नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में नक्सलवाद को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। सरकार द्वारा 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के लक्ष्य की समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले यह चर्चा हुई, जिसने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया।
बहस की शुरुआत शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने की। उन्होंने कहा कि सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई की है और जो लोग इसे खत्म करना असंभव मानते थे, उन्हें अब जवाब मिल चुका है।
महुआ मोइत्रा का सरकार पर हमला
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बहस के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज देश “राइटविंग आतंकवाद” से जूझ रहा है और सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है।
महुआ ने यह भी कहा कि नक्सलवाद केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं था, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता से जुड़ा हुआ था। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में उनकी सरकार ने वेलफेयर योजनाओं के जरिए नक्सलवाद पर काबू पाया।
सरकार का पक्ष और अमित शाह का जवाब
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जवाब का इंतजार है, जो इस बहस को निर्णायक दिशा दे सकता है। इससे पहले वे कई बार कह चुके हैं कि सरकार 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।
संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि सरकार अपने वादे पर कायम है और देश में नक्सल गतिविधियों में काफी कमी आई है।
IBC संशोधन बिल 2025 पास
इसी बीच लोकसभा ने आर्थिक सुधार के लिहाज से अहम इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) संशोधन बिल 2025 को भी पारित कर दिया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह बिल दिवाला प्रक्रिया को और मजबूत बनाएगा और बैंकिंग सेक्टर की स्थिति सुधारने में मदद करेगा।
उन्होंने बताया कि 2016 में लागू IBC कानून के बाद से बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) की वसूली में सुधार हुआ है। नए संशोधन में प्रक्रियाओं को तेज और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है।

आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर टकराव
लोकसभा में सिर्फ नक्सलवाद ही नहीं, बल्कि आर्थिक मुद्दों को लेकर भी हंगामा हुआ। विपक्ष ने रुपये की गिरावट और वैश्विक संकट का मुद्दा उठाया, जबकि सरकार ने दावा किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत का फिस्कल डेफिसिट नियंत्रण में है और विदेशी मुद्रा भंडार भी पर्याप्त है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत की स्थिति अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर है।
नक्सलवाद पर आंकड़ों की जंग
बहस के दौरान नक्सलवाद को लेकर आंकड़ों की भी चर्चा हुई। विपक्ष ने दावा किया कि 2019 से 2025 के बीच हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी हुई है, जबकि सरकार का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों की संख्या लगातार घट रही है।
महुआ मोइत्रा ने यह भी आरोप लगाया कि सिक्योरिटी फंड का पूरा उपयोग नहीं किया गया, जबकि सरकार ने कहा कि विकास योजनाओं और सुरक्षा उपायों के जरिए समस्या पर काबू पाया जा रहा है।
लोकसभा में नक्सलवाद पर बहस ने यह साफ कर दिया कि यह मुद्दा अब भी राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील बना हुआ है। जहां सरकार इसे खत्म करने के अपने प्रयासों को सफलता बता रही है, वहीं विपक्ष इसके पीछे की नीतियों और आंकड़ों पर सवाल उठा रहा है। दूसरी ओर, IBC संशोधन बिल का पास होना आर्थिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में गृह मंत्री का जवाब इस बहस का रुख तय कर सकता है।