गोरखपुर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के भीतर संगठनात्मक विवाद और आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर हलचल तेज है। इसी बीच सपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गोरखपुर एयरपोर्ट पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर दो अहम राजनीतिक संदेश दिए। एक ओर उन्होंने हालिया थप्पड़ कांड के बाद चर्चा में आए पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी का हौसला बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी को जिताने के लिए पूरी ताकत लगाने की अपील की।
अखिलेश यादव शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को बलिया और देवरिया के कार्यक्रमों के बाद गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंचे थे। यहां उनकी मुलाकात को पार्टी की स्थानीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गोरखपुर में हाल ही में संगठन के एक कार्यक्रम के दौरान विवाद सामने आया था, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक स्तर पर भी कदम उठाए थे। ऐसे माहौल में अखिलेश की यह यात्रा और नेताओं से संवाद चर्चा का विषय बन गया।
नगीना साहनी से मुलाकात, क्या दिया भरोसा?
गोरखपुर एयरपोर्ट पर अखिलेश यादव ने पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी से मुलाकात की। हाल में पार्टी के एक कार्यक्रम में बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें नगीना साहनी के साथ मारपीट और थप्पड़ मारे जाने के आरोप सामने आए थे। इस घटना ने स्थानीय राजनीति में काफी चर्चा पैदा की थी।
मुलाकात के दौरान अखिलेश ने नगीना साहनी को ढांढस बंधाया और भरोसा दिया कि पार्टी उनके साथ खड़ी है। उन्होंने उन्हें घबराने के बजाय अपना मनोबल बनाए रखने की सलाह दी। इस बातचीत को पार्टी के भीतर हालिया विवाद के बाद कार्यकर्ताओं और नेताओं का भरोसा बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, इस मुलाकात से आगे की किसी कार्रवाई या संगठनात्मक फैसले के बारे में अलग से कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। फिलहाल यह स्पष्ट है कि सपा प्रमुख ने नगीना साहनी से सीधे बातचीत कर उनका पक्ष सुना और उन्हें समर्थन का संदेश दिया।

थप्पड़ कांड के बाद गोरखपुर सपा में क्यों मची हलचल?
गोरखपुर में समाजवादी पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया था। इस दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के साथ कथित मारपीट की घटना ने पार्टी की स्थानीय इकाई पर सवाल खड़े किए। मामला सामने आने के बाद पार्टी नेतृत्व ने संबंधित नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की और बाद में संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव किए।
इस घटना ने पार्टी के भीतर अनुशासन, आपसी समन्वय और नेताओं के बीच संबंधों को लेकर बहस छेड़ दी। राजनीतिक दलों के लिए सार्वजनिक कार्यक्रमों में अनुशासन बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि ऐसी घटनाएं संगठन की छवि पर असर डाल सकती हैं।
अखिलेश यादव की नगीना साहनी से मुलाकात इसी पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी नेतृत्व के सामने एक तरफ विवाद से जुड़े सवालों का समाधान करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर आगामी चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय और एकजुट रखने की जरूरत भी है।
MLC चुनाव पर अखिलेश यादव का फोकस, संजयन त्रिपाठी को जिताने की अपील
गोरखपुर दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में पूरी ताकत लगाने को कहा। समाजवादी पार्टी ने इस सीट से डॉ. संजयन त्रिपाठी को अपना प्रत्याशी बनाया है। अखिलेश का संदेश साफ था कि चुनाव में सफलता हासिल करने के लिए सभी नेताओं को मिलकर काम करना होगा।
शिक्षक एमएलसी चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। इसमें निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले शिक्षक मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं। ऐसे में प्रत्याशी के लिए शिक्षक समुदाय तक पहुंच बनाना, उनकी समस्याओं को समझना और स्थानीय स्तर पर मजबूत संपर्क स्थापित करना अहम होता है।
सपा नेतृत्व इस चुनाव को गंभीरता से ले रहा है। पार्टी की कोशिश है कि गोरखपुर सहित संबंधित जिलों में संगठन के पदाधिकारी सक्रिय रहें और प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन जुटाएं। अखिलेश यादव की बैठक को इसी चुनावी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।
भाजपा से सपा में आए संजयन त्रिपाठी पर क्यों टिकी नजरें?
डॉ. संजयन त्रिपाठी की उम्मीदवारी ने इस चुनाव के राजनीतिक समीकरण को नया मोड़ दिया है। वह पहले भाजपा से जुड़े थे और शिक्षक एमएलसी चुनाव में पार्टी के टिकट के दावेदार थे। भाजपा ने मौजूदा एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया, जिसके बाद संजयन त्रिपाठी ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। सपा ने पहले घोषित उम्मीदवार कमलेश यादव की जगह संजयन त्रिपाठी को टिकट दे दिया। इस फैसले ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
सपा के लिए यह कदम भाजपा से असंतुष्ट नेता को अपने साथ जोड़ने और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, किसी भी प्रत्याशी की जीत का अनुमान केवल दल बदलने या टिकट मिलने के आधार पर नहीं लगाया जा सकता। चुनाव में मतदाताओं का समर्थन और जमीनी स्तर पर प्रचार की प्रभावशीलता निर्णायक होगी।
सपा के सामने दोहरी चुनौती, चुनाव और संगठन की एकजुटता
गोरखपुर में अखिलेश यादव की सक्रियता ऐसे समय में सामने आई है, जब पार्टी को चुनावी तैयारी के साथ-साथ संगठनात्मक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। हालिया विवाद के कारण स्थानीय इकाई चर्चा में रही, जबकि शिक्षक एमएलसी चुनाव में पार्टी के नए उम्मीदवार को जीत दिलाने की जिम्मेदारी भी संगठन पर है।
इन दोनों मोर्चों पर संतुलन बनाना सपा नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण होगा। पार्टी को जहां नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करना है, वहीं कार्यकर्ताओं को चुनावी अभियान में सक्रिय बनाए रखना भी जरूरी है।
अखिलेश यादव की नगीना साहनी से मुलाकात और संजयन त्रिपाठी के समर्थन में अपील को इसी व्यापक रणनीति के संदर्भ में देखा जा सकता है। हालांकि, आने वाले दिनों में पार्टी की वास्तविक चुनावी तैयारी और संगठनात्मक बदलावों का असर कितना होता है, यह आगे स्पष्ट होगा।
23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को मतगणना
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के लिए घोषित कार्यक्रम के अनुसार, संबंधित सीटों पर 23 अक्टूबर 2026 को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित है।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के डॉ. संजयन त्रिपाठी और भाजपा के ध्रुव कुमार त्रिपाठी के बीच मुकाबला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों दलों के लिए यह चुनाव अपने संगठनात्मक प्रभाव और शिक्षक मतदाताओं के बीच समर्थन का आकलन करने का अवसर भी है।
अब सपा की नजर इस बात पर होगी कि अखिलेश यादव के संदेश के बाद स्थानीय नेता कितनी सक्रियता से चुनाव प्रचार में जुटते हैं। पार्टी के सामने चुनौती केवल उम्मीदवार के पक्ष में वोट जुटाने की नहीं, बल्कि संगठन के भीतर एकजुटता बनाए रखने की भी है।

