उत्तर प्रदेश: के गोंडा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जिला समन्वयक (निर्माण) विद्याभूषण मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह कार्रवाई परिषदीय स्कूलों में डेस्क सप्लाई के टेंडर में कथित कमीशनखोरी के आरोपों के बाद की गई है।
पुलिस के अनुसार, यह मामला 564 परिषदीय स्कूलों में फर्नीचर सप्लाई से जुड़ा है, जिसमें चयनित फर्म से कमीशन मांगे जाने के आरोप लगे थे। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की गई और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपी को हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तारी की कार्रवाई बुधवार देर शाम की गई, जब पुलिस टीम ने उन्हें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय से हिरासत में लिया। इसके बाद उनका मेडिकल परीक्षण गोंडा मेडिकल कॉलेज में कराया गया और फिर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
यह पूरा मामला ‘नीमन सिटिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी के मालिक मनोज कुमार पांडेय की शिकायत पर सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 15 करोड़ रुपये के टेंडर में 15% कमीशन की मांग की गई थी। इस आरोप के बाद मामला तेजी से तूल पकड़ गया और एंटी करप्शन कोर्ट ने हस्तक्षेप किया।
एंटी करप्शन कोर्ट, गोरखपुर के आदेश पर 4 नवंबर को नगर कोतवाली में इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस केस में अतुल कुमार तिवारी (निलंबित पूर्व बीएसए), प्रेमशंकर मिश्रा और विद्याभूषण मिश्रा को आरोपी बनाया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, डेस्क सप्लाई का काम देने के बदले ठेकेदार से मोटी रकम की मांग की गई थी। आरोप यह भी है कि बिना कमीशन दिए काम में बाधाएं डाली जा रही थीं, जिससे ठेकेदार पर दबाव बनाया जा सके।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह मामला सिर्फ एक टेंडर तक सीमित है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
इस मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस विभाग का उद्देश्य बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराना है, वहीं इस तरह के भ्रष्टाचार के आरोप सामने आना चिंताजनक है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है और मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-टेंडरिंग सिस्टम के बावजूद अगर भ्रष्टाचार हो रहा है, तो यह प्रशासनिक खामियों की ओर इशारा करता है।
फिलहाल, पुलिस और जांच एजेंसियां इस मामले में आगे की कार्रवाई में जुटी हैं और जल्द ही और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।