अहमदाबाद। गुजरात सरकार ने विधानसभा में अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करते हुए विकास का नया खाका सामने रखा है। वित्त मंत्री कनुभाई देसाई ने 4,08,053 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट पेश किया। यह उनका लगातार पांचवां बजट है।
बजट की थीम ‘ज्ञान’—गरीब, युवा, अन्नदाता और नारीशक्ति—पर केंद्रित रही। सरकार ने समावेशी और सतत विकास के साथ खेल, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दी है।
ओलंपिक 2036 पर फोकस
कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के बाद अब गुजरात की नजर 2036 ओलंपिक पर है। अहमदाबाद ने 2036 ओलंपिक की दावेदारी पेश की है। प्रधानमंत्री Narendra Modi भी अहमदाबाद में ओलंपिक आयोजन की इच्छा जता चुके हैं।
इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बजट में 1,278 करोड़ रुपये का विशेष ‘ओलंपिक बजट’ रखा गया है। इसका उद्देश्य खेल और परिवहन सुविधाओं को सशक्त बनाकर अहमदाबाद को ‘ओलंपिक रेडी सिटी’ बनाना है।
स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़ा बूस्ट
सरकार ने Sardar Vallabhbhai Patel Sports Complex के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसी कॉम्पलेक्स में स्थित Narendra Modi Stadium दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियमों में गिना जाता है।
खेल अवसंरचना के विस्तार से गुजरात को वैश्विक खेल मानचित्र पर स्थापित करने की रणनीति स्पष्ट दिखाई देती है।

कृषि और ग्रामीण विकास पर जोर
वित्त मंत्री ने कृषि, किसान कल्याण और सहकारिता विभाग के लिए 24,022 करोड़ रुपये का प्रावधान किया।
इसके अलावा—
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इंडस्ट्रीज और माइंस विभाग: 13,942 करोड़ रुपये
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पर्यटन, तीर्थयात्रा और सिविल एविएशन: 3,090 करोड़ रुपये
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पोर्ट्स और ट्रांसपोर्ट: 4,314 करोड़ रुपये
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नर्मदा, जल संसाधन, जल आपूर्ति और कल्पसर: 25,960 करोड़ रुपये
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पंचायत, ग्रामीण आवास और ग्रामीण विकास: 14,858 करोड़ रुपये
सरकार ने जल संसाधन और ग्रामीण ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है।
संस्कृति की झलक भी
बजट दस्तावेज के कवर पर 1,200 वर्ष पुरानी वारली कला में आदिवासी देवी कंसारी देवी की छवि दर्शाई गई, जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का प्रतीक है।
गुजरात का 4.08 लाख करोड़ रुपये का बजट सिर्फ आंकड़ों का विस्तार नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विजन का संकेत है। ‘ज्ञान’ थीम के जरिए सामाजिक सशक्तिकरण और ओलंपिक 2036 की तैयारी के जरिए वैश्विक महत्वाकांक्षा—दोनों को संतुलित करने की कोशिश की गई है। अब नजर इस पर रहेगी कि ये घोषणाएं जमीन पर किस गति से उतरती हैं और अहमदाबाद वाकई ‘ओलंपिक रेडी’ बन पाता है या नहीं।