उत्तर प्रदेश: में चल रही दरोगा भर्ती परीक्षा के एक सवाल ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सामान्य हिंदी के प्रश्नपत्र में ‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाले व्यक्ति’ के लिए विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द दिए जाने पर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
इस मामले पर संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी जाति, धर्म या समुदाय को लेकर अमर्यादित टिप्पणी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही भर्ती बोर्डों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में ऐसे मामलों से बचा जाए।
क्या था सवाल, जिस पर मचा विवाद
दरअसल, शनिवार को आयोजित दरोगा भर्ती परीक्षा के सामान्य हिंदी के प्रश्नपत्र में पूछा गया था—
“अवसर के हिसाब से बदल जाने वाले को क्या कहेंगे?”
इसके चार विकल्प दिए गए थे—
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पंडित
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अवसरवादी
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निष्कपट
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सदाचारी
सवाल सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और कई लोगों ने इसे ब्राह्मण समाज की भावनाओं से जोड़ते हुए आपत्ति जताई।
योगी आदित्यनाथ ने दिए सख्त निर्देश
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने सभी भर्ती बोर्डों के चेयरपर्सन को निर्देश दिए कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय किसी भी जाति, पंथ या समुदाय की मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी से बचा जाए।
उन्होंने कहा कि अगर कोई पेपर सेटर बार-बार इस तरह की गलती करता है, तो उसे तुरंत प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस तरह के निर्देश पेपर सेटर्स के एमओयू का हिस्सा बनाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने कहा- होगी कार्रवाई
इस विवाद पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री Brajesh Pathak ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मामला स्वीकार्य नहीं है और इसकी जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा के कई नेताओं और विधायकों ने भी इस सवाल पर आपत्ति जताई और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच की मांग की।

भर्ती बोर्ड ने दी सफाई
इस मामले पर Uttar Pradesh Police Recruitment and Promotion Board ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्टीकरण जारी किया।
बोर्ड ने कहा कि प्रश्नपत्र बेहद गोपनीय प्रक्रिया के तहत तैयार किए जाते हैं और इन्हें परीक्षा केंद्रों पर सीलबंद पैकेट में खोला जाता है। बोर्ड के किसी अधिकारी या कर्मचारी को भी पहले से प्रश्नपत्र देखने की अनुमति नहीं होती।
फिलहाल इस मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा नियमों में नरमी
इस विवाद के बीच भर्ती बोर्ड ने परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा नियमों को लेकर भी नया निर्देश जारी किया।
बोर्ड ने कहा कि अभ्यर्थियों से धार्मिक पहचान से जुड़े प्रतीक जैसे कलावा या मंगलसूत्र हटवाए नहीं जाएंगे। हालांकि, सुरक्षा जांच के तहत गले की चेन, कंगन, जूते और बेल्ट जैसी चीजें उतरवाने का नियम लागू रहेगा।
75 जिलों में हो रही परीक्षा
दरोगा भर्ती परीक्षा पूरे उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में आयोजित की जा रही है। इसके लिए कुल 1090 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।
इस भर्ती के जरिए 4,543 पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं। परीक्षा के लिए कुल 15,75,760 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है, जिनमें 11,66,386 पुरुष और 4,09,374 महिला उम्मीदवार शामिल हैं।
परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जा रही है—
पहली पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक।
पूर्व डीजीपी ने दिया अलग नजरिया
इस विवाद पर उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी Sulakhan Singh ने कहा कि पुलिस भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र बेहद गोपनीय प्रक्रिया से तैयार किए जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि “पंडित” शब्द का अर्थ केवल किसी जाति से नहीं बल्कि विद्वान व्यक्ति से भी होता है, इसलिए सवाल को लेकर पैदा हुआ विवाद अनावश्यक भी हो सकता है।
दरोगा भर्ती परीक्षा के एक सवाल ने उत्तर प्रदेश में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। हालांकि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप और जांच के आदेश के बाद मामले को शांत करने की कोशिश की जा रही है। यह घटना भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत को भी रेखांकित करती है।