पश्चिम एशिया: में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत को क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए अहम साझेदार बताते हुए कहा कि नई दिल्ली मध्यस्थता की महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता और उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
भारत दौरे के दौरान अराघची ने भारतीय सरकार और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत हैं।
भारत की भूमिका को बताया अहम
अब्बास अराघची ने कहा कि पिछले दो महीनों में जब ईरान क्षेत्रीय तनाव और आक्रामक कार्रवाइयों का सामना कर रहा था, तब भारत लगातार संपर्क में रहा। उन्होंने कहा कि भारत ने न केवल कूटनीतिक स्तर पर संतुलित रुख अपनाया बल्कि मानवीय सहायता के जरिए भी ईरानी जनता के साथ एकजुटता दिखाई।
उन्होंने कहा, “भारत हमेशा इस क्षेत्र में सम्मानजनक और संतुलित भूमिका निभाता रहा है। फारस की खाड़ी के लगभग सभी देशों के साथ भारत के अच्छे संबंध हैं। ऐसे में भारत शांति प्रक्रिया में सकारात्मक योगदान दे सकता है।”
अराघची ने यह भी कहा कि अगर भारत मध्यस्थता की कोई भूमिका निभाना चाहता है, तो ईरान उसका स्वागत करेगा।
अमेरिका और इस्राइल पर तीखा हमला
ईरानी विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया संकट को लेकर अमेरिका और इस्राइल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक बातचीत चल रही थी, उसी दौरान अमेरिका और इस्राइल की ओर से हमला किया गया।
अराघची ने कहा, “हम बातचीत की प्रक्रिया में थे, लेकिन उसी समय हम पर हमला हुआ। यह उकसावे वाली कार्रवाई थी, जिसने भरोसे को कमजोर किया।”
उन्होंने अमेरिका पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि एक दिन वॉशिंगटन से शांति का संदेश आता है और अगले दिन अलग बयान दिया जाता है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है।

“सीजफायर कायम, लेकिन हालात बेहद नाजुक”
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि फिलहाल संघर्ष विराम लागू है, लेकिन स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी तरह के दबाव या प्रतिबंध के आगे झुकने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा, “ईरानी जनता सम्मान की भाषा समझती है। हमने हर तरह के दबाव का सामना किया है और आगे भी करेंगे।”
हालांकि, अराघची ने यह भी कहा कि ईरान सैन्य समाधान में विश्वास नहीं करता और बातचीत ही स्थायी शांति का रास्ता है। उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों का भी जिक्र करते हुए कहा कि संवाद के रास्ते अब भी खुले हैं।
“हम परमाणु हथियार नहीं चाहते”
ईरानी विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार बनाने की दिशा में नहीं बढ़ा। उन्होंने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह ऊर्जा और वैज्ञानिक विकास के लिए है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गलत धारणाएं फैला रहे हैं। अराघची के मुताबिक, ईरान हमेशा अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान करता रहा है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगातार वैश्विक चिंता बनी हुई है।
चाबहार पोर्ट को बताया ‘गोल्डन गेट’
चाबहार पोर्ट परियोजना को लेकर अराघची ने कहा कि यह भारत और ईरान के रिश्तों का सबसे बड़ा प्रतीक है। उन्होंने इसे भारत के लिए मध्य एशिया, कॉकस और यूरोप तक पहुंच का “गोल्डन गेट” बताया।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस परियोजना की गति कुछ धीमी हुई है, लेकिन ईरान को भरोसा है कि भारत इस परियोजना को आगे बढ़ाता रहेगा।
अराघची के अनुसार, चाबहार पोर्ट सिर्फ व्यापारिक परियोजना नहीं बल्कि क्षेत्रीय रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दिया भरोसा
ईरानी विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर भी बड़ा आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने कहा कि ईरान क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और वह नहीं चाहता कि वैश्विक व्यापार प्रभावित हो।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। परमाणु हथियारों से दूरी, भारत से शांति वार्ता में भूमिका की अपील और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा को लेकर दिए गए संदेश ने यह साफ कर दिया है कि ईरान फिलहाल कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता देना चाहता है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि भारत इस पूरे संकट में कितनी सक्रिय भूमिका निभाता है।