उत्तराखंड: की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहा विवाद अब संपत्ति और भ्रष्टाचार के आरोपों तक पहुंच गया है। रेखा आर्य की ओर से पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद गिरधारी लाल साहू ने भी वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और उनकी संपत्ति की जांच की मांग उठाई। इसी विवाद में करीब 210 करोड़ रुपये की संपत्ति का मुद्दा चर्चा में आया है।
हालांकि, संपत्ति को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी संपत्ति का वास्तविक मूल्य, उसके स्रोत और उसमें कथित अनियमितता की पुष्टि जांच या संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकती है। इसलिए इस पूरे मामले में आरोपों और स्थापित तथ्यों के बीच अंतर समझना जरूरी है।
210 करोड़ की संपत्ति को लेकर क्या है विवाद?
मामले में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, गिरधारी लाल साहू ने रेखा आर्य पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और उनकी संपत्ति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि मंत्री ने कथित तौर पर भ्रष्ट तरीकों से बड़ी संपत्ति अर्जित की है और इस मामले की जांच होनी चाहिए।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि संपत्ति को लेकर किया गया दावा अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं होता। जांच में संपत्ति का विवरण, आय के ज्ञात स्रोत, संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि 210 करोड़ रुपये की संपत्ति या उससे जुड़े किसी कथित भ्रष्टाचार को आधिकारिक जांच में साबित कर दिया गया है।
इस विवाद ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि आरोप लगाने वाले व्यक्ति मंत्री के पति हैं और दोनों के बीच पहले से गंभीर पारिवारिक विवाद सामने आ चुका है।
FIR के बाद पति ने वीडियो जारी कर क्या कहा?
रेखा आर्य ने 15 अक्टूबर 2026 को देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने कथित उत्पीड़न, मारपीट, जातिसूचक अपशब्दों, धोखाधड़ी, दस्तावेजों में जालसाजी और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए।
इसके बाद गिरधारी लाल साहू ने वीडियो जारी कर इन आरोपों को खारिज किया। उन्होंने दावा किया कि जिस ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर शिकायत की गई, वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार की गई है। उन्होंने मंत्री से पुलिस में दी गई शिकायत वापस लेने की मांग भी की।
इस तरह दोनों पक्षों की ओर से गंभीर दावे सामने आए हैं। एक ओर मंत्री ने पुलिस से सुरक्षा और कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी ओर उनके पति ने आरोपों की सत्यता पर सवाल उठाए हैं। ऑडियो की प्रामाणिकता और उसमें कही गई बातों का संदर्भ स्वतंत्र रूप से स्थापित होना अभी जरूरी है।

रेखा आर्य ने पति पर लगाए कौन-कौन से आरोप?
रेखा आर्य की शिकायत के मुताबिक, उनकी शादी गिरधारी लाल साहू से वर्ष 2004 में हुई थी। मंत्री ने आरोप लगाया कि शादी के समय उनके पति ने अपनी पिछली शादी की जानकारी छिपाई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि बाद में अन्य महिलाओं से कथित संबंधों का विरोध करने पर उनके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई।
शिकायत में यह आरोप भी शामिल है कि कुछ कंपनियों में निदेशक पद से हटाने के लिए उनके हस्ताक्षरों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, मंत्री ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। लेकिन एफआईआर दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोप अदालत में सिद्ध हो चुके हैं। जांच के बाद ही तथ्यों और जिम्मेदारी को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
पुलिस जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
इस पूरे मामले में कई बिंदु जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। सबसे पहले, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों की जांच करनी होगी। यदि ऑडियो रिकॉर्डिंग को सबूत के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो उसकी प्रामाणिकता, स्रोत और संदर्भ की तकनीकी जांच भी अहम हो सकती है।
संपत्ति से जुड़े आरोपों की जांच की मांग पर कार्रवाई होती है, तो संबंधित संपत्तियों का विवरण और उनके वित्तीय स्रोत भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि 210 करोड़ रुपये की संपत्ति के दावे पर कोई अलग औपचारिक जांच शुरू हो चुकी है या नहीं।
इसलिए इस स्तर पर संपत्ति के आरोपों को सिद्ध तथ्य की तरह पेश करना उचित नहीं होगा।
उत्तराखंड की राजनीति में क्यों बढ़ी हलचल?
रेखा आर्य उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उनके पारिवारिक विवाद के सार्वजनिक होने और पुलिस शिकायत के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष की ओर से भी निष्पक्ष जांच और मंत्री की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
इस मामले की संवेदनशीलता इसलिए अधिक है क्योंकि इसमें एक ओर गंभीर आपराधिक आरोप हैं और दूसरी ओर मंत्री के पति की ओर से लगाए गए भ्रष्टाचार संबंधी दावे हैं। दोनों पहलुओं की निष्पक्ष जांच और तथ्यों की पुष्टि जरूरी होगी।
फिलहाल इस विवाद का अगला चरण पुलिस जांच, दोनों पक्षों के बयानों और संपत्ति से जुड़े दावों पर संभावित कार्रवाई से तय हो सकता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि किन आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य सामने आते हैं और किन दावों की पुष्टि नहीं हो पाती।

