिक संगठनों में खुशी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए जाते तो ऐतिहासिक संरचनाओं को स्थायी नुकसान हो सकता था।
यह पहल दिखाती है कि कानून लागू करने के लिए हमेशा कठोरता जरूरी नहीं होती, संवाद और जनभागीदारी से भी बदलाव संभव है।
वडोदरा में डीजे प्रतिबंध की सफलता सिर्फ प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सामुदायिक सहयोग की मिसाल है। पुलिस ने सख्ती की बजाय संवेदनशीलता दिखाई और शहर की धरोहर को बचाने में जनता को भागीदार बनाया। यह मॉडल देश के अन्य हेरिटेज शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।