‘मैं 9वीं से शराब पी रहा हूं…’ छात्र की बात सुन चिंतित हुए प्रेमानंद महाराज, बताया बच्चों को सुधारने का सबसे बड़ा मंत्र
वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज एक बार फिर अपने प्रेरणादायक संदेश को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने बच्चों और किशोरों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, गलत संगति और नैतिक पतन जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बात की है। उनके हालिया प्रवचन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे एक छात्र की दर्दनाक कहानी सुनाते हुए समाज और माता-पिता को महत्वपूर्ण संदेश देते नजर आते हैं।
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, एक किशोर छात्र ने उनसे अपनी जीवन की ऐसी सच्चाई साझा की, जिसने उन्हें भी चिंतित कर दिया। छात्र ने बताया कि वह नौवीं कक्षा से ही शराब और गलत आदतों की गिरफ्त में आ गया था। अब जब वह बारहवीं कक्षा में पहुंच चुका है, तो उसे अपना जीवन पूरी तरह बर्बाद होता दिखाई दे रहा है।
महाराज ने कहा कि यह किसी एक बच्चे की कहानी नहीं है, बल्कि आज देशभर में हजारों बच्चे इसी तरह की परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। कम उम्र में नशा, मोबाइल की लत, गलत संगति और अनुशासनहीनता जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
आखिर बच्चे क्यों भटक रहे हैं?
प्रेमानंद महाराज का मानना है कि बच्चों के भटकने की सबसे बड़ी वजह आध्यात्मिक मूल्यों से दूरी है। उनके अनुसार, जब परिवारों में नैतिक शिक्षा और आध्यात्मिक संस्कारों की कमी होती है, तो बच्चों को सही और गलत के बीच अंतर समझना कठिन हो जाता है।
उन्होंने कहा कि आज कई माता-पिता स्वयं जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक शिक्षा को महत्व नहीं देते। ऐसे में बच्चों को अच्छे संस्कार देने की उम्मीद करना मुश्किल हो जाता है। बच्चों को केवल आधुनिक शिक्षा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें चरित्र निर्माण और नैतिकता की शिक्षा भी देना आवश्यक है।
माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका पर जोर
महाराज ने कहा कि पहले के समय में शिक्षक बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए सख्ती भी करते थे और माता-पिता उनका समर्थन करते थे। लेकिन आज स्थिति बदल गई है।
कई बार जब शिक्षक किसी छात्र को अनुशासन में रहने की सलाह देते हैं, तो कुछ अभिभावक ही उनका विरोध करने लगते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि बच्चे अपनी गलतियों को स्वीकार करने के बजाय मनमानी करने लगते हैं।
उनके अनुसार, बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि दोनों मिलकर सही दिशा दिखाएं तो बच्चे गलत रास्ते पर जाने से बच सकते हैं।
छोटी उम्र में बढ़ रही नशे की समस्या
प्रेमानंद महाराज ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज कई बच्चे उस उम्र में नशे की ओर बढ़ रहे हैं, जब उन्हें शिक्षा, खेल और अच्छे संस्कारों पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किशोरावस्था जीवन का सबसे संवेदनशील दौर होती है। यदि इस समय बच्चे गलत संगति में पड़ जाएं, तो उनका पूरा भविष्य प्रभावित हो सकता है। नशे की लत धीरे-धीरे व्यक्ति की सोच, व्यवहार और जीवन को पूरी तरह बदल देती है।
महाराज का कहना है कि कई युवा नशे की जरूरत पूरी करने के लिए अपराध की राह तक चुन लेते हैं। यही कारण है कि समाज में चोरी, लूटपाट और हिंसा जैसी घटनाएं भी बढ़ती दिखाई देती हैं।
बच्चों को सुधारने का क्या है उपाय?
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान अध्यात्म और नैतिक शिक्षा है। उनका मानना है कि यदि बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार, धार्मिक मूल्य, आत्मसंयम और जिम्मेदारी की भावना सिखाई जाए, तो वे गलत रास्ते पर नहीं जाएंगे।
उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे बच्चों को केवल भौतिक सुविधाएं देने तक सीमित न रहें, बल्कि उनके साथ समय बिताएं, उनकी समस्याएं सुनें और उन्हें सही मार्गदर्शन दें।
साथ ही उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे अपने जीवन का उद्देश्य समझें, सकारात्मक सोच अपनाएं और ऐसी आदतों से दूर रहें जो उनके भविष्य को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
समाज के लिए चेतावनी
महाराज का संदेश केवल माता-पिता या बच्चों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए है। उनका मानना है कि यदि आज बच्चों को सही दिशा नहीं दी गई, तो आने वाले समय में सामाजिक समस्याएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।
इसलिए परिवार, स्कूल और समाज—तीनों को मिलकर बच्चों के चरित्र निर्माण पर ध्यान देना होगा। तभी एक स्वस्थ, जागरूक और जिम्मेदार पीढ़ी तैयार की जा सकेगी।