लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अभी से अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी इस बार केवल बड़ी जनसभाओं और चर्चित चेहरों के भरोसे चुनावी मैदान में उतरने के बजाय बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका को लेकर तीन स्तरों पर चुनावी अभियान तैयार किया जा रहा है। योजना के तहत प्रधानमंत्री की प्रदेश के सभी 18 मंडलों में रैलियां कराने का प्रस्ताव है, जबकि अमित शाह संगठनात्मक बैठकों और बूथ सम्मेलनों के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करेंगे। वहीं योगी आदित्यनाथ प्रदेश में जनसभाओं और सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
दिवाली के बाद शुरू होगा चुनावी अभियान का अगला चरण
भाजपा की रणनीति के अनुसार दिवाली के बाद प्रदेश में चुनावी गतिविधियों को और तेज किया जाएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठकें, क्षेत्रवार जनसभाएं, संगठनात्मक कार्यक्रम और घर-घर संपर्क अभियान एक साथ चलाने की तैयारी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों में रैलियां कराने की योजना बनाई गई है। इन कार्यक्रमों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों के मतदाताओं तक केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों और उपलब्धियों को पहुंचाने की कोशिश होगी।
पार्टी स्तर पर करीब 20 रैलियों का प्रस्ताव भी चर्चा में है। हालांकि, प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों की अंतिम तारीख, स्थान और संख्या का निर्धारण संबंधित स्तर पर मंजूरी के बाद ही होगा। इसलिए फिलहाल इसे चुनावी अभियान की प्रस्तावित रूपरेखा के तौर पर देखा जाना चाहिए।
अमित शाह संभालेंगे संगठन का माइक्रोमैनेजमेंट
इस चुनावी रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अमित शाह की संगठनात्मक भूमिका मानी जा रही है। उनका जोर केवल बड़ी सभाएं करने पर नहीं, बल्कि पार्टी के अंदरूनी ढांचे की जमीनी स्थिति समझने और कमजोरियों को दूर करने पर रहेगा।
योजना के तहत शाह प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में पहुंचकर जिला अध्यक्षों, जिला महामंत्रियों और दूसरे पदाधिकारियों से अलग-अलग बातचीत कर सकते हैं। इसके बाद बूथ अध्यक्षों और शक्ति केंद्र संयोजकों के साथ संवाद की योजना है।
इस प्रक्रिया में प्रत्येक क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति, स्थानीय नाराजगी, जातीय समीकरण, संगठन की सक्रियता और चुनावी तैयारियों का फीडबैक लिया जाएगा। पार्टी चाहती है कि चुनाव से काफी पहले उन सीटों और बूथों की पहचान हो जाए, जहां संगठन को अतिरिक्त मेहनत की जरूरत है।
हर 50 परिवारों तक पहुंचेगा एक कार्यकर्ता
भाजपा ने घर-घर संपर्क अभियान के लिए भी विशेष रणनीति तैयार की है। इसके तहत हर 50 परिवारों पर एक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी तय करने की योजना है। इसका उद्देश्य केवल चुनाव के समय मतदाताओं तक पहुंचना नहीं, बल्कि नियमित संपर्क बनाए रखना है।
महिला, युवा, किसान, छोटे व्यापारी, पहली बार मतदान करने वाले युवा, सरकारी योजनाओं के लाभार्थी और पूर्व सैनिक जैसे समूहों के बीच अलग-अलग टीमें सक्रिय की जाएंगी।
महिला और युवा मोर्चे के कार्यकर्ताओं को विधानसभा क्षेत्रों में जिम्मेदारी दी जाएगी। जिला स्तर पर समन्वय टीमें बनाई जाएंगी, जो अभियान की प्रगति पर नजर रखेंगी। पार्टी की योजना है कि कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनें और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संपर्क बनाए रखें।
23 हजार कमजोर बूथों पर विशेष नजर
भाजपा की चुनावी तैयारी में करीब 23 हजार फोकस बूथों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन बूथों पर संगठन की स्थिति और मतदाताओं के रुझान का आकलन किया जाएगा।
जिला इकाइयों से बूथवार जानकारी जुटाने, लाभार्थियों की सूची तैयार करने और स्थानीय सामाजिक समीकरणों को समझने के लिए कहा गया है। मतदाता सूची के सत्यापन और नए मतदाताओं को जोड़ने पर भी जोर रहेगा।
दिवाली के बाद मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े अभियान में कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने की योजना है। नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 भरवाने और मतदाता सूची में जरूरी सुधार कराने में मदद देने की तैयारी भी की जा रही है।
योगी आदित्यनाथ की भूमिका भी होगी अहम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा के इस तीन स्तरीय अभियान का महत्वपूर्ण चेहरा होंगे। उनकी भूमिका प्रदेश सरकार के कामकाज, कानून-व्यवस्था, विकास परियोजनाओं और सरकारी योजनाओं को जनता के बीच रखने की होगी।
योगी आदित्यनाथ की क्षेत्रीय जनसभाओं और संगठनात्मक कार्यक्रमों के जरिए अलग-अलग जिलों में चुनावी माहौल बनाने की कोशिश की जाएगी। पार्टी के प्रदेश स्तर के नेता और पदाधिकारी भी उनके साथ समन्वय बनाकर काम करेंगे।
इस रणनीति में प्रधानमंत्री की रैलियों से व्यापक राजनीतिक संदेश देने, अमित शाह के जरिए संगठन को मजबूत करने और मुख्यमंत्री के माध्यम से प्रदेश सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने का लक्ष्य दिखाई देता है।
3 से 5 नवंबर तक छह क्षेत्रों में पदयात्राएं
चुनावी तैयारियों के बीच भाजपा ने प्रदेश के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों में 3 से 5 नवंबर तक पदयात्राएं आयोजित करने की योजना बनाई है। इन्हें ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान से जोड़ा गया है।
कार्यक्रम के अनुसार, 3 नवंबर को लखनऊ और बरेली, 4 नवंबर को प्रयागराज और गोरखपुर तथा 5 नवंबर को गाजियाबाद और कानपुर में पदयात्राएं प्रस्तावित हैं। प्रत्येक कार्यक्रम में कम से कम 25 हजार लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है।
इन पदयात्राओं के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, संगठन की मौजूदगी दिखाने और जनता के बीच राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश होगी।
भाजपा के सामने क्या होगी सबसे बड़ी चुनौती?
भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश का चुनाव केवल बड़ी रैलियों का मुकाबला नहीं होगा। पार्टी को स्थानीय स्तर पर संगठन की एकजुटता, उम्मीदवारों के चयन, जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों तथा मतदाताओं की अपेक्षाओं पर भी काम करना होगा।
हर 50 परिवारों तक पहुंचने और हजारों बूथों पर विशेष रणनीति बनाने का लक्ष्य तभी प्रभावी होगा, जब कार्यकर्ता लगातार जमीन पर सक्रिय रहें। वहीं विपक्षी दलों की रणनीति और स्थानीय मुद्दे भी चुनावी माहौल को प्रभावित करेंगे।
फिलहाल भाजपा ने अपनी तैयारी का रोडमैप सामने रख दिया है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित रैलियां और संगठनात्मक कार्यक्रम किस गति से आगे बढ़ते हैं और उनका चुनावी असर कितना दिखाई देता है।

