बिहार: के पटना जिले के मोकामा प्रखंड से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर पुलिस अपराधियों की तलाशी लेती है, लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आई। कुख्यात सोनू-मोनू गैंग के घर छापेमारी करने पहुंची पुलिस टीम को ही तलाशी देकर अंदर जाने की अनुमति मिली। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचमहला थानाध्यक्ष कुंदन कुमार और हाथीदह थानाध्यक्ष रंजन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दोनों अधिकारियों पर कर्तव्य के प्रति लापरवाही, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता के आरोप लगाए गए हैं।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, 23 मई 2026 की शाम पंचमहला थाना क्षेत्र के नौरंगा जलालपुर गांव में सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया था। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि गोलीबारी तक की नौबत आ गई। घटना के बाद पंचमहला थाना में कांड संख्या 46/2026 दर्ज किया गया।
मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी और हथियार बरामदगी के लिए पुलिस टीम गठित की गई। इसी क्रम में पंचमहला थानाध्यक्ष कुंदन कुमार और हाथीदह थानाध्यक्ष रंजन कुमार पुलिस बल के साथ मुख्य आरोपी सोनू कुमार के घर छापेमारी करने पहुंचे थे।
दबंगों के सामने झुक गई पुलिस!
छापेमारी के दौरान मुख्य आरोपी और उसका साथी मौके से फरार मिले। हालांकि घर में मौजूद परिजनों और गैंग से जुड़े लोगों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मियों को घर में घुसने से पहले खुद अपनी तलाशी देनी पड़ी।
वीडियो में एक महिला मोबाइल फोन पर किसी व्यक्ति से बात कराती दिख रही है, जिसे स्थानीय लोग कुख्यात अपराधी मोनू कुमार बता रहे हैं। इसके बाद पुलिसकर्मी एक-एक कर अपनी जेबें और सामान दिखाते नजर आते हैं। इतना ही नहीं, कुछ पुलिसकर्मी अपने हथियार और अन्य सामान भी चेक करवाते दिखाई दिए।
यह दृश्य सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर अपराधियों के सामने पुलिस इतनी कमजोर क्यों नजर आई?

SSP ने लिया कड़ा एक्शन
वीडियो वायरल होने के बाद पटना पुलिस मुख्यालय तक मामला पहुंच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने तत्काल जांच के आदेश दिए। शुरुआती जांच में पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए।
इसके बाद दोनों थानेदारों को निलंबित कर दिया गया। पुलिस विभाग ने साफ किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखना और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है। ऐसी घटनाएं पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं।
इलाके में दहशत का माहौल
स्थानीय लोगों के मुताबिक सोनू-मोनू गिरोह लंबे समय से इलाके में सक्रिय है और उसका दबदबा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि गैंग के सदस्य अक्सर हथियारों के बल पर लोगों को डराते-धमकाते हैं। यही वजह रही कि पुलिस टीम भी मौके पर दबाव में नजर आई।
हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रिया
घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे “कानून व्यवस्था की विफलता” बताया, तो कुछ ने कहा कि “अगर पुलिस ही अपराधियों से डरने लगे तो आम जनता का क्या होगा?”
वहीं कुछ लोगों ने पुलिस अधिकारियों के निलंबन को सही कदम बताया और कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है।