वॉशिंगटन: अमेरिका और चीन के बीच चल रहे रणनीतिक और आर्थिक तनाव के बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका पहुंच गए हैं। शी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया की दो बड़ी आर्थिक शक्तियों के बीच व्यापार, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दुर्लभ खनिजों और भू-राजनीतिक मुद्दों को लेकर कई मतभेद मौजूद हैं। लेकिन शी के अमेरिका पहुंचते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद एयरपोर्ट पहुंचकर उनका स्वागत किया, जिसने इस दौरे को शुरुआत से ही खास बना दिया है।
एयरपोर्ट पर खुद पहुंचे ट्रंप
शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन बुधवार को स्थानीय समय के अनुसार ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पहुंचे। यह वॉशिंगटन के बाहर स्थित अमेरिकी सैन्य एयरबेस है। खास बात यह रही कि ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप खुद शी और पेंग का स्वागत करने के लिए वहां मौजूद थे।
किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के अमेरिका पहुंचने पर अमेरिकी राष्ट्रपति का सीधे एयरपोर्ट जाकर स्वागत करना सामान्य प्रोटोकॉल नहीं माना जाता। यही वजह है कि ट्रंप का यह कदम शी के दौरे की अहमियत को रेखांकित करने वाला संकेत माना जा रहा है। शी का यह अमेरिका का तीन दिवसीय राजकीय दौरा है और 2015 के बाद किसी चीनी राष्ट्रपति की पहली स्टेट विजिट है।
रेड कार्पेट, सैन्य सम्मान और B-1 बॉम्बर
शी के स्वागत के लिए ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर रेड कार्पेट बिछाया गया। सैन्य सम्मान गार्ड और बैंड की मौजूदगी में दोनों नेताओं ने मुलाकात की। अमेरिका की ओर से सैन्य समारोह के दौरान दोनों देशों के राष्ट्रगान भी बजाए गए।
इस समारोह के दौरान B-1 बॉम्बर विमानों का फ्लाईओवर भी हुआ। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सैन्य शक्ति का यह प्रदर्शन स्वागत समारोह का हिस्सा था। इसके अलावा सैन्य सम्मान के तहत 21-गन सलामी भी दी गई।
शी और ट्रंप ने कुछ समय साथ खड़े होकर बातचीत की और फिर दोनों परिवारों ने भी एक-दूसरे का अभिवादन किया। इस पूरे कार्यक्रम को अमेरिका की ओर से चीन के राष्ट्रपति के लिए बेहद औपचारिक स्वागत के रूप में देखा गया।

अब असली नजर बातचीत पर
भव्य स्वागत के बाद अब दुनिया की नजर दोनों नेताओं की असली बातचीत पर है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों ने एक-दूसरे के सामान पर टैरिफ और अन्य व्यापारिक कदम उठाए हैं। हालांकि, ताजा बातचीत से पहले दोनों पक्षों ने व्यापारिक तनाव को कुछ समय के लिए नियंत्रित रखने की दिशा में कदम उठाया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका-चीन ट्रेड ट्रूस को जनवरी 2027 तक बढ़ाने की घोषणा भी हुई है। यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक तनाव को तत्काल बढ़ने से रोकने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
AI से लेकर दुर्लभ खनिज तक कई मुद्दे
शी और ट्रंप की बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी अहम मुद्दा रहने वाला है। अमेरिका और चीन दोनों AI तकनीक में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और इस क्षेत्र में तकनीकी बढ़त को लेकर प्रतिस्पर्धा जारी है।
इसके अलावा दुर्लभ खनिज यानी Rare Earth Minerals भी महत्वपूर्ण विषय है। इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरणों और आधुनिक तकनीकों में होता है। इनकी वैश्विक सप्लाई में चीन की महत्वपूर्ण भूमिका होने के कारण यह मुद्दा अमेरिका के लिए भी रणनीतिक महत्व रखता है।
ईरान और ताइवान पर भी नजर
दोनों देशों के बीच बातचीत सिर्फ व्यापार और तकनीक तक सीमित नहीं रहने वाली है। ईरान और ताइवान से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में आने की संभावना है। ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि ईरान का मुद्दा बातचीत के एजेंडे में रहेगा।
ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से मतभेद हैं। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका के ताइवान के साथ सुरक्षा और रणनीतिक संबंध हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बातचीत में यह विषय संवेदनशील रहने की संभावना है।
स्टेट डिनर में दुनिया के बड़े टेक दिग्गज भी होंगे
शी के दौरे में औपचारिक कार्यक्रमों की भी बड़ी भूमिका है। व्हाइट हाउस में उनके सम्मान में स्टेट डिनर आयोजित किया जाना है, जिसमें अमेरिकी टेक्नोलॉजी जगत के कई बड़े नामों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका-चीन रिश्तों में तकनीकी और कारोबारी मुद्दों को इस दौरे में विशेष महत्व दिया जा रहा है।
दौरे के अंतिम चरण में दोनों राष्ट्राध्यक्षों और उनकी पत्नियों के बीच व्हाइट हाउस में चाय कार्यक्रम और नेशनल आर्काइव्स का दौरा भी प्रस्तावित है।
भव्य स्वागत के पीछे कितनी बड़ी कूटनीति?
ट्रंप द्वारा शी का एयरपोर्ट पर व्यक्तिगत स्वागत भले ही प्रतीकात्मक कदम हो, लेकिन इसके पीछे दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर रखने की कोशिश भी देखी जा रही है। हालांकि, स्वागत समारोह की भव्यता को किसी बड़े समझौते की गारंटी नहीं माना जा सकता।
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक, ताइवान, AI और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे कई जटिल मुद्दे अब भी मौजूद हैं। ऐसे में अगले दौर की बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि दोनों देश केवल तनाव कम करने पर सहमत होते हैं या किसी ठोस मुद्दे पर आगे बढ़ते हैं।

