गांवों की तस्वीर बदलने वाली योजना! गुजरात ने बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड, खत्म हुए पीढ़ियों पुराने जमीन विवाद

अहमदाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना’ आज देश के लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। वर्षों से गांवों में संपत्ति के स्पष्ट दस्तावेज न होने के कारण लोग कानूनी अधिकार, बैंक ऋण और विकास योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते थे। लेकिन अब इस योजना ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है।

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत गुजरात ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। राज्य ने न केवल सबसे अधिक ड्रोन सर्वे किए हैं, बल्कि सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी कार्ड जारी कर ग्रामीणों को कानूनी स्वामित्व भी प्रदान किया है।

क्या है प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना?

प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी वाली भूमि का ड्रोन तकनीक से सर्वेक्षण कर संपत्ति मालिकों को आधिकारिक प्रॉपर्टी कार्ड उपलब्ध कराना है। इससे ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का कानूनी प्रमाण मिलता है और वे बैंक ऋण सहित कई वित्तीय सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।

यह योजना ग्रामीण भारत में भूमि विवादों को कम करने और संपत्ति के स्वामित्व को स्पष्ट बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।

गुजरात ने बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने इस योजना को मिशन मोड में लागू किया। राज्य में अब तक 18.50 लाख से अधिक ग्रामीण संपत्तियों के प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा चुके हैं।

आंकड़ों के अनुसार, योजना के दूसरे चरण में पूरे देश में 58,197 गांवों में ड्रोन सर्वे किए गए और 32.35 लाख से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड जारी हुए। इनमें अकेले गुजरात का योगदान 18.50 लाख से अधिक कार्ड का रहा, जो राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक है।

गुजरात में 14,900 गांवों में ड्रोन उड़ानें संचालित की गईं और 11,511 गांवों का सफल प्रमाणीकरण किया गया। यह उपलब्धि राज्य को देश का रोल मॉडल बनाती है।

ड्रोन तकनीक ने बढ़ाई पारदर्शिता

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक और GIS आधारित मैपिंग रही है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग, गुजरात राजस्व विभाग और पंचायती राज विभाग के संयुक्त प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों का सटीक नक्शा तैयार किया गया।

ड्रोन सर्वेक्षण के कारण भूमि सीमाओं की स्पष्ट पहचान हुई और वर्षों से चले आ रहे विवादों को समाप्त करने में मदद मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक ने ग्रामीण प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है।

मेहसाणा और अहमदाबाद सबसे आगे

जिला स्तर पर मेहसाणा और अहमदाबाद ने शानदार प्रदर्शन किया है। मेहसाणा में 1.66 लाख से अधिक तथा अहमदाबाद में 1.53 लाख से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए गए हैं।

इसके अलावा खेड़ा, बनासकांठा और आनंद जिलों में भी एक-एक लाख से ज्यादा प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए गए हैं। इन जिलों में ग्रामीणों को संपत्ति संबंधी कानूनी सुरक्षा मिलने से विकास कार्यों में तेजी आई है।

अब प्रॉपर्टी कार्ड पर मिलेगा बैंक लोन

स्वामित्व योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब ग्रामीण संपत्तियां केवल रहने का साधन नहीं बल्कि वित्तीय संपत्ति भी बन गई हैं।

कानूनी स्वामित्व मिलने के बाद लोग अपने प्रॉपर्टी कार्ड को बैंक में गिरवी रखकर ऋण प्राप्त कर सकते हैं। गुजरात में कई नागरिकों को इसी आधार पर 50 लाख रुपये तक के लोन स्वीकृत किए गए हैं।

इससे छोटे व्यवसाय, कृषि निवेश, शिक्षा और स्वरोजगार को बढ़ावा मिला है। महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को भी इससे विशेष लाभ मिल रहा है।

ग्रामीण विकास की नई दिशा

योजना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए गुजरात में 14,000 से अधिक ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। इससे लोगों को योजना की जानकारी मिली और ग्रामीणों में कानूनी जागरूकता बढ़ी।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वामित्व योजना ग्रामीण भारत को डिजिटल, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। आने वाले वर्षों में यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत कर सकती है।

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