नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम के एशिया कप जीतने के बाद ट्रॉफी प्रेजेंटेशन को लेकर उठा विवाद अब राजनीतिक बहस में भी बदल गया है। भारत ने दुबई में श्रीलंका को 72 रन से हराकर महिला एशिया कप का खिताब जीता और रिकॉर्ड आठवीं बार चैंपियन बना। हालांकि, भारतीय टीम ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के प्रमुख मोहसिन नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की।
इसी घटनाक्रम को लेकर AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने पूछा कि जब भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में इतना तनाव है और सरकार पाकिस्तान को लेकर कड़ा रुख अपनाती है, तो फिर दोनों देशों की टीमों के बीच क्रिकेट क्यों खेला जा रहा है।
‘पूरे देश को बेवकूफ बना रहे हैं’
ओवैसी ने मोहसिन नकवी से ट्रॉफी नहीं लेने के फैसले को लेकर सरकार और क्रिकेट प्रशासन पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, अगर पाकिस्तान के साथ राजनीतिक और दूसरे संबंधों को लेकर इतना सख्त रुख है, तो क्रिकेट के मामले में अलग नीति क्यों दिखाई जा रही है।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि भारत-पाकिस्तान क्रिकेट से जुड़े प्रसारण अधिकारों और व्यावसायिक हितों के कारण दोनों देशों की टीमों का खेलना जारी रखा जाता है।
उन्होंने अपने बयान में सवाल उठाया कि एक तरफ पाकिस्तान के प्रतिनिधि से ट्रॉफी लेने से इनकार किया जाता है, हाथ मिलाने से दूरी बनाई जाती है, लेकिन दूसरी तरफ उसी देश के साथ क्रिकेट मैच खेला जाता है।
उनका कहना था कि इस तरह की नीति से जनता के सामने विरोधाभासी संदेश जाता है।
‘जब खेलना ही है तो फिर ट्रॉफी क्यों नहीं?’
ओवैसी की आपत्ति का मुख्य केंद्र यही है कि भारत-पाकिस्तान क्रिकेट को लेकर सरकार और क्रिकेट बोर्ड को स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए।
उनके मुताबिक, अगर पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना स्वीकार्य है तो फिर प्रतियोगिता के आधिकारिक प्रोटोकॉल को लेकर इस तरह का विवाद क्यों पैदा होता है। दूसरी ओर, अगर पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह के संबंधों का विरोध किया जा रहा है तो क्रिकेट को इससे अलग रखने का कारण भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
यह राजनीतिक बहस ऐसे समय में सामने आई है जब दोनों देशों के बीच रिश्ते पहले से तनावपूर्ण हैं।
हालांकि, भारत और पाकिस्तान की टीमों का बहुराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में आमना-सामना अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट आयोजनों के नियमों और कार्यक्रमों के तहत होता है। BCCI की ओर से भी यह तर्क सामने आया है कि बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत अपनी निर्धारित प्रतिबद्धताओं के अनुसार मैच खेलता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर औपचारिकता या परिस्थिति को स्वीकार करना जरूरी है।
महिला टीम ने रचा इतिहास, फिर ट्रॉफी पर छिड़ा विवाद
पूरे विवाद की शुरुआत महिला एशिया कप के फाइनल के बाद हुई।
दुबई में खेले गए फाइनल में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 183 रन बनाए। इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका की पूरी टीम को 111 रन पर रोक दिया। भारत ने मुकाबला 72 रन से जीतकर आठवीं बार महिला एशिया कप अपने नाम किया।
लेकिन खिताबी जीत के बाद प्रेजेंटेशन समारोह में भारतीय खिलाड़ियों ने हिस्सा नहीं लिया और मोहसिन नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की।
रिपोर्टों के मुताबिक, नकवी मंच पर मौजूद थे और श्रीलंकाई टीम को उपविजेता का चेक और अन्य सम्मान दिए गए। भारतीय टीम की ट्रॉफी प्रेजेंटेशन नहीं हुई, जिसके कारण समारोह में देरी भी हुई।
मोहसिन नकवी कौन हैं?
इस विवाद में मोहसिन नकवी की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह एक साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री, PCB चेयरमैन और ACC अध्यक्ष हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा राजनीतिक तनाव के कारण उनकी मौजूदगी पहले से ही संवेदनशील विषय रही है। पिछले साल पुरुष एशिया कप के दौरान भी भारतीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की थी। महिला टीम के फैसले को उसी रुख की निरंतरता के तौर पर देखा जा रहा है।
BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने बाद में कहा कि महिला टीम का ट्रॉफी नहीं लेने का फैसला बोर्ड और टीम के बीच चर्चा के बाद लिया गया था। उनके मुताबिक नकवी ने इस फैसले पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
पाकिस्तान के साथ क्रिकेट पर ओवैसी का सवाल
ओवैसी ने अपने बयान में पाकिस्तान पर आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोप लगाए और इसी आधार पर दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंधों पर सवाल उठाया।
उन्होंने सरकार से पूछा कि अगर पाकिस्तान को लेकर भारत का राजनीतिक रुख इतना सख्त है तो क्रिकेट को इससे अलग क्यों रखा गया है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर क्रिकेट एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
हालांकि, ओवैसी के आरोप राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और उनके सभी दावों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।
अब आगे क्या?
महिला एशिया कप के इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि भारत-पाकिस्तान के बीच खेल संबंधों को किस तरह देखा जाना चाहिए।
एक ओर बहुराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दोनों देशों की टीमों के बीच मुकाबले होते हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक तनाव का असर प्रेजेंटेशन और औपचारिक कार्यक्रमों पर दिखाई देता है।
ओवैसी ने इसी विरोधाभास को अपने बयान का आधार बनाते हुए सरकार और BCCI से स्पष्ट नीति की मांग की है।

