Nainital Traffic Jam: उत्तराखंड के मशहूर पर्यटन शहर नैनीताल में गांधी जयंती के लंबे वीकेंड पर पर्यटकों की भारी भीड़ ने यातायात व्यवस्था की परीक्षा ले ली। हालात ऐसे बने कि शहर की सड़कें वाहनों से भर गईं, पार्किंग स्थल फुल हो गए और बड़ी संख्या में पर्यटकों को होटल में कमरा नहीं मिल सका। कुछ पर्यटकों को रात सड़क किनारे, बस स्टेशन, रिक्शा स्टैंड और बंद दुकानों के बाहर गुजारनी पड़ी।
3 अक्टूबर को पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ नैनीताल जाने वाले प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। रूसी बाईपास से भूमियाधार और नारायणनगर तक यातायात का दबाव दिखाई दिया। इससे पहले लंबे वीकेंड के दौरान शहर में करीब चार हजार से अधिक पर्यटक वाहनों की एंट्री और 12 हजार से अधिक पर्यटकों के पहुंचने का स्थानीय कारोबारियों का अनुमान सामने आया था।
होटल फुल, कमरा तलाशते रहे पर्यटक
नैनीताल में पर्यटकों की भीड़ का असर सबसे ज्यादा होटल और ठहरने की व्यवस्था पर दिखाई दिया। शहर के करीब 700 होटल, होमस्टे और रिजॉर्ट में अधिकांश कमरे भर गए। जिन पर्यटकों ने पहले से बुकिंग नहीं कराई थी, उन्हें कमरा खोजने के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ी।
हालात इतने बिगड़े कि कुछ पर्यटकों को रात खुले स्थानों पर गुजारनी पड़ी। सार्वजनिक स्थानों पर पर्यटकों के रात बिताने के वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए। इनमें बस स्टेशन, रिक्शा स्टैंड और दुकानों के बाहर रात गुजारते लोग दिखाई दिए।
कमरों की मांग बढ़ने के साथ किराये में भी काफी अंतर देखने को मिला। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य दिनों में दो से तीन हजार रुपये के आसपास मिलने वाले कुछ कमरों के लिए भीड़ के दौरान 12 हजार रुपये तक मांगे जाने की बात सामने आई।

सड़क पर क्यों फंसा ट्रैफिक?
नैनीताल की भौगोलिक स्थिति भी इस समस्या को बढ़ाती है। पहाड़ी शहर में सड़कें सीमित हैं और वाहनों की संख्या अचानक बढ़ने पर ट्रैफिक का दबाव तेजी से बढ़ जाता है।
लंबे वीकेंड पर केवल नैनीताल ही नहीं, बल्कि आसपास के पर्यटन स्थलों पर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। नैनीताल की प्रमुख सड़कों, मालरोड, मल्लीताल, तल्लीताल, चिड़ियाघर रोड और अन्य मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ा। इसके अलावा हल्द्वानी और भवाली की तरफ जाने वाले रास्तों पर भी यातायात प्रभावित हुआ।
रूसी बाईपास पर रोके गए वाहन
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने नैनीताल शहर में वाहनों की एंट्री को नियंत्रित किया। जिन पर्यटकों के होटल में पार्किंग की सुविधा थी, उन्हें अलग व्यवस्था के तहत प्रवेश दिया गया, जबकि बिना बुकिंग या पार्किंग वाले वाहनों को रूसी बाईपास और नारायणनगर की तरफ रोका गया।
शहर तक पहुंचने के लिए शटल सेवा का इस्तेमाल किया गया। हालांकि बड़ी संख्या में पर्यटक एक साथ पहुंचने के कारण शटल व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया। कुछ पर्यटकों ने किराये को लेकर भी परेशानी जताई।
नैनीताल के एसपी डॉ. जगदीश चंद्र के अनुसार, शनिवार को यातायात योजना लागू की गई थी और रविवार को भी व्यवस्था जारी रखने की बात कही गई थी। वहीं एसडीएम नवाजिश खलीक ने अस्थायी पार्किंग में व्यवस्थाओं की कमी को लेकर संबंधित विभागों से जवाब मांगे जाने की बात कही।
कैंची धाम में भी उमड़ी भीड़
नैनीताल के साथ कैंची धाम में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंची। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को यहां करीब 60 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया गया। भारी संख्या में वाहनों और श्रद्धालुओं के आने से हल्द्वानी-अल्मोड़ा हाईवे पर भी यातायात प्रभावित हुआ। कई लोग घंटों तक वाहनों में फंसे रहे।
यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कैंची धाम और नैनीताल दोनों एक ही क्षेत्र में पर्यटकों और श्रद्धालुओं के प्रमुख आकर्षण हैं। जब दोनों स्थानों पर एक साथ भीड़ बढ़ती है तो आसपास के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कई गुना बढ़ जाता है।
केवल नैनीताल नहीं, पूरे पहाड़ों में दबाव
लंबे वीकेंड का असर उत्तराखंड के दूसरे पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर भी दिखाई दिया। मसूरी में भी भारी पर्यटक दबाव के कारण प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति बनी। वहीं बद्रीनाथ मार्ग पर भी लंबी वाहनों की कतार की सूचना सामने आई।
यानी गांधी जयंती के तीन दिन के अवकाश ने उत्तराखंड के पर्यटन कारोबार को तो गति दी, लेकिन दूसरी ओर पहाड़ी शहरों की सीमित सड़क और पार्किंग क्षमता पर बड़ा दबाव भी डाल दिया।
पर्यटकों के लिए क्या सबक?
नैनीताल की मौजूदा स्थिति से सबसे बड़ा सबक यह है कि लंबे वीकेंड पर बिना होटल बुकिंग और पार्किंग की पुष्टि के सीधे पहाड़ी शहर पहुंचना जोखिम भरा हो सकता है। प्रशासन ने भी बिना पार्किंग वाले वाहनों को बाहरी पार्किंग क्षेत्रों में रोककर शटल के माध्यम से शहर भेजने की व्यवस्था की है।
पर्यटकों को यात्रा से पहले होटल, पार्किंग और स्थानीय यातायात व्यवस्था की जानकारी लेनी चाहिए। साथ ही आपात स्थिति के लिए पानी, जरूरी दवाइयां और पर्याप्त समय का अतिरिक्त मार्जिन रखना बेहतर होगा।

