₹1000 करोड़ की डील का वायरल दावा: हुमायूं कबीर बोले- फेक वीडियो; TMC ने उठाए PMO और ED पर बड़े सवाल

पश्चिम बंगाल: की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के चेयरमैन हुमायूं कबीर का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं के साथ ₹1000 करोड़ की डील पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और कई पक्षों ने इसे फर्जी बताया है।

वायरल वीडियो को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। इसमें कथित तौर पर हुमायूं कबीर यह कहते हुए सुनाई देते हैं कि वे किसी भी कीमत पर ममता बनर्जी को सत्ता से हटाना चाहते हैं। साथ ही, वीडियो में यह भी दावा किया गया है कि यदि उनकी रणनीति सफल होती है तो उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।

कबीर का दावा- वीडियो AI से बना फर्जी

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए हुमायूं कबीर ने साफ कहा कि यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी है और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि वे इस मामले को लेकर कोर्ट जाएंगे और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।

कबीर ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी हिमंता बिस्व सरमा या मोहन यादव से मुलाकात नहीं की और न ही किसी तरह की बातचीत हुई है। उनके मुताबिक यह पूरा मामला उनकी छवि खराब करने की साजिश है।

वीडियो में बड़े नेताओं से संपर्क का दावा

वायरल वीडियो में यह भी दावा किया जा रहा है कि कबीर की बातचीत पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी से हुई थी। साथ ही उन्हें दिल्ली ले जाकर केंद्रीय नेतृत्व से मिलाने की बात कही गई थी।

वीडियो में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के कुछ अधिकारियों से संपर्क का भी जिक्र किया गया है, हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा ₹200 करोड़ एडवांस मिलने की बात भी कही जा रही है, जिसने विवाद को और गहरा कर दिया है।

TMC का आरोप- ED चुप क्यों?

इस पूरे विवाद पर तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह मामला इतना गंभीर है, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब तक चुप क्यों है।

घोष ने आरोप लगाया कि यह मामला चुनावी प्रक्रिया और पैसों के लेन-देन से जुड़ा हो सकता है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी कथित तौर पर “B टीम” और “C टीम” बनाकर मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।

चुनावी माहौल में बढ़ा विवाद

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का माहौल गरमाया हुआ है। हुमायूं कबीर की पार्टी AJUP राज्य की 294 सीटों में से 118 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उनका गठबंधन AIMIM के साथ है, जो इस चुनाव को और रोचक बना रहा है।

राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है, जबकि परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में इस तरह के विवाद चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना सकते हैं।

AI और फेक वीडियो का बढ़ता खतरा

इस घटना ने एक बार फिर चुनावी राजनीति में AI और डीपफेक तकनीक के संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में फर्जी वीडियो बनाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है, जिससे नेताओं और राजनीतिक दलों की छवि प्रभावित हो सकती है।

ऐसे मामलों में सच्चाई तक पहुंचने के लिए तकनीकी जांच और आधिकारिक पुष्टि बेहद जरूरी हो जाती है, ताकि गलत सूचना के प्रसार को रोका जा सके।

हुमायूं कबीर से जुड़ा वायरल वीडियो राजनीतिक विवाद का बड़ा मुद्दा बन गया है, लेकिन इसकी पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है। एक ओर जहां विपक्ष जांच की मांग कर रहा है, वहीं कबीर इसे फर्जी बताते हुए कानूनी कार्रवाई की बात कर रहे हैं। ऐसे में इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आना बेहद जरूरी है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर विश्वास बना रहे।

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