भारतीय जनता पार्टी: ने संगठन के स्तर पर एक बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नए प्रदेश प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से की गई इन नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। पार्टी के केंद्रीय कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक वरिष्ठ नेताओं और संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नेताओं को अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
इस फेरबदल में सबसे ज्यादा ध्यान उत्तर प्रदेश और बिहार की नियुक्तियों पर है। उत्तर प्रदेश में विनोद तावड़े को नया प्रदेश प्रभारी बनाया गया है, जबकि बिहार में हरीश द्विवेदी को प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों राज्यों की संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर भाजपा की ओर से किए गए बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इन राज्यों में पार्टी का बड़ा राजनीतिक और संगठनात्मक आधार है।
उत्तर प्रदेश में विनोद तावड़े को मिली कमान
भाजपा ने उत्तर प्रदेश के लिए विनोद तावड़े को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है। तावड़े भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ संगठनात्मक पदाधिकारी रहे हैं। उनके साथ उत्तर प्रदेश में सह-प्रभारी के तौर पर जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, डॉ. प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को जिम्मेदारी दी गई है।
इससे पहले अगस्त में भी भाजपा ने उत्तर प्रदेश के संगठन को लेकर बदलाव किया था। उस समय विनोद तावड़े को यूपी प्रभारी और जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी बनाया गया था। अब ताजा नियुक्तियों में यूपी के सह-प्रभारियों की टीम का विस्तार किया गया है।
उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक स्तर पर हाल के दिनों में जिला प्रभारियों की नियुक्तियां भी की गई हैं। 19 सितंबर को प्रदेश भाजपा ने पश्चिम, बृज, कानपुर, अवध, काशी और गोरखपुर क्षेत्रों के विभिन्न सांगठनिक जिलों और महानगरों के लिए नए जिला प्रभारियों की सूची जारी की थी।
बिहार की जिम्मेदारी हरीश द्विवेदी को
बिहार में भाजपा ने हरीश द्विवेदी को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है। उनके साथ संगीता यादव और रोहन गुप्ता को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा के अनुसार ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।
हरीश द्विवेदी भाजपा के संगठन में पहले भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जुड़े रहे हैं। पार्टी की राष्ट्रीय टीम में भी उनका नाम शामिल रहा है। अब उन्हें बिहार की संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई है।

क्यों अहम है संगठन में प्रभारी की भूमिका?
राजनीतिक दलों में प्रदेश प्रभारी और सह-प्रभारी का काम संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय कायम करने से जुड़ा होता है। ये नेता प्रदेश संगठन की बैठकों, चुनावी तैयारियों, संगठनात्मक गतिविधियों और स्थानीय नेतृत्व के साथ समन्वय में भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि किसी नियुक्ति का वास्तविक राजनीतिक प्रभाव आने वाले समय में पार्टी के संगठनात्मक फैसलों और गतिविधियों से ही स्पष्ट होगा। केवल नियुक्ति के आधार पर चुनावी नतीजे या किसी राज्य में राजनीतिक प्रदर्शन का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
भाजपा में लगातार चल रहा संगठनात्मक बदलाव
भाजपा में पिछले कुछ समय से संगठनात्मक स्तर पर कई नियुक्तियां हुई हैं। अगस्त में पार्टी ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए नए राज्य प्रभारियों की घोषणा की थी। उस समय विनोद तावड़े को यूपी, डॉ. सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को गुजरात का प्रभारी बनाया गया था।
इसके बाद पार्टी ने अपनी राष्ट्रीय टीम में भी बदलाव किए। इस व्यापक संगठनात्मक प्रक्रिया के बीच अब कई अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रभारी तथा सह-प्रभारियों की नियुक्तियां की गई हैं।
उत्तर प्रदेश पर खास नजर
उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए संगठनात्मक स्तर पर यह बदलाव खास महत्व रखता है। पार्टी ने हाल ही में जिला स्तर तक नई जिम्मेदारियां भी तय की हैं। ऐसे में राज्य प्रभारी और सह-प्रभारियों की नई टीम के सामने प्रदेश संगठन के साथ समन्वय की जिम्मेदारी होगी।
विनोद तावड़े के साथ चार सह-प्रभारियों की नियुक्ति से यूपी में संगठनात्मक जिम्मेदारियों का दायरा भी व्यापक हुआ है। वहीं बिहार में हरीश द्विवेदी के साथ दो सह-प्रभारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
अब आगे क्या?
नई नियुक्तियों के बाद संबंधित राज्यों में संगठनात्मक बैठकों और गतिविधियों का सिलसिला तेज हो सकता है। प्रभारी और सह-प्रभारी प्रदेश नेतृत्व तथा स्थानीय संगठन के साथ मिलकर पार्टी की आगामी योजनाओं पर काम करेंगे।
हालांकि इन नियुक्तियों को किसी विशेष चुनावी परिणाम से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी। फिलहाल आधिकारिक रूप से इतना स्पष्ट है कि भाजपा ने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करते हुए कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नई जिम्मेदारियां तय की हैं।

