TMC में भगदड़! 4 दिन में 4 सांसदों ने छोड़ा ममता का साथ, कोयल मल्लिक के इस्तीफे से राज्यसभा में बिगड़ा पूरा गेम

पश्चिम बंगाल: की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिल रही है। विधानसभा चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर शुरू हुआ असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के कई बड़े चेहरे लगातार दूरी बना रहे हैं और पिछले चार दिनों में चार राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गुरुवार को राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक और अभिनेत्री-सांसद कोयल मल्लिक ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी। इससे पहले सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव भी राज्यसभा सदस्यता छोड़ चुके हैं। लगातार हो रहे इन इस्तीफों ने तृणमूल कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है।

कोयल मल्लिक के इस्तीफे ने बढ़ाई मुश्किलें

फिल्म अभिनेत्री से सांसद बनीं कोयल मल्लिक को तृणमूल कांग्रेस ने इसी वर्ष राज्यसभा भेजा था। उन्होंने अप्रैल में सांसद पद की शपथ ली थी और राजनीति में आने को जनसेवा का माध्यम बताया था।

लेकिन अब अचानक उनके इस्तीफे ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोयल मल्लिक जैसी लोकप्रिय हस्ती का पार्टी छोड़ना केवल एक व्यक्तिगत फैसला नहीं बल्कि पार्टी के अंदर गहराते असंतोष का संकेत हो सकता है।

प्रकाश चिक बड़ाईक ने भी छोड़ी पार्टी

राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने भी इस्तीफा देते हुए कहा कि जनता के जनादेश का सम्मान करना लोकतंत्र की मूल भावना है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा देते हुए पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी।

बड़ाईक कभी अभिषेक बनर्जी के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। उन्हें 2023 में राज्यसभा भेजा गया था और 2024 लोकसभा चुनाव में अलीपुरद्वार से उम्मीदवार भी बनाया गया था। ऐसे में उनका इस्तीफा पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

राज्यसभा में बिगड़ा TMC का नंबर गेम

लगातार चार सांसदों के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की संख्या 13 से घटकर केवल 9 रह गई है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में और सांसद पार्टी छोड़ते हैं तो राष्ट्रीय राजनीति में TMC की प्रभावशीलता पर भी असर पड़ सकता है।

राज्यसभा में किसी भी पार्टी की ताकत केवल संख्या तक सीमित नहीं होती, बल्कि इससे संसदीय समितियों, बहसों और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक प्रभाव भी तय होता है। ऐसे में यह गिरावट ममता बनर्जी के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।

शत्रुघ्न सिन्हा ने दिया ममता का साथ

जहां कई नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, वहीं अभिनेता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है।

उन्होंने साफ कहा कि कठिन समय में पार्टी छोड़ना उनकी राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें जरूरत पड़ी, ममता बनर्जी उनके साथ खड़ी रहीं और अब उनका कर्तव्य है कि वे भी उनके साथ मजबूती से खड़े रहें।

शत्रुघ्न सिन्हा के इस बयान को तृणमूल के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

सायोनी घोष को लेकर बढ़ा सस्पेंस

तृणमूल कांग्रेस की युवा इकाई की अध्यक्ष और सांसद सायोनी घोष को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में उनकी मौजूदगी को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

बताया जा रहा है कि बैठक में कई असंतुष्ट सांसद मौजूद थे और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई। हालांकि सायोनी घोष ने अब तक किसी भी तरह की राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं की है।

कोलकाता लौटने पर पत्रकारों ने जब उनसे सवाल पूछे तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और सीधे वाहन में बैठकर रवाना हो गईं। उनकी चुप्पी ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है।

क्या TMC में और बड़े इस्तीफे होंगे?

पार्टी सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ और नेताओं के इस्तीफे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा होता है तो ममता बनर्जी के सामने संगठन को बचाने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व, रणनीति और संगठनात्मक ढांचे को लेकर असंतोष बढ़ा है। यही वजह है कि अब इसका असर संसद तक दिखाई देने लगा है।

तृणमूल कांग्रेस के लिए यह दौर बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। चार दिनों में चार राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे ने न केवल पार्टी की संसदीय ताकत कमजोर की है बल्कि संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी को भी उजागर किया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ममता banerjee इस राजनीतिक संकट को संभाल पाएंगी या फिर आने वाले दिनों में TMC में बगावत और तेज होगी।

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