पंजाब: के जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली से कुछ घंटे पहले धमकी भरा ईमेल मिलने से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। बुधवार, 30 सितंबर को परागपुर में अमित शाह की जनसभा प्रस्तावित थी। इसी बीच कई स्कूलों को कथित तौर पर ऐसा ईमेल मिला, जिसमें रैली स्थल सहित शहर के कई संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाने की धमकी दी गई। मामले की जानकारी सामने आते ही पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं।
धमकी वाले ईमेल में रैली स्थल, स्कूलों, श्री देवी तालाब मंदिर और अदालत परिसर का जिक्र किया गया था। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, ईमेल में अमित शाह की रैली के मंच के नीचे IED रखे होने का दावा भी किया गया। इसके अलावा रैली में आने वाली बसों को लेकर भी धमकी दी गई थी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी स्थान से विस्फोटक बरामद होने की पुष्टि भी सामने नहीं आई है।
ईमेल की तकनीकी जांच शुरू
धमकी सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने ईमेल के स्रोत का पता लगाने के लिए तकनीकी विश्लेषण शुरू किया। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संदेश कहां से भेजा गया और इसके पीछे कौन है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल जांच जारी है और ईमेल की विश्वसनीयता को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
इस तरह की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना होती है कि संदेश महज डर पैदा करने की कोशिश है या इसके पीछे कोई वास्तविक खतरा है। इसी वजह से रैली स्थल और ईमेल में बताए गए अन्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा जांच बढ़ा दी गई।
रैली स्थल से मंदिर तक सुरक्षा कड़ी
अमित शाह की जालंधर यात्रा को देखते हुए परागपुर स्थित रैली स्थल पर पहले से ही व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। धमकी वाले ईमेल के बाद इसे और कड़ा कर दिया गया। रैली स्थल के अलावा श्री देवी तालाब मंदिर और अदालत परिसर को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं।
रैली स्थल पर जांच और निगरानी बढ़ाने के साथ संदिग्ध वस्तुओं की जांच के लिए सुरक्षा टीमों को सक्रिय किया गया। ईमेल में जिन स्कूलों का जिक्र होने की बात सामने आई, वहां भी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती गई।
25 हजार से ज्यादा लोगों के पहुंचने की तैयारी
जालंधर के परागपुर में होने वाली सभा को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां की गई थीं। रैली स्थल लगभग 63 एकड़ क्षेत्र में तैयार किया गया था और मुख्य पंडाल में 25 हजार से अधिक कुर्सियां लगाए जाने की जानकारी सामने आई थी। ऐसे बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी थी।
अमित शाह का कार्यक्रम पंजाब में चल रही ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन से जुड़ा था। यह यात्रा 18 सितंबर को शुरू हुई थी और आयोजकों के अनुसार पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों से होकर करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद जालंधर पहुंची थी।
देवी तालाब मंदिर में भी प्रस्तावित था कार्यक्रम
रैली से पहले अमित शाह के श्री देवी तालाब मंदिर में दर्शन करने का कार्यक्रम भी बताया गया था। यही वजह है कि धमकी वाले ईमेल में मंदिर का जिक्र सामने आने के बाद वहां सुरक्षा को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंदिर और रैली स्थल के आसपास सुरक्षा घेरे को मजबूत किया गया था।
धमकी कितनी गंभीर? जांच के बाद होगा साफ
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि धमकी वाला ईमेल मिला है, लेकिन ईमेल में किए गए विस्फोटक संबंधी दावों की पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां संदेश के स्रोत और उसकी विश्वसनीयता का पता लगाने में जुटी हैं। इसलिए ईमेल में किए गए दावों को वास्तविक विस्फोटक बरामद होने की पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
पंजाब और हरियाणा में इससे पहले भी कई स्थानों को धमकी भरे ईमेल मिलने के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें बाद की जांच में कुछ धमकियां फर्जी पाई गई थीं। हालांकि, हर धमकी की गंभीरता से जांच करना सुरक्षा एजेंसियों की प्रक्रिया का हिस्सा है।
अमित शाह की रैली पर सुरक्षा का साया
जालंधर में अमित शाह की रैली से पहले धमकी वाले ईमेल ने पूरे सुरक्षा तंत्र को सक्रिय कर दिया। रैली स्थल, मंदिर, स्कूल और अदालत परिसर जैसे स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई। अब जांच एजेंसियों की कोशिश ईमेल भेजने वाले तक पहुंचने और यह पता लगाने की है कि संदेश के पीछे वास्तविक खतरा था या केवल दहशत फैलाने की कोशिश।
फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कार्यक्रम स्थल पर जांच और निगरानी जारी रही। मामले में आगे की तस्वीर तकनीकी जांच और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

