नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर देशभर में मां दुर्गा की आराधना की जा रही है। इसी क्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को महानवमी के अवसर पर अपने परिवार के साथ कन्या पूजन किया। इस दौरान उन्होंने कन्याओं को शक्ति का स्वरूप बताते हुए उनके सम्मान, शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कन्या पूजन की भावना को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे समाज में बेटियों को बराबरी का दर्जा देने और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने से भी जोड़कर देखना चाहिए।
परिवार के साथ की पूजा-अर्चना
महानवमी नवरात्रि के प्रमुख दिनों में से एक है। इस दिन मां दुर्गा की आराधना के साथ कई परिवारों में कन्या पूजन, हवन और विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी परिवार के साथ कन्या पूजन कर इस परंपरा का निर्वहन किया।
उन्होंने इस अवसर को श्रद्धा और आस्था से जुड़ा बताते हुए सभी बेटियों के अच्छे भविष्य की कामना की। उनके संदेश में धार्मिक विश्वास के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का पहलू भी सामने आया। कन्या पूजन की परंपरा में छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है और उनसे आशीर्वाद लिया जाता है।

बेटियों को समान अवसर देना ही पूजा की सच्ची भावना
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संदेश में बेटियों को शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि हर लड़की को अपने सपने पूरे करने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए समान अवसर मिलने चाहिए। यह संदेश शिक्षा, सुरक्षा और सामाजिक सम्मान जैसे मुद्दों को केंद्र में रखता है।
आज के समय में बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता समाज की प्रगति से सीधे जुड़ी हुई हैं। शिक्षा से लड़कियों को अपने भविष्य के फैसले लेने, रोजगार हासिल करने और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलता है। वहीं, सुरक्षित माहौल और समान अधिकार उनके आत्मविश्वास को मजबूत करते हैं।
कन्या पूजन जैसे अवसरों पर बेटियों के सम्मान की बात करना सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है, लेकिन इस संदेश को रोजमर्रा के जीवन में लागू करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। परिवार, स्कूल, समाज और प्रशासन की भूमिका इसमें अहम रहती है।
नवरात्रि में कन्या पूजन का क्या है महत्व?
हिंदू परंपरा में नवरात्रि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का पर्व है। अष्टमी और नवमी के अवसर पर अनेक परिवार कन्या पूजन करते हैं। इस अनुष्ठान में छोटी कन्याओं को देवी का प्रतीक मानकर उनका स्वागत किया जाता है, भोजन कराया जाता है और उपहार देकर सम्मान व्यक्त किया जाता है।
कन्या पूजन का मूल भाव नारी शक्ति के प्रति श्रद्धा और सम्मान है। यह परंपरा समाज को याद दिलाती है कि बेटियों को सम्मान देना और उनके अधिकारों की रक्षा करना महत्वपूर्ण है। धार्मिक आस्था के साथ जुड़ा यह संदेश तभी व्यापक अर्थ हासिल करता है, जब लड़कियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।
इस वर्ष महानवमी 19 अक्टूबर को मनाई जा रही है। तिथि और पूजा के समय को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय धार्मिक परंपराओं का भी ध्यान रखा जाता है।
बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा क्यों हैं अहम?
बेटियों के सशक्तिकरण के लिए केवल प्रेरक संदेश पर्याप्त नहीं हैं। उन्हें अच्छी शिक्षा, सुरक्षित परिवेश, स्वास्थ्य सुविधाएं और अपनी पसंद का करियर चुनने की स्वतंत्रता भी मिलनी चाहिए। स्कूल तक पहुंच, पढ़ाई जारी रखने का अवसर और परिवार का सहयोग लड़कियों की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसी तरह, समाज में लैंगिक भेदभाव को कम करना और लड़कियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार को बढ़ावा देना भी जरूरी है। कन्या पूजन के अवसर पर बेटियों के सम्मान की बात इन जिम्मेदारियों की ओर ध्यान आकर्षित करती है।
मुख्यमंत्री के संदेश को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है। बेटियों को शक्ति का स्वरूप मानने की सांस्कृतिक भावना और उन्हें समान अधिकार देने की सामाजिक जिम्मेदारी एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।

