लखनऊ: में पकड़े गए आतंकी मॉड्यूल मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। चारों आरोपियों को कोर्ट ने 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब उत्तर प्रदेश एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) इनसे गहन पूछताछ कर बड़े नेटवर्क का खुलासा करने की तैयारी में है। शुरुआती जांच में ही कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं।
शनिवार को ATS कमांडो ने चारों आरोपियों—शाकिब, विकास गहलावत, लोकेश उर्फ पपला पंडित और अरबाब—को कड़ी सुरक्षा के बीच लखनऊ की विशेष अदालत में पेश किया। ATS ने कोर्ट से कस्टडी रिमांड की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने पांच दिन की रिमांड मंजूर कर दी। इस दौरान एजेंसी आरोपियों से पाकिस्तानी हैंडलर्स और आतंकी नेटवर्क के बारे में विस्तार से पूछताछ करेगी।
कई शहरों में हमले की थी साजिश
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों ने लखनऊ के अलावा गाजियाबाद और अलीगढ़ जैसे शहरों में कई संवेदनशील स्थानों की रेकी की थी। इनमें रेलवे संपत्ति, सरकारी संस्थान और कुछ राजनीतिक व्यक्तियों के ठिकाने शामिल बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां अब इन सभी लोकेशनों की सुरक्षा का पुनर्मूल्यांकन कर रही हैं।
छोटे हमलों से कर रहे थे ‘ट्रायल’
ATS को यह भी शक है कि आरोपियों ने पहले छोटे स्तर पर आगजनी और उपद्रव की घटनाएं कर अपने हैंडलर्स को ‘ट्रायल’ दिखाया था। इन घटनाओं के वीडियो बनाकर विदेश में बैठे आकाओं को भेजे गए थे, जिसके बदले उन्हें आर्थिक सहायता भी मिली। इससे उनके हौसले और बढ़ते गए और वे बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी में जुट गए।

डिजिटल सबूतों से मिलेंगे बड़े सुराग
गिरफ्तार आरोपियों के पास से ज्वलनशील पदार्थ, 7 स्मार्टफोन और कई आपत्तिजनक पंपलेट बरामद किए गए हैं। ATS अब इन मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि चैट हिस्ट्री, बैंक ट्रांजैक्शन और विदेशी संपर्कों से जुड़े अहम सुराग मिल सकते हैं।
पाकिस्तानी हैंडलर्स पर फोकस
ATS अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ का सबसे अहम पहलू पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क का खुलासा करना है। यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों का संपर्क किन माध्यमों से हो रहा था और उन्हें निर्देश कहां से मिल रहे थे। इसके अलावा फंडिंग के स्रोत और ट्रांजैक्शन चैनल्स की भी जांच की जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर
इस मामले के सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील स्थानों, रेलवे स्टेशनों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां लगातार इनपुट जुटा रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
बड़ी साजिश का हो सकता है खुलासा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ चार आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। ATS की पूछताछ में कई नए नाम सामने आने की संभावना है, जिससे इस पूरे मॉड्यूल की जड़ तक पहुंचा जा सकेगा।
लखनऊ में आतंकी साजिश का यह खुलासा सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि, यह भी साफ है कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। आने वाले दिनों में ATS की पूछताछ से और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जो देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम होंगे।