लखनऊ: में दरोगा भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने प्रशासन और राजनीति दोनों में हलचल मचा दी है।
मंगलवार को यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड मुख्यालय में एक भगवाधारी युवक ने आत्मदाह करने की कोशिश की, जिससे वहां हड़कंप मच गया।
केरोसीन डालकर जान देने की कोशिश
जानकारी के अनुसार, युवक अपने साथ एक बोतल में केरोसीन लेकर भर्ती बोर्ड कार्यालय पहुंचा था।
जैसे ही वह मेन गेट से अंदर घुसा, उसने अपने ऊपर केरोसीन डालना शुरू कर दिया।
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया और बड़ा हादसा होने से बचा लिया।
बुलंदशहर का रहने वाला है युवक
युवक की पहचान दीपक शर्मा के रूप में हुई है, जो बुलंदशहर का निवासी है।
तलाशी के दौरान उसके पास से केरोसीन, माचिस और एक बैनर भी बरामद हुआ।
बैनर पर लिखा था— “ब्राह्मण का अपमान नहीं सहा जाएगा।”
‘पंडित’ शब्द पर जताई आपत्ति
दीपक शर्मा का आरोप है कि हाल ही में आयोजित दरोगा भर्ती परीक्षा में एक सवाल में ‘पंडित’ शब्द को गलत संदर्भ में इस्तेमाल किया गया।
प्रश्न था— “अवसर के हिसाब से बदल जाने वाले को क्या कहेंगे?”
इसके विकल्पों में ‘पंडित’, ‘अवसरवादी’, ‘निष्कपट’ और ‘सदाचारी’ शामिल थे।
युवक का कहना है कि इस सवाल से ब्राह्मण समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।

FIR न होने से नाराजगी
दीपक ने बताया कि उसने इस मामले में हजरतगंज थाना में शिकायत दर्ज कराई थी।
हालांकि, तीन दिन बीतने के बाद भी FIR दर्ज नहीं हुई, जिससे वह आक्रोशित हो गया।
इसी के विरोध में उसने आत्मदाह करने का कदम उठाया।
पुलिस ने संभाला मामला
घटना के दौरान पुलिसकर्मियों ने युवक को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह लगातार अपने सवाल पर जवाब मांगता रहा।
आखिरकार पुलिस ने उसे काबू में लेकर हुसैनगंज थाना भेज दिया, जहां उससे पूछताछ की जा रही है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है।
ब्रजेश पाठक ने इस पर बयान देते हुए कहा कि यह मामला स्वीकार्य नहीं है और जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश
योगी आदित्यनाथ ने भी इस विवाद को गंभीरता से लिया है।
उन्होंने सभी भर्ती बोर्डों को निर्देश दिया है कि परीक्षा में जाति और धर्म से जुड़े किसी भी प्रकार के विवादित या आपत्तिजनक सवाल शामिल न किए जाएं।
बढ़ता विवाद और सामाजिक असर
दरोगा भर्ती परीक्षा के इस सवाल को लेकर प्रदेशभर में विरोध देखने को मिल रहा है।
कई संगठनों और नेताओं ने इसे समाज विशेष का अपमान बताया है और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन के लिए चुनौती
यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जहां एक ओर भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सामाजिक संवेदनशीलता भी चर्चा का विषय बन गई है।