झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं जिले से एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। यहां सड़क निर्माण का काम कर रहे मजदूरों को अचानक ऐसा करंट लगा कि आठ लोगों की जान चली गई। हादसा छापोली गांव में उस समय हुआ, जब सड़क बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही रोड़ी मिलाने वाली मशीन ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गई। मशीन में करंट फैलते ही वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। इस दुर्घटना में पांच अन्य मजदूरों के घायल होने की भी सूचना है। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है।
सड़क निर्माण के दौरान अचानक मशीन में दौड़ा करंट
यह हादसा सोमवार, 2 नवंबर 2026 को झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी थाना क्षेत्र के छापोली गांव में हुआ। यहां छापोली से कदमकुंड की ओर जाने वाली सड़क का निर्माण कराया जा रहा था। सड़क बनाने के लिए रोड़ी और बजरी मिलाने वाली मशीन लगाई गई थी। मजदूर रोज की तरह निर्माण कार्य में जुटे हुए थे।
इसी दौरान मशीन ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गई। पुलिस के अनुसार, बिजली का करंट मशीन में फैल गया और उसके संपर्क में आए मजदूर इसकी चपेट में आ गए। हादसा इतना गंभीर था कि आठ मजदूरों की मौत हो गई। पांच अन्य मजदूर घायल बताए गए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
छापोली और आसपास के गांवों में पसरा मातम
एक साथ आठ मजदूरों की मौत की खबर फैलते ही इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। जिन परिवारों के सदस्य रोजी-रोटी कमाने के लिए सड़क निर्माण कार्य में लगे थे, उनके घरों में अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
पुलिस के मुताबिक, हादसे में जान गंवाने वाले सभी आठ मजदूर स्थानीय निवासी थे। मृतकों में छापोली और हालेड़ा मंडावरा क्षेत्र के लोग शामिल बताए गए हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके उपचार को लेकर प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
11 हजार वोल्ट की लाइन के संपर्क में कैसे आई मशीन?
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि सड़क निर्माण स्थल पर मशीन हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में कैसे आई? क्या काम शुरू करने से पहले बिजली के तारों की ऊंचाई और मशीन की स्थिति का आकलन किया गया था? क्या निर्माण स्थल पर मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम मौजूद थे?
फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मशीन के बिजली लाइन से संपर्क में आने के कारण करंट फैला। हालांकि, हादसे के पीछे किसी विभागीय या तकनीकी लापरवाही की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

जन सहयोग से बन रही थी सड़क, ऊर्जा मंत्री ने दी जानकारी
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार सड़क निर्माण का काम जन सहयोग से छोटे स्तर पर निजी रूप से कराया जा रहा था। यह सड़क छापोली और कदमकुंड के बीच स्थित क्षेत्र को जोड़ने के लिए बनाई जा रही थी।
मंत्री ने कहा कि तकनीकी अधिकारियों को घटनास्थल पर जाकर हादसे की परिस्थितियों का पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं। यदि जांच में किसी विभागीय या तकनीकी चूक की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस बयान के बाद जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है। अब यह पता लगाया जाएगा कि निर्माण के दौरान बिजली लाइन से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की व्यवस्था थी या नहीं और मशीन को चलाने से पहले जरूरी सावधानियां बरती गई थीं या नहीं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश
हादसे पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने अधिकारियों को घायलों का समुचित उपचार सुनिश्चित करने और प्रभावित परिवारों को तत्काल हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने और जिला कलेक्टर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मुख्यमंत्री ने संबंधित मंत्री झाबर सिंह खर्रा को भी घटनास्थल पर जाकर प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी घटना पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने हादसे की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदारी तय करने और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है। पूर्व विधायक राजेंद्र गुढ़ा ने भी प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग की है।
निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
झुंझुनूं की यह दुर्घटना सड़क निर्माण और अन्य कार्यों के दौरान हाईटेंशन बिजली लाइनों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता को सामने लाती है। बिजली की 11 हजार वोल्ट की लाइन के पास भारी मशीनों का इस्तेमाल करते समय विशेष सावधानी जरूरी होती है। मशीन का कोई हिस्सा बिजली के तार के संपर्क में आने पर करंट पूरे ढांचे में फैल सकता है और आसपास मौजूद लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।
अब प्रशासनिक और तकनीकी जांच से यह स्पष्ट होगा कि हादसे की वास्तविक वजह क्या थी और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई। आठ मजदूरों की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। प्रभावित परिवारों को सहायता और घायलों के बेहतर उपचार के साथ-साथ जिम्मेदारी तय करना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।

