अटारी-वाघा बॉर्डर रिट्रीट सेरेमनी का समय बदला, अब शाम 5 बजे गूंजेंगे ‘भारत माता की जय’ के नारे

अमृतसर। पंजाब के अमृतसर स्थित Attari-Wagah Border पर होने वाली प्रसिद्ध रिट्रीट सेरेमनी के समय में बदलाव किया गया है। अब यह भव्य परेड शाम 5 बजे शुरू होगी, जबकि पहले इसका समय शाम 4:30 बजे निर्धारित था।

इस संबंध में प्रोटोकॉल अधिकारी अरुण माहल ने जानकारी देते हुए बताया कि मौसम में बदलाव और दिन के देर से ढलने को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। गर्मियों के मौसम में सूर्यास्त का समय बदल जाता है, जिसके कारण झंडा उतारने की प्रक्रिया को तय प्रोटोकॉल के अनुसार सही समय पर संपन्न करने के लिए सेरेमनी के समय में संशोधन आवश्यक था।


सूर्यास्त के अनुसार बदला गया समय

अरुण माहल के अनुसार, सीमा पर आयोजित होने वाली रिट्रीट सेरेमनी एक निर्धारित सैन्य प्रोटोकॉल के तहत होती है। झंडा उतारने की पूरी प्रक्रिया सूर्यास्त के समय के अनुरूप तय की जाती है।

इसी कारण अब परेड आधा घंटा देरी से, यानी शाम 5 बजे प्रारंभ होगी, ताकि पूरी प्रक्रिया अनुशासन और समयबद्धता के साथ पूरी की जा सके।


हर दिन उमड़ता है देशभक्ति का सैलाब

अटारी-वाघा बॉर्डर पर हर दिन हजारों लोग इस ऐतिहासिक और रोमांचक आयोजन को देखने पहुंचते हैं।

भारतीय सीमा सुरक्षा बल के जवानों द्वारा किया जाने वाला जोशीला मार्च, ऊंचे कदमों की ताल, सटीक समन्वय और झंडा उतारने की प्रक्रिया दर्शकों में देशभक्ति की भावना भर देती है।

जैसे ही “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम” और “हिंदुस्तान जिंदाबाद” के नारे गूंजते हैं, पूरा माहौल राष्ट्रप्रेम से सराबोर हो उठता है।


पर्यटकों के लिए खास आकर्षण

यह सेरेमनी देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर आयोजित यह आयोजन दोनों देशों की सेनाओं के अनुशासन, परंपरा और सामरिक शिष्टाचार का प्रतीक माना जाता है।

प्रोटोकॉल अधिकारी ने पर्यटकों से अपील की है कि वे समय में हुए बदलाव को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाएं, ताकि वे इस गौरवपूर्ण आयोजन का पूरा आनंद उठा सकें।

अटारी-वाघा बॉर्डर की रिट्रीट सेरेमनी केवल एक सैन्य परंपरा नहीं, बल्कि देशभक्ति और अनुशासन का जीवंत प्रतीक है। समय में यह बदलाव मौसम और सूर्यास्त के अनुरूप किया गया है, ताकि कार्यक्रम अपनी गरिमा और प्रोटोकॉल के अनुसार संपन्न हो सके।

अब दर्शकों को शाम 5 बजे इस ऐतिहासिक परेड का साक्षी बनने का अवसर मिलेगा।

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