राजस्थान: के दुग्ध क्षेत्र के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। जयपुर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (जयपुर डेयरी) ने अपने प्लांट के आधुनिकीकरण पर करीब 133 करोड़ रुपये का निवेश कर उसकी क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि कर दी है। इस अत्याधुनिक अपग्रेडेशन के बाद अब जयपुर डेयरी प्रतिदिन 20 लाख लीटर दूध प्रोसेस करने में सक्षम हो गई है, जबकि पहले इसकी क्षमता 12 लाख लीटर प्रतिदिन थी।
राज्य सरकार इस परियोजना को राजस्थान के डेयरी सेक्टर के लिए गेम चेंजर मान रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जल्द ही इस आधुनिक प्लांट का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन समारोह को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
डेयरी मंत्री ने लिया तैयारियों का जायजा
राजस्थान के डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने हाल ही में प्लांट का दौरा कर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न प्रोसेसिंग यूनिट्स का निरीक्षण किया और अधिकारियों से नई मशीनरी एवं उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी ली।
इस दौरान राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) की प्रबंध निदेशक श्रुति भारद्वाज और जयपुर डेयरी के एमडी मनीष फौजदार भी मौजूद रहे।
मंत्री ने अधिकारियों को उद्घाटन समारोह के सफल आयोजन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और कहा कि यह परियोजना राज्य के लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
12 लाख से बढ़कर 20 लाख लीटर हुई क्षमता
जयपुर डेयरी के इस नए प्लांट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बढ़ी हुई प्रोसेसिंग क्षमता है। पहले जहां प्रतिदिन 12 लाख लीटर दूध प्रोसेस किया जाता था, वहीं अब यह क्षमता बढ़कर 20 लाख लीटर प्रतिदिन हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी और डेयरी उत्पादों की मांग को देखते हुए यह विस्तार बेहद जरूरी था। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि दूध की गुणवत्ता बनाए रखने और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
पैकेजिंग यूनिट में भी बड़ा विस्तार
सिर्फ प्रोसेसिंग ही नहीं, बल्कि दूध की पैकेजिंग क्षमता में भी बड़ा इजाफा किया गया है। पहले जहां प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध के पाउच पैक किए जा सकते थे, वहीं अब यह क्षमता बढ़कर 16.50 लाख लीटर प्रतिदिन पहुंच गई है।
नई तकनीक आधारित पैकेजिंग सिस्टम के जरिए उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों बेहतर होंगी। इससे उपभोक्ताओं तक ताजा और सुरक्षित दूध पहुंचाना और आसान हो जाएगा।
घी और अन्य उत्पादों का उत्पादन भी बढ़ेगा
इस परियोजना के तहत घी निर्माण क्षमता को भी बढ़ाया गया है। अब प्लांट में प्रतिदिन 70 टन तक घी का उत्पादन किया जा सकेगा।
इसके अलावा बटर, डेय वाटर और अन्य दुग्ध उत्पादों के निर्माण के लिए भी आधुनिक मशीनरी स्थापित की गई है। अधिकारियों के अनुसार नए बॉयलर सिस्टम की मदद से प्रति घंटे लगभग 70 मीट्रिक टन भाप तैयार की जा सकेगी, जिससे उत्पादन प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी होगी।
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
राजस्थान में लाखों किसान दुग्ध उत्पादन से जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्लांट की क्षमता बढ़ने से किसानों से अधिक मात्रा में दूध खरीदा जा सकेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और डेयरी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
जयपुर डेयरी पहले से ही प्रदेश की प्रमुख दुग्ध सहकारी संस्थाओं में शामिल है। नई तकनीक और बढ़ी हुई क्षमता के साथ यह संस्था राजस्थान के डेयरी उद्योग को नई दिशा देने के लिए तैयार दिखाई दे रही है।
राजस्थान के डेयरी सेक्टर के लिए नई शुरुआत
राज्य सरकार का लक्ष्य राजस्थान को देश के अग्रणी डेयरी राज्यों में शामिल करना है। इसी दिशा में जयपुर डेयरी का आधुनिकीकरण एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी तरह आधुनिक तकनीक और निवेश को बढ़ावा मिलता रहा तो आने वाले वर्षों में राजस्थान दुग्ध उत्पादन और डेयरी उत्पाद निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।