महाराष्ट्र: की राजनीति में इन दिनों 500 करोड़ रुपये के एक कथित ऑडियो क्लिप को लेकर घमासान मचा हुआ है। मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे ने इस रिकॉर्डिंग को लेकर नया बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना इस मामले की सच्चाई सामने आने से रोकने की कोशिश कर रही हैं।
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को जालना जिले के अंकुशनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जरांगे ने दावा किया कि ऑडियो क्लिप असली है। उनके मुताबिक, कुछ लोग इसे फर्जी साबित करके पूरे मामले को दबाना चाहते हैं। उन्होंने मांग की कि इस विवाद की जांच किसी वरिष्ठ IAS अधिकारी या न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र रूप से कराई जाए।
हालांकि, इस रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए ऑडियो में किए गए दावों को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।
ऑडियो में क्या है 500 करोड़ रुपये का दावा?
इस विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब मनोज जरांगे ने एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की। उनके दावे के मुताबिक, इसमें कुछ लोगों के बीच बातचीत सुनाई देती है। बातचीत में कथित तौर पर कहा गया है कि मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने के लिए जरांगे को 500 करोड़ रुपये देने की बात हुई थी।
आरोप में शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे का नाम भी सामने आया है। श्रीकांत शिंदे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे हैं। जरांगे के अनुसार, रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर रकम श्रीकांत शिंदे के माध्यम से पहुंचाने की बात कही गई है।
जरांगे ने हालांकि स्पष्ट किया है कि उन्होंने न तो ऐसी कोई रकम मांगी और न ही उन्हें 500 करोड़ रुपये मिले। उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि इस तरह की बातचीत हुई थी तो इसकी पूरी सच्चाई सामने क्यों नहीं लाई जा रही?
जरांगे बोले- ऑडियो को फर्जी साबित करने की कोशिश होगी
जरांगे ने आरोप लगाया कि आने वाले दिनों में इस रिकॉर्डिंग को फर्जी या तकनीक से तैयार किया गया बताने की कोशिश हो सकती है। उनका कहना है कि ऐसा करके उन लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिनका नाम कथित बातचीत में सामने आया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से जुड़े लोग उन पर नजर रख रहे हैं और उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जरांगे ने कहा कि यदि भाजपा और शिवसेना का इस मामले से कोई संबंध नहीं है तो उन्हें जांच में सहयोग करना चाहिए और सच्चाई सामने लाने के लिए आगे आना चाहिए।

SIT के हवाले जांच, तीन सदस्यीय टीम करेगी पड़ताल
मामले की गंभीरता को देखते हुए कथित ऑडियो क्लिप की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल यानी SIT गठित किया गया है। जांच में रिकॉर्डिंग की वास्तविकता, उसमें सुनाई देने वाली आवाजों और बातचीत के स्रोत जैसे पहलुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
जरांगे ने मौजूदा जांच व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच वरिष्ठ IAS अधिकारियों या किसी न्यायाधीश की निगरानी में होनी चाहिए, ताकि किसी तरह के राजनीतिक दबाव की आशंका न रहे।
इस मामले में यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि रिकॉर्डिंग कब तैयार हुई, इसमें शामिल लोगों की पहचान क्या है और सार्वजनिक किए गए ऑडियो का पूरा संदर्भ क्या है।
रामदास कदम से जरांगे ने पूछा- पूरी रिकॉर्डिंग कहां से मिली?
जरांगे ने शिवसेना नेता रामदास कदम को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि रामदास कदम के पास इस बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग कैसे पहुंची? उन्हें यह ऑडियो किसने दिया और जनता के सामने उसका केवल एक हिस्सा ही क्यों आया?
जरांगे ने रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक करने से इनकार किया है। उन्होंने इसकी वजह उस व्यक्ति की सुरक्षा को बताया। साथ ही उन्होंने एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस से मांग की कि रिकॉर्डिंग के स्रोत को सुरक्षा की गारंटी दी जाए।
यह सवाल भी जांच का अहम हिस्सा बन सकता है कि ऑडियो किसने रिकॉर्ड किया, किसके पास सुरक्षित रहा और इतने समय बाद इसे सार्वजनिक क्यों किया गया।
एकनाथ शिंदे ने आरोपों को किया खारिज
इस पूरे विवाद में एकनाथ शिंदे पहले ही 500 करोड़ रुपये के लेन-देन से जुड़े आरोपों को खारिज कर चुके हैं। उनका कहना है कि न तो उन्होंने यह रकम दी है और न ही ली है। उन्होंने जरांगे से कहा था कि यदि उनके पास कोई सबूत है तो उसे संबंधित जांच एजेंसियों को सौंपना चाहिए।
वहीं, भाजपा और शिवसेना के नेताओं ने भी कथित रिकॉर्डिंग की सत्यता की जांच की मांग की है। कुछ नेताओं ने यह सवाल उठाया है कि ऑडियो में सुनाई देने वाली आवाजें वास्तविक हैं या रिकॉर्डिंग के साथ किसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ हुई है।
इस तरह मामला केवल 500 करोड़ रुपये के आरोप तक सीमित नहीं रह गया है। अब राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मराठा आरक्षण आंदोलन के लिए बनाएंगे ‘मराठा सेवक’ समूह
जरांगे ने इस विवाद के बीच ‘मराठा सेवक’ नाम से एक समूह बनाने की घोषणा भी की है। उनके मुताबिक, इस समूह में ऐसे स्वयंसेवक शामिल होंगे जो मराठा समाज के हितों के लिए काम करेंगे और समाज के खिलाफ गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान करेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल उनकी छवि खराब करने और मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है। जरांगे का कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, क्योंकि इससे आंदोलन की विश्वसनीयता भी जुड़ी हुई है।
अब जांच के नतीजों पर टिकी सबकी नजर
महाराष्ट्र में 500 करोड़ रुपये के कथित ऑडियो क्लिप ने सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी राजनीतिक तनाव को चर्चा में ला दिया है। एक तरफ जरांगे रिकॉर्डिंग को असली बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ संबंधित नेताओं ने आरोपों को नकारते हुए जांच की मांग की है।
अब SIT की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि रिकॉर्डिंग वास्तविक है या नहीं, उसमें सुनाई देने वाली आवाजें किनकी हैं और कथित बातचीत का पूरा संदर्भ क्या है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक 500 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन को प्रमाणित तथ्य मानना उचित नहीं होगा।

