नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2027 शुरू होने से पहले पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस ने अपने कोचिंग सेटअप में बड़ा बदलाव किया है। फ्रेंचाइजी ने श्रीलंका के दिग्गज तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा, भारतीय कोच पारस म्हाम्ब्रे और इंग्लैंड के पूर्व फील्डिंग कोच कार्ल हॉपकिंसन के साथ अपनी राहें अलग करने का ऐलान किया है। इन तीनों की विदाई ऐसे समय हुई है, जब टीम अगले सीजन के लिए अपनी रणनीति और सपोर्ट स्टाफ को नए सिरे से तैयार कर रही है।
इस घटनाक्रम ने मुंबई इंडियंस के प्रशंसकों के बीच चर्चा बढ़ा दी है। मलिंगा लंबे समय तक टीम की सफलता का अहम हिस्सा रहे हैं, जबकि म्हाम्ब्रे और हॉपकिंसन भी गेंदबाजी तथा फील्डिंग की तैयारियों में योगदान देते रहे। हालांकि, फ्रेंचाइजी ने तीनों के जाने के पीछे किसी विशेष कारण का खुलासा नहीं किया है। इसलिए इसे किसी विवाद या अनुशासनात्मक कार्रवाई से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।
मलिंगा की विदाई क्यों है सबसे बड़ी खबर?
लसिथ मलिंगा का नाम मुंबई इंडियंस की पहचान से लंबे समय तक जुड़ा रहा है। अपने अनोखे गेंदबाजी एक्शन, सटीक यॉर्कर और दबाव में विकेट लेने की क्षमता के कारण उन्होंने टीम को कई अहम मुकाबलों में सफलता दिलाई।
मलिंगा ने 2009 से 2019 के बीच मुंबई के लिए खेलते हुए 122 मैचों में 170 विकेट लिए। वह टीम के चार आईपीएल खिताब जीतने वाले अभियानों का हिस्सा रहे। इसके अलावा, 2011 में चैंपियंस लीग टी20 खिताब जीतने में भी उनका अहम योगदान था।
खिलाड़ी के रूप में संन्यास के बाद भी उनका मुंबई से जुड़ाव खत्म नहीं हुआ। वह मेंटर और कोच की भूमिका में फ्रेंचाइजी के साथ लौटे। आईपीएल 2024 से पहले उन्होंने तेज गेंदबाजी कोच की जिम्मेदारी संभाली थी। ऐसे में उनका जाना केवल एक कोच की विदाई नहीं, बल्कि फ्रेंचाइजी के लंबे क्रिकेटिंग इतिहास से जुड़े एक बड़े नाम का अलग होना भी है।
पारस म्हाम्ब्रे का भी खत्म हुआ पुराना रिश्ता
पारस म्हाम्ब्रे का मुंबई इंडियंस के साथ जुड़ाव कई वर्षों पुराना रहा है। उन्होंने 2010 से 2017 तक टीम के कोचिंग सेटअप में काम किया और बाद में दोबारा फ्रेंचाइजी से जुड़े। भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच के रूप में भी उनका अनुभव रहा है।
म्हाम्ब्रे की भूमिका खिलाड़ियों की तकनीक, गेंदबाजी की रणनीति और युवा प्रतिभाओं को विकसित करने में महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। मुंबई ने उनके अनुभव और टीम की संस्कृति को समझने की क्षमता की सराहना की है।
उनके जाने के बाद टीम को गेंदबाजी विभाग की तैयारियों और खिलाड़ियों के विकास के लिए नए विकल्पों पर विचार करना होगा। हालांकि, उनकी जगह किसे जिम्मेदारी दी जाएगी, इस बारे में अभी स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है।
कार्ल हॉपकिंसन की भी विदाई
कार्ल हॉपकिंसन आईपीएल 2025 से पहले मुंबई इंडियंस के कोचिंग स्टाफ में शामिल हुए थे। इससे पहले वह इंग्लैंड की पुरुष टीम के साथ काम कर चुके थे। मुंबई में उनकी मुख्य जिम्मेदारी फील्डिंग के स्तर को बेहतर बनाना और खिलाड़ियों की तैयारी में अंतरराष्ट्रीय अनुभव का इस्तेमाल करना था।
टी20 क्रिकेट में फील्डिंग कई बार मैच का रुख बदल देती है। एक शानदार कैच, रन आउट या बाउंड्री पर बचाया गया रन निर्णायक साबित हो सकता है। इसलिए हॉपकिंसन का जाना भी टीम के सपोर्ट स्टाफ में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
फ्रेंचाइजी ने उनके पेशेवर रवैये और फील्डिंग सुधारने के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
कीरोन पोलार्ड को मिली है मुख्य कोच की जिम्मेदारी
तीन कोचों की विदाई से पहले मुंबई इंडियंस ने कीरोन पोलार्ड को आईपीएल 2027 के लिए मुख्य कोच नियुक्त किया था। उन्होंने महेला जयवर्धने की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है। पोलार्ड लंबे समय तक मुंबई के लिए खेल चुके हैं और फ्रेंचाइजी की खिताबी सफलताओं का हिस्सा रहे हैं।
पोलार्ड टीम के बल्लेबाजी कोच के रूप में भी काम कर चुके हैं। अब मुख्य कोच की भूमिका में उनसे टीम की रणनीति, खिलाड़ियों के प्रदर्शन और सपोर्ट स्टाफ के बीच तालमेल की जिम्मेदारी संभालने की उम्मीद होगी।
लगातार हुए इन बदलावों से साफ है कि मुंबई इंडियंस आगामी सीजन के लिए अपने कामकाज और टीम की तैयारियों को नए सिरे से व्यवस्थित कर रही है। हालांकि, नई व्यवस्था का वास्तविक असर मैदान पर ही दिखाई देगा।
आईपीएल 2026 की निराशा के बाद नई शुरुआत की तैयारी
मुंबई इंडियंस के लिए 2026 का सीजन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा था। टीम अंक तालिका में नौवें स्थान पर रही और प्लेऑफ में जगह नहीं बना सकी। पिछले छह सीजन में चार बार प्लेऑफ से बाहर रहने के बाद फ्रेंचाइजी के सामने अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने की चुनौती है।
अब आईपीएल 2027 से पहले कोचिंग स्टाफ में हुए बदलावों को इसी व्यापक तैयारी के संदर्भ में देखा जा रहा है। लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि केवल कोच बदलने से टीम की समस्याएं दूर हो जाएंगी। खिलाड़ियों का प्रदर्शन, फिटनेस, टीम संयोजन और दबाव में फैसले लेने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।

