92वें जन्मदिन पर नाथद्वारा पहुंचीं कोकिलाबेन अंबानी: मुकेश-अनिल समेत पूरा परिवार श्रीनाथजी के चरणों में, भजन संध्या से गूंजा मोती महल चौक

राजसमंद: जिले के धार्मिक नगर नाथद्वारा में मंगलवार शाम भक्ति, परंपरा और पारिवारिक एकजुटता का अद्भुत संगम देखने को मिला। अंबानी परिवार की मुखिया कोकिलाबेन अंबानी ने अपना 92वां जन्मदिन भगवान श्रीनाथजी मंदिर में दर्शन कर मनाया। इस खास मौके पर बिजनेसमैन मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी सहित पूरा अंबानी परिवार मौजूद रहा।

मंदिर परिसर में अंबानी परिवार के आगमन को लेकर विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। शाम करीब 4 बजे परिवार के सदस्य संध्या आरती में शामिल हुए। आरती के दौरान श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन ने गरिमामय वातावरण बनाए रखा।


श्रीनाथजी के चरणों में कृतज्ञता

दर्शन के पश्चात युवाचार्य गोस्वामी विशाल बावा ने पारंपरिक रीति से कोकिलाबेन का सम्मान किया। उन्हें उपरना और रजाई ओढ़ाकर आशीर्वाद दिया गया। यह परंपरा विशेष अतिथियों के सम्मान में निभाई जाती है।

परिवार ने वीडियो कॉल के माध्यम से तिलकायत गोस्वामी इंद्रदमन महाराज और मां राजेश्वरी गोस्वामी से भी आशीर्वाद प्राप्त किया। तिलकायत ने कोकिलाबेन को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की।

अंबानी परिवार करीब ढाई घंटे तक मंदिर परिसर में रहा। इस दौरान उन्होंने पूजा-अर्चना के साथ विशेष अनुष्ठानों में भाग लिया।


एकलिंगनाथ मंदिर में भी दर्शन

नाथद्वारा आने से पहले परिवार ने मेवाड़ के आराध्य देव एकलिंगनाथ मंदिर में भी दर्शन किए। एकलिंगनाथ मंदिर मेवाड़ शासकों का प्रमुख आराध्य स्थल माना जाता है। वहां विशेष पूजा के बाद परिवार नाथद्वारा पहुंचा।


मोती महल चौक में भजन संध्या

जन्मदिन के उपलक्ष्य में महाप्रभुजी की बैठक में 51 वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा स्वस्ति वाचन और मंगलाचरण का पाठ किया गया। मोती महल चौक में भजन संध्या आयोजित हुई, जहां भक्तिमय वातावरण में जन्मदिन की शुभकामनाएं दी गईं।

भजन संध्या में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों के बीच श्रीनाथजी के भजनों की प्रस्तुति दी गई। स्थानीय श्रद्धालुओं ने भी इस अवसर को आध्यात्मिक उत्सव के रूप में देखा।


कौन-कौन रहा मौजूद?

इस विशेष अवसर पर परिवार के कई सदस्य मौजूद रहे—आकाश अंबानी, अनंत अंबानी, श्लोका मेहता अंबानी, राधिका अंबानी, अंशुल अंबानी, अनमोल अंबानी, नीना कोठारी, दीप्ति सालगांवकर सहित अन्य परिजन शामिल हुए। उद्योगपति धनराज नाथवानी भी इस मौके पर उपस्थित रहे।

कोकिलाबेन मंदिर मंडल नाथद्वारा की उपाध्यक्ष भी हैं, जिससे उनका इस धाम से विशेष जुड़ाव माना जाता है।


अंबानी परिवार की धुरी

24 फरवरी 1934 को जामनगर, गुजरात में जन्मीं कोकिलाबेन को अंबानी परिवार की धुरी माना जाता है। वे स्वर्गीय धीरूभाई अंबानी की पत्नी हैं और परिवार को एकजुट रखने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है।

व्यापारिक साम्राज्य के विस्तार के बीच परिवार के मूल्यों और परंपराओं को बनाए रखने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बनाए रखने और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए वे जानी जाती हैं।


समाज सेवा में सक्रिय भूमिका

मुंबई स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल का नाम उनके नाम पर रखा गया है। यह अस्पताल अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए प्रसिद्ध है।

इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के कई प्रकल्पों से उनका जुड़ाव रहा है। उनके जन्मदिन को परिवार ने सादगी और आध्यात्मिक भाव से मनाया।


सुरक्षा और व्यवस्थाएं

अंबानी परिवार के आगमन को देखते हुए मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने विशेष सुरक्षा प्रबंध किए। हालांकि दर्शन व्यवस्था सामान्य श्रद्धालुओं के लिए बाधित नहीं की गई।

मंदिर परिसर में अनुशासन और शांति बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।


श्रद्धालुओं में उत्साह

अंबानी परिवार की उपस्थिति से मंदिर परिसर में उत्साह का माहौल रहा। कई श्रद्धालुओं ने इसे सौभाग्यपूर्ण क्षण बताया। हालांकि कार्यक्रम को निजी रखा गया, फिर भी स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बना रहा।


परंपरा और आधुनिकता का संगम

यह आयोजन केवल जन्मदिन समारोह नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, आस्था और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक भी था। एक ओर देश के सबसे प्रभावशाली उद्योग घरानों में से एक का परिवार, दूसरी ओर सैकड़ों वर्ष पुरानी वैष्णव परंपरा—दोनों का संगम नाथद्वारा में देखने को मिला।

नाथद्वारा में मनाया गया कोकिलाबेन अंबानी का 92वां जन्मदिन आस्था, पारिवारिक एकता और भारतीय संस्कृति का सुंदर उदाहरण रहा। श्रीनाथजी के दर्शन, भजन संध्या और पारंपरिक सम्मान समारोह ने इस अवसर को और भी विशेष बना दिया।

अंबानी परिवार की उपस्थिति ने न केवल धार्मिक आयोजन को गरिमा दी, बल्कि यह भी संदेश दिया कि व्यस्ततम जीवन के बीच आध्यात्मिक जुड़ाव और पारिवारिक मूल्यों की अहमियत बनी रहती है।

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