गुजरात: में गर्मी के साथ ही सियासी तापमान भी तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक गुजरात राज्य चुनाव आयोग 26 मार्च को म्युनिसिपल और पंचायत चुनावों का शेड्यूल जारी कर सकता है। इन चुनावों को 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा है, इसलिए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
इन चुनावों में राज्य के कई बड़े शहरों जैसे अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट सहित कुल 394 स्थानीय निकायों में मतदान कराया जाएगा। चुनावों में करीब 10 हजार सीटों पर प्रतिनिधियों का चयन होगा, जिससे राज्य की स्थानीय राजनीति की दिशा तय होगी।
26 मार्च को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा संभव
सूत्रों के अनुसार गुजरात राज्य चुनाव आयोग 26 मार्च को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है। फिलहाल राज्य विधानसभा का बजट सत्र 25 मार्च तक चल रहा है। माना जा रहा है कि बजट सत्र समाप्त होते ही चुनावों की घोषणा कर दी जाएगी और इसके साथ ही आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू हो जाएगी।
चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार मतदान और मतगणना की तारीखें तय की जाएंगी। चुनाव की घोषणा होते ही राज्य में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।
394 स्थानीय निकायों में होगा चुनाव
इन स्थानीय निकाय चुनावों के तहत राज्य में कुल 394 संस्थाओं के लिए मतदान कराया जाएगा। इनमें शामिल हैं—
-
15 नगर निगम (6 मौजूदा और 9 नए बनाए गए)
-
83 नगर पालिका
-
34 जिला पंचायत
-
262 तहसील पंचायत
इन सभी निकायों को मिलाकर करीब 10 हजार सीटों पर चुनाव होंगे। यह चुनाव राज्य की स्थानीय शासन व्यवस्था के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मुकाबला
गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों को अक्सर राज्य की राजनीतिक ताकत का बड़ा संकेतक माना जाता है। इसलिए इस बार भी इन्हें 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा है।
राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी, विपक्षी कांग्रेस और तेजी से अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
बीजेपी के लिए यह चुनाव अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने की परीक्षा होंगे, जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के लिए यह अपने जनाधार को मजबूत करने का बड़ा अवसर माना जा रहा है।
पीएम मोदी का गुजरात दौरा हो सकता है अहम
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मार्च महीने में गुजरात का दौरा कर सकते हैं। अगर यह दौरा होता है तो इसे चुनावी माहौल में बीजेपी के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाएगा।
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा भी इन दिनों राज्य के विभिन्न इलाकों, खासकर आदिवासी क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।
इन चुनावों में पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा की जोड़ी की चुनावी रणनीति की असली परीक्षा होगी।
OBC आरक्षण के बाद पहला बड़ा चुनाव
गुजरात में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू होने के बाद यह पहला बड़ा नगर निकाय चुनाव होगा। इसलिए इन चुनावों को सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक दलों ने आरक्षण के नए समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
निर्वाचित बॉडी का कार्यकाल हो चुका है खत्म
राज्य के कई बड़े नगर निगमों में निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। इसके चलते सरकार ने फिलहाल प्रशासनिक कामकाज चलाने के लिए प्रशासकों की नियुक्ति कर रखी है।
इस बीच राज्य सरकार ने शहरी विकास से जुड़ी कई योजनाओं की घोषणा की है। इनमें सड़क निर्माण, पानी की सप्लाई, इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन योजनाओं को चुनावी तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
कांग्रेस और AAP भी सक्रिय
जहां बीजेपी चुनावी तैयारी में जुटी है, वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी सक्रिय हो गई हैं।
गुजरात कांग्रेस की कमान अमित चावड़ा के हाथों में है और पार्टी संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं आम आदमी पार्टी की तरफ से इसुदान गढ़वी राज्य में संगठन को मजबूत करने में लगे हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी बड़े शहरों में कई मौजूदा पार्षदों के टिकट काट सकती है और नए चेहरों को मौका दे सकती है, जिससे चुनाव में नई ऊर्जा लाई जा सके।