राजस्थान: के उदयपुर जिले में रबी फसल की तैयारी कर रहे किसानों के लिए जयसमंद झील से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। इस बार झील में पानी की उपलब्धता कम होने के कारण किसानों को सिंचाई के लिए केवल दो बार पानी मिल सकेगा। सिंचाई विभाग 10 नवंबर 2026 से नहरों में पानी छोड़ना शुरू करेगा। ऐसे में किसानों को उपलब्ध पानी के हिसाब से ही अपनी फसल और सिंचाई की योजना बनानी होगी।
यह फैसला जयसमंद झील के जलस्तर और उपलब्ध पानी की समीक्षा के बाद लिया गया है। जल वितरण समिति की बैठक में सिंचाई व्यवस्था के साथ किसानों की समस्याओं पर भी चर्चा हुई। बैठक में नहरों की सफाई, गेटों के रखरखाव, बीज-खाद की उपलब्धता और जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे।
कम जलस्तर के कारण दो बार ही मिलेगा सिंचाई का पानी
जयसमंद झील में इस बार पानी की उपलब्धता सीमित बताई गई है। इसी वजह से रबी फसल वर्ष 2026-27 के लिए सिंचाई की आपूर्ति केवल दो बार करने का निर्णय लिया गया है।
जयसमंद झील उदयपुर क्षेत्र की महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में शामिल है। इससे जुड़े कमांड एरिया के अनेक गांवों में किसान नहरों के माध्यम से खेतों की सिंचाई करते हैं। ऐसे में पानी की सीमित उपलब्धता का सीधा असर खेती की योजना पर पड़ सकता है।
किसानों को इस बार पानी की दोनों उपलब्ध पालियों का सोच-समझकर इस्तेमाल करना होगा। खासकर गेहूं, जौ और अन्य रबी फसलों की बुवाई करने वाले किसानों के लिए सिंचाई का सही समय महत्वपूर्ण रहेगा।
10 नवंबर से नहरों में छोड़ा जाएगा पानी
सिंचाई विभाग की ओर से 10 नवंबर 2026 से नहरों में पानी की आपूर्ति शुरू करने की तैयारी है। इस संबंध में झील की पाल स्थित सिंचाई विभाग कार्यालय परिसर में जल वितरण समिति की बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता जिला कलेक्टर और जल वितरण समिति के अध्यक्ष मुहम्मद जुनेद पी.पी. ने की। इसमें सिंचाई व्यवस्था, उपलब्ध जल और किसानों की जरूरतों पर चर्चा हुई।
बैठक में विभागीय अधिकारियों, जल वितरण समिति के सदस्यों और किसानों ने हिस्सा लिया। अधिकारियों को पानी के बेहतर वितरण और नहरों की व्यवस्था सुधारने के संबंध में जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
किसानों ने उठाया नहरों की सफाई का मुद्दा
बैठक में किसानों ने सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा नहरों की सफाई में देरी का उठाया। उनका कहना था कि कई जगह नहरों की नियमित सफाई नहीं होने से पानी का प्रवाह प्रभावित होता है।
किसानों के मुताबिक, नहरों में गाद, कचरा और अन्य रुकावटें होने के कारण पानी खेतों के अंतिम छोर तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता। इसका नुकसान उन किसानों को ज्यादा उठाना पड़ता है, जिनके खेत नहर के आखिरी हिस्से में स्थित हैं।
किसानों ने मांग की कि पानी छोड़ने से पहले नहरों की पूरी सफाई कराई जाए। इसके साथ ही नहरों के गेटों की मरम्मत और उचित रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाए।
जब पानी की उपलब्धता पहले से ही सीमित हो, तब उसका सही तरीके से खेतों तक पहुंचना और भी जरूरी हो जाता है।
गेटों के रखरखाव पर भी उठे सवाल
किसानों ने नहरों के गेटों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि गेटों का सही तरीके से संचालन नहीं होने पर पानी का वितरण प्रभावित हो सकता है।
सिंचाई व्यवस्था में गेटों की भूमिका बेहद अहम होती है। इनके माध्यम से अलग-अलग नहरों और क्षेत्रों में पानी का प्रवाह नियंत्रित किया जाता है। यदि गेटों में तकनीकी खराबी हो या उनका रखरखाव ठीक से न किया जाए, तो कुछ क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा और कुछ में कम पानी पहुंच सकता है।
इसीलिए किसानों ने पानी की आपूर्ति शुरू होने से पहले सभी जरूरी व्यवस्थाओं की जांच कराने की मांग की।
बीज और खाद समय पर उपलब्ध कराने की मांग
बैठक में किसानों ने कृषि विभाग से रबी सीजन के लिए बीज और खाद की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी रखी।
किसानों का कहना था कि खेती का पूरा कार्यक्रम सिंचाई के साथ-साथ बीज और उर्वरक की उपलब्धता पर निर्भर करता है। यदि बुवाई के समय जरूरी सामग्री नहीं मिले तो फसल प्रभावित हो सकती है।
इसलिए किसानों ने संबंधित विभाग से आपूर्ति व्यवस्था बेहतर रखने और जरूरत के अनुसार कृषि सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की।
नीलगाय, पैंथर और जंगली सूअरों से फसलों को नुकसान
जयसमंद क्षेत्र के किसानों ने जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान का मुद्दा भी उठाया। किसानों ने बताया कि नीलगाय, पैंथर और जंगली सूअरों की मौजूदगी से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की चिंता बनी रहती है।
खासकर ग्रामीण और वन क्षेत्रों के आसपास खेती करने वाले किसानों के लिए फसल की सुरक्षा बड़ी चुनौती है। किसानों ने वन विभाग से प्रभावी उपाय करने की मांग की, ताकि मेहनत से तैयार की गई फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
इस मुद्दे पर संबंधित विभागों को जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए कार्रवाई के निर्देश
बैठक में किसानों की समस्याएं सुनने के बाद जिला कलेक्टर मुहम्मद जुनेद पी.पी. ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
बैठक में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता निर्मल मेघवाल, सराड़ा के सहायक अभियंता भावेश पाटीदार, सलूंबर के सहायक अभियंता ईश्वर सुधार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। कृषि और वन विभाग के प्रतिनिधियों के साथ जल वितरण समिति के सदस्य और किसान भी बैठक में शामिल हुए।
अब किसानों की नजर इस बात पर रहेगी कि 10 नवंबर से पानी छोड़ने से पहले नहरों की सफाई और गेटों के रखरखाव से जुड़े काम कितनी तेजी से पूरे होते हैं।
किसानों को अभी से बनानी होगी सिंचाई की योजना
जयसमंद झील से इस बार केवल दो बार पानी मिलने की स्थिति में किसानों के सामने सिंचाई का प्रबंधन बड़ी चुनौती हो सकता है। किसानों को अपनी फसल, मिट्टी की स्थिति और उपलब्ध पानी को ध्यान में रखकर सिंचाई की योजना बनानी होगी।
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, सीमित पानी की स्थिति में खेतों में नमी बनाए रखने और जरूरत के मुताबिक सिंचाई करने पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, किस फसल को कितनी सिंचाई की जरूरत है, यह स्थानीय कृषि परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

