Karwa Chauth 2026: हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और दांपत्य जीवन की मंगलकामना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। दिनभर व्रत और पूजा करने के बाद चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं, उन्हें अर्घ्य दिया जाता है और फिर व्रत का पारण किया जाता है।
करवा चौथ की रस्मों में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। आमतौर पर महिलाएं छलनी से चांद और फिर अपने पति का चेहरा देखती हैं। वहीं, कुछ क्षेत्रों या परिवारों में नथ पहनकर चंद्र दर्शन करने की परंपरा भी देखने को मिलती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर नथ से चांद देखने का क्या महत्व है और नथ को सुहाग से जोड़कर क्यों देखा जाता है?
नथ से चांद देखने की परंपरा का क्या है महत्व?
भारतीय परंपरा में नथ या नथनी को महिलाओं के सोलह श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। कई समुदायों में विवाह के अवसर पर नथ पहनने की परंपरा है। इसे सुहाग, वैवाहिक पहचान और पारंपरिक सौंदर्य से जोड़कर देखा जाता है।
करवा चौथ पर नथ पहनकर चंद्रमा के दर्शन करने की रस्म को भी कुछ लोग इसी सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव के साथ देखते हैं। इस अवसर पर नथ केवल आभूषण नहीं, बल्कि विवाहित जीवन और परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक बन जाती है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि नथ से चंद्र दर्शन करना सभी क्षेत्रों में प्रचलित कोई अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है। अलग-अलग परिवारों और समुदायों में पूजा की विधि और रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं। इस परंपरा के अर्थ भी स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग बताए जा सकते हैं।
नथ और सुहाग का क्या है संबंध?
भारतीय समाज में सुहाग से जुड़े कई पारंपरिक आभूषणों का विशेष स्थान रहा है। इनमें मंगलसूत्र, सिंदूर, चूड़ियां, बिछिया और नथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। हालांकि, इन आभूषणों को पहनने की परंपरा हर क्षेत्र और समुदाय में एक जैसी नहीं होती।
नथ को विशेष रूप से विवाह, श्रृंगार और पारंपरिक स्त्री-सौंदर्य से जोड़ा जाता है। करवा चौथ के दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पूजा करती हैं। इस दौरान नथ पहनना उनके लिए उत्सव की तैयारी और वैवाहिक परंपराओं के प्रति आस्था व्यक्त करने का एक तरीका हो सकता है।
धार्मिक दृष्टि से इस रस्म का भाव पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और सुखी जीवन की कामना से जुड़ा माना जा सकता है। हालांकि, नथ पहनने या उसके माध्यम से चंद्रमा देखने से पति की आयु बढ़ने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। यह आस्था और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा विषय है।

करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?
करवा चौथ की पूजा में चंद्रमा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा को शीतलता, शांति और मन से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से व्रत रखने वाली महिलाएं चंद्रमा के दर्शन करने के बाद उन्हें जल अर्पित करती हैं और अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य तथा दीर्घायु की कामना करती हैं।
परंपरागत रूप से महिलाएं पूजा की थाली में जल से भरा करवा या लोटा रखती हैं। चंद्रमा दिखाई देने पर विधि के अनुसार अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद कई परिवारों में छलनी से चंद्र दर्शन और फिर पति का चेहरा देखने की रस्म निभाई जाती है। कुछ जगहों पर पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर व्रत खुलवाते हैं।
इन रस्मों का स्वरूप क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार बदल सकता है। इसलिए पूजा करते समय अपने परिवार की प्रचलित विधि और स्थानीय धार्मिक परंपराओं का पालन किया जा सकता है।
छलनी से चांद देखने की परंपरा भी है खास
करवा चौथ पर छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा व्यापक रूप से प्रचलित है। इससे जुड़ी लोककथाएं और धार्मिक मान्यताएं भी सुनाई जाती हैं। कई परिवारों में इसे व्रत के समापन की प्रमुख रस्म माना जाता है।
छलनी से चांद देखने के बाद पति का चेहरा देखना वैवाहिक संबंध में प्रेम, समर्पण और साथ निभाने की भावना का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, इस रस्म का अर्थ और इससे जुड़ी कथाएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।
नथ पहनना, छलनी से चांद देखना और चंद्रमा को अर्घ्य देना—इन सभी परंपराओं के केंद्र में आस्था, परिवार और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना है। जरूरी यह है कि किसी एक रस्म को सभी महिलाओं के लिए अनिवार्य न माना जाए।
करवा चौथ 2026 कब है?
वर्ष 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं परंपरा के अनुसार सरगी ग्रहण करके व्रत की शुरुआत करेंगी। दिनभर पूजा की तैयारियों के बाद शाम को करवा चौथ की कथा सुनी जाएगी और चंद्रमा निकलने पर चंद्र दर्शन तथा अर्घ्य की रस्म निभाई जाएगी।
चंद्रमा निकलने का समय शहर के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए पूजा और व्रत के पारण के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय समय-सारणी को देखना उचित रहेगा।

