देश: में बढ़ती महंगाई, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपीलों पर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि “अब देश चलाना मोदी जी के बस की बात नहीं रह गई है।” उन्होंने पीएम मोदी द्वारा जनता से पेट्रोल कम इस्तेमाल करने, सोना न खरीदने और विदेश यात्राएं टालने जैसी अपीलों को सरकार की “नाकामी” बताया।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना के सिकंदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से सात बड़ी अपीलें की थीं। उन्होंने कहा था कि भारत को विदेशी आयात पर निर्भरता कम करनी होगी और इसके लिए आम लोगों को भी योगदान देना पड़ेगा। पीएम मोदी ने पेट्रोल-डीजल की बचत, खाने के तेल का सीमित उपयोग, विदेश यात्राएं टालने और सोना खरीदने से बचने जैसी सलाह दी थी।
राहुल गांधी का तीखा पलटवार
सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोला। राहुल ने लिखा—
“कल मोदी जी ने जनता से त्याग मांगा। सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम इस्तेमाल करो, खाद और खाने के तेल का उपयोग घटाओ, मेट्रो से चलो, घर से काम करो… ये उपदेश नहीं हैं, ये विफलता हैं।”
राहुल गांधी ने कहा कि 12 वर्षों की सरकार के बाद देश ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जहां सरकार जनता को यह बताने लगी है कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और क्या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार आर्थिक चुनौतियों को संभालने में असफल रही है।
पीएम मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा था कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 70 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। पश्चिम एशिया में युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में नागरिकों को ईंधन की बचत करनी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिए थे कि—
- लोग निजी वाहनों का कम उपयोग करें
- मेट्रो और कारपूलिंग को बढ़ावा दें
- वर्क फ्रॉम होम अपनाएं
- खाने के तेल की खपत कम करें
- रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल घटाएं
- विदेश यात्राएं कुछ समय के लिए टालें
- एक साल तक सोना खरीदने से बचें
पीएम मोदी ने कहा कि इससे देश की विदेशी मुद्रा की बचत होगी और भारत आर्थिक रूप से मजबूत बनेगा।

विपक्ष ने सरकार को घेरा
राहुल गांधी के अलावा अन्य विपक्षी नेताओं ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार अर्थव्यवस्था और विदेश नीति दोनों संभालने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार को अचानक संकट याद आने लगा।
AAP सांसद संजय सिंह ने सवाल उठाया कि यदि हालात इतने गंभीर थे तो चुनावों के दौरान सरकार ने जनता को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी। उन्होंने कहा कि अब आम लोगों पर बोझ डाला जा रहा है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति सरकार के दावों से कहीं ज्यादा गंभीर है। वहीं TMC सांसद साकेत गोखले ने पूछा कि अगर संकट इतना बड़ा है तो मंत्री और वीआईपी अब भी सरकारी संसाधनों का भारी इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं।
बढ़ते आयात ने बढ़ाई चिंता
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में सोने, कच्चे तेल, फर्टिलाइजर और विदेश यात्राओं पर भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च हो रही है।
- सोने के आयात पर इस साल करीब 6 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए
- विदेश यात्राओं पर भारतीयों ने 3.65 लाख करोड़ रुपए खर्च किए
- फर्टिलाइजर आयात पर 1.5 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए
- कच्चे तेल के आयात पर 10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्च हुआ
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में युद्ध लंबा खिंचने पर भारत की अर्थव्यवस्था पर और दबाव बढ़ सकता है।
राजनीतिक माहौल हुआ गरम
राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री ने देशहित में जिम्मेदार नागरिकों की तरह व्यवहार करने की अपील की है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुटा है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के बीच पीएम मोदी की ‘सात अपीलों’ ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी ने इसे सरकार की नाकामी बताया, जबकि भाजपा इसे देशहित में जरूरी कदम बता रही है। अब देखना होगा कि जनता इन अपीलों और विपक्ष के आरोपों को किस नजर से देखती है।