फलता में BJP की सुनामी! 20 राउंड बाद 1 लाख+ वोटों से आगे पांडा, TMC-कांग्रेस-CPM सब साफ

West Bengal: की चर्चित फलता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान का परिणाम अब लगभग साफ नजर आने लगा है। 20 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद भाजपा प्रत्याशी देबांशु पांडा ने विपक्षी दलों को बहुत पीछे छोड़ते हुए एक लाख से ज्यादा वोटों की निर्णायक बढ़त बना ली है। इस सीट पर भाजपा की यह बढ़त सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत भी मानी जा रही है।

फलता सीट पर दोबारा मतदान इसलिए कराया गया था क्योंकि पहले हुए चुनाव में धांधली और ईवीएम विवाद के आरोप लगे थे। चुनाव आयोग की सख्ती और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोबारा मतदान कराया गया, जिसमें रिकॉर्ड 87 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ।

20 राउंड बाद BJP की ऐतिहासिक बढ़त

मतगणना के दौरान शुरुआती रुझानों से ही भाजपा उम्मीदवार Debanshu Panda लगातार बढ़त बनाए हुए हैं।

20 राउंड की गिनती पूरी होने तक देबांशु पांडा को 1.37 लाख से अधिक वोट मिल चुके हैं। वहीं दूसरे स्थान पर मौजूद सीपीआईएम उम्मीदवार शंभू नाथ कुर्मी काफी पीछे चल रहे हैं।

भाजपा की बढ़त 1.04 लाख वोटों के पार पहुंच चुकी है, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है।

CPM दूसरे नंबर पर, TMC-कांग्रेस मुकाबले से बाहर

इस चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह माना जा रहा है कि Communist Party of India (Marxist) दूसरे स्थान पर पहुंच गई है, जबकि All India Trinamool Congress और Indian National Congress मुकाबले से लगभग बाहर हो चुके हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि फलता सीट पर टीएमसी की कमजोर स्थिति पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर को दिखाती है।

क्यों हुआ था पुनर्मतदान?

फलता विधानसभा सीट पर पहले हुए मतदान के दौरान ईवीएम में गड़बड़ी, बूथ कैप्चरिंग और धांधली के आरोप लगे थे। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि निष्पक्ष मतदान संभव नहीं हो पाया।

इसके बाद Election Commission of India ने मामले की समीक्षा कर पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया।

इस बार केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी। संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त निगरानी रखी गई और वेबकास्टिंग के जरिए मतदान प्रक्रिया पर नजर रखी गई।

रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

पुनर्मतदान में करीब 87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसने राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी थीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारी मतदान का सीधा फायदा भाजपा को मिला। ग्रामीण और युवा मतदाताओं में भाजपा के पक्ष में बड़ा झुकाव देखने को मिला।

भाजपा खेमे में जश्न

जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ता गया। पार्टी कार्यालयों में मिठाइयां बांटी जाने लगीं और समर्थकों ने जीत के नारे लगाने शुरू कर दिए।

भाजपा नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक सीट की जीत नहीं, बल्कि बंगाल में पार्टी की बढ़ती ताकत का संकेत है।

TMC के लिए बड़ा झटका

फलता सीट पर कमजोर प्रदर्शन को Mamata Banerjee की पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर यही रुझान आगे भी जारी रहा, तो आगामी विधानसभा चुनावों में टीएमसी को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

कांग्रेस और वामदल की मुश्किलें बढ़ीं

फलता चुनाव ने यह भी साफ कर दिया कि बंगाल में कांग्रेस और वाम दलों की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।

हालांकि सीपीआईएम उम्मीदवार दूसरे नंबर पर हैं, लेकिन भाजपा से उनका अंतर इतना ज्यादा है कि मुकाबला एकतरफा दिखाई दे रहा है।

राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फलता सीट का यह परिणाम पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है।

भाजपा इस जीत को राज्य में अपनी मजबूत पकड़ के तौर पर पेश कर सकती है, जबकि विपक्षी दलों को अब अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना होगा।

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