इस्लामाबाद: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई और उनसे मुलाकात की मांग को लेकर राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार और इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के बीच कई घंटों तक चली बातचीत बेनतीजा समाप्त हो गई। इसके बाद PTI ने अपना प्रस्तावित लॉन्ग मार्च जारी रखने का फैसला किया है। राजधानी इस्लामाबाद में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सड़कों पर अवरोधक लगाए गए हैं और प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने की तैयारी में जुटा है।
रातभर चली बातचीत, फिर भी नहीं निकला समाधान
पाकिस्तान सरकार और PTI के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का दूसरा दौर शनिवार, 3 अक्टूबर को शाम चार बजे शुरू हुआ था। दोनों पक्षों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, जो देर रात से लेकर रविवार की सुबह तक जारी रही। हालांकि, लंबी बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी साझा समझौते पर नहीं पहुंच सके।
PTI ने पहले 27 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर लॉन्ग मार्च निकालने की घोषणा की थी, लेकिन सरकार की ओर से सुरक्षा व्यवस्था सख्त किए जाने के बाद इसे 4 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया गया था। बातचीत विफल होने के बाद पार्टी ने अब अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इससे पाकिस्तान में सियासी टकराव की आशंका बढ़ गई है।
इमरान खान से मुलाकात बनी बातचीत में सबसे बड़ी बाधा
बातचीत विफल होने के पीछे सबसे अहम मुद्दा जेल में बंद इमरान खान से मुलाकात की अनुमति को लेकर रहा। PTI की मांग है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इमरान खान से तत्काल मिलने दिया जाए। इसके अलावा पार्टी चाहती है कि उनके निजी डॉक्टर को स्वास्थ्य जांच करने की अनुमति मिले और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें अस्पताल में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
सरकार का रुख था कि PTI पहले अपने प्रस्तावित लॉन्ग मार्च और प्रदर्शन को रद्द करने की घोषणा करे। इसके बाद इमरान खान से मुलाकात के मुद्दे पर विचार किया जा सकता है। वहीं, PTI ने पहले मुलाकात और चिकित्सा जांच की अनुमति मिलने की शर्त रखी। दोनों पक्षों के इसी विरोधाभासी रुख के कारण बातचीत में सहमति नहीं बन सकी।
इमरान खान की सेहत और परिवार को लेकर भी उठीं मांगें
73 वर्षीय इमरान खान वर्ष 2023 से जेल में बंद हैं। वह रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अदियाला जेल में हैं। भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, उनकी पार्टी इन कानूनी मामलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताती रही है।
PTI ने इमरान खान से मुलाकात और उनके निजी चिकित्सकों से स्वास्थ्य जांच कराने के अलावा उनकी बहनों तथा प्रदर्शन से पहले गिरफ्तार किए गए अन्य पार्टी सदस्यों की रिहाई की मांग भी रखी है। पार्टी ने इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी की उचित चिकित्सा जांच और उनके मामलों की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।
इन मांगों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं। फिलहाल बातचीत के अगले दौर को लेकर किसी ठोस सहमति की जानकारी सामने नहीं आई है।
खैबर पख्तूनख्वा से शुरू हुआ लॉन्ग मार्च
PTI ने 4 अक्टूबर को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के लक्की मरवत जिले से इस्लामाबाद की ओर अपना लॉन्ग मार्च शुरू करने की घोषणा की। इस प्रांत में PTI की सरकार है और मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।
पार्टी की योजना के अनुसार, मार्च में टैंक, डेरा इस्माइल खान, दक्षिण वजीरिस्तान, उत्तर वजीरिस्तान, बन्नू और लक्की मरवत समेत कई क्षेत्रों के समर्थक शामिल होंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, कारवां विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए करक और कोहाट की ओर बढ़ेगा। इसके बाद पेशावर और आसपास के क्षेत्रों से भी समर्थकों के शामिल होने की योजना है।
PTI की ओर से 8 अक्टूबर तक अलग-अलग इलाकों से समर्थकों को मार्च में जोड़ने की योजना बताई गई है। इसके बाद खैराबाद में एकत्रित होकर इस्लामाबाद की ओर अगले चरण में बढ़ने की रणनीति है। हालांकि, वास्तविक कार्यक्रम और आगे की गतिविधियां परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती हैं।
इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा, सड़कों पर लगाए गए अवरोधक
लॉन्ग मार्च को देखते हुए पाकिस्तान की संघीय सरकार ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। इस्लामाबाद में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्गों पर कंटेनर और अन्य अवरोधक लगाए गए हैं। प्रशासन का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को संवेदनशील सरकारी क्षेत्रों तक पहुंचने से रोकना है।
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि प्रदर्शनकारियों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे में मार्च के दौरान यातायात प्रभावित होने और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार और PTI के बीच मतभेद भी राजनीतिक तनाव को और बढ़ा रहे हैं।
गौरतलब है कि राजधानी में संभावित प्रदर्शन को रोकने के लिए पहले से ही कई रास्तों पर प्रतिबंध और सुरक्षा संबंधी तैयारियां की जा रही थीं। कंटेनरों के इस्तेमाल से माल ढुलाई और परिवहन पर भी असर पड़ने की खबरें सामने आई हैं।
आतंकवाद के मुद्दे पर भी नहीं बनी सहमति
बातचीत में केवल इमरान खान से मुलाकात का मुद्दा ही नहीं, बल्कि खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद से निपटने की जिम्मेदारी को लेकर भी मतभेद सामने आए। संघीय सरकार की ओर से प्रांतीय सरकार के सहयोग और आतंकवाद विरोधी उपायों पर स्पष्ट प्रतिबद्धता की मांग की गई।
सरकारी प्रतिनिधियों का कहना था कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में केंद्र और प्रांत के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। दूसरी ओर, PTI की ओर से इमरान खान से मुलाकात और अन्य राजनीतिक मांगों को प्राथमिकता दी गई। इन मुद्दों पर सहमति नहीं बनने से बातचीत का रास्ता बंद हो गया।
अब आगे क्या होगा?
शहबाज शरीफ सरकार और PTI के बीच वार्ता विफल होने के बाद पाकिस्तान की राजनीति में आगे की स्थिति पर सबकी नजरें टिकी हैं। एक तरफ PTI अपने समर्थकों के साथ इस्लामाबाद की ओर बढ़ने की योजना पर कायम है, तो दूसरी तरफ सरकार राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत दोबारा शुरू होगी या राजनीतिक गतिरोध और गहरा जाएगा। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहता है या सुरक्षा व्यवस्था के बीच तनाव की स्थिति बनती है, यह आने वाले दिनों की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इमरान खान से मुलाकात, चिकित्सा सुविधा और गिरफ्तार नेताओं की रिहाई जैसे मुद्दे इस राजनीतिक घटनाक्रम के केंद्र में बने हुए हैं।

