उत्तर प्रदेश: के गोंडा जिले में चर्चित इंजीनियर अभिषेक श्रीवास्तव आत्महत्या मामले में बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। जिला जज दुर्ग नारायन सिंह ने आरोपी सोनल सिंह की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सोनल सिंह को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
यह मामला पिछले कई महीनों से चर्चा में है और अब कोर्ट के इस निर्णय ने इसे एक नई दिशा दे दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 17 दिसंबर 2025 की है, जब नगर कोतवाली क्षेत्र के गायत्री पुरम में रहने वाले इंजीनियर अभिषेक श्रीवास्तव ने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में उनकी कथित प्रेमिका सोनल सिंह पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया।
घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और सोनल सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वह पिछले लगभग तीन महीनों से गोंडा जेल में बंद हैं।
कोर्ट में क्या हुई सुनवाई?
सोनल सिंह ने जमानत के लिए जिला न्यायालय में आवेदन किया था, जिस पर 27 फरवरी से लगातार सुनवाई चल रही थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला जज दुर्ग नारायन सिंह ने जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और परिस्थितियों को गंभीर मानते हुए यह फैसला सुनाया।

सोनल सिंह की दलीलें
सुनवाई के दौरान सोनल सिंह ने अपने बचाव में कई तर्क दिए। उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है और उन्होंने कोई ऐसा कृत्य नहीं किया जिससे अभिषेक आत्महत्या के लिए मजबूर हुए हों।
उन्होंने यह भी कहा कि उन पर लगाए गए पैसे मांगने के आरोपों का कोई ठोस डिजिटल साक्ष्य मौजूद नहीं है। साथ ही, मृतक की बहन द्वारा भी ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया है जो उनके खिलाफ जाता हो।
सोनल ने अपनी व्यक्तिगत स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि वह एक महिला हैं और उनके दो छोटे बच्चे (6 और 2 वर्ष के) हैं, जिनकी देखभाल के लिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
अभियोजन पक्ष का विरोध
वहीं, सरकारी पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध किया। जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने कोर्ट को बताया कि सोनल सिंह ने अपने पति अजीत सिंह के साथ मिलकर मृतक के खिलाफ एक फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था।
अभियोजन के अनुसार, दोनों आरोपी लगातार अभिषेक से पैसे की मांग कर रहे थे और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे, जिसके कारण उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
चार्जशीट और सुसाइड नोट बने अहम आधार
पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में भी यह उल्लेख किया गया कि सोनल सिंह और उनके पति की प्रताड़ना से परेशान होकर अभिषेक ने आत्महत्या की।
सबसे अहम साक्ष्य के रूप में चार पेज का सुसाइड नोट कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। इस नोट में अभिषेक ने स्पष्ट रूप से सोनल सिंह और अजीत सिंह को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया था।
इसके अलावा, पुलिस ने कुछ डिजिटल साक्ष्य भी पेश किए, जिन्होंने मामले को और मजबूत बना दिया।
परिवार की प्रतिक्रिया
मृतक के भाई उद्धव श्रीवास्तव ने कोर्ट के इस फैसले पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि उन्हें आगे भी न्याय मिलेगा।
मामले की गंभीरता और आगे की प्रक्रिया
कोर्ट द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि मामला गंभीर है और आरोपों को प्रथम दृष्टया मजबूत माना गया है।
अब इस केस में आगे ट्रायल की प्रक्रिया चलेगी, जहां सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।