गुजरात: ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए इतिहास रच दिया है। राज्य में पहली बार अहमदाबाद से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित धोलेरा स्मार्ट सिटी के पास बावलियारी गांव से एक साउंडिंग रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। इस ऐतिहासिक लॉन्च के साथ गुजरात ने अंतरिक्ष तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में नई शुरुआत की है।
यह लॉन्च शनिवार को दोपहर लगभग 1 बजे किया गया और इस मौके पर राज्य के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया भी मौजूद रहे। उन्होंने इसे राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए युवा वैज्ञानिकों और स्टार्टअप टीम को बधाई दी।
स्टार्टअप ने विकसित किया रॉकेट
इस साउंडिंग रॉकेट को अहमदाबाद स्थित निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप ओमस्पेस रॉकेट एंड एक्सप्लोरेशन प्राइवेट लिमिटेड (OSRE) ने विकसित किया है। यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत तैयार की गई है, जिसमें स्वदेशी तकनीक और संसाधनों का उपयोग किया गया।
रॉकेट का एयरफ्रेम अहमदाबाद स्थित ओमस्पेस की प्रयोगशाला में कार्बन फाइबर और उन्नत मिश्रित सामग्रियों का उपयोग करके बनाया गया है। इस तरह की तकनीक रॉकेट को हल्का, मजबूत और अधिक कुशल बनाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह लॉन्च गुजरात के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
3 किलोमीटर तक पहुंचा रॉकेट
यह सिंगल-स्टेज सब-ऑर्बिटल साउंडिंग रॉकेट था जिसे धोलेरा के पास एक अस्थायी लॉन्च कॉम्प्लेक्स से लॉन्च किया गया। लॉन्च के बाद रॉकेट करीब 3 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा।
इस मिशन के दौरान रॉकेट में कई महत्वपूर्ण तकनीकी प्रणालियों का परीक्षण किया गया, जिनमें शामिल हैं—
-
प्रोपल्शन सिस्टम
-
एवियोनिक्स सिस्टम
-
ऑटोनॉमस रिकवरी सिस्टम
इन प्रणालियों के सफल परीक्षण से भविष्य में अधिक उन्नत रॉकेट और अंतरिक्ष मिशन विकसित करने में मदद मिलेगी।
अस्थायी कंट्रोल रूम से किया गया संचालन
रॉकेट लॉन्च के लिए बावलियारी क्षेत्र में एक अस्थायी कंट्रोल रूम भी बनाया गया था। यहीं से वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम ने पूरे मिशन को मॉनिटर किया।
लॉन्च के बाद राज्य के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने इस ऐतिहासिक पल का वीडियो भी साझा किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
मौसम संबंधी डेटा जुटाएगा रॉकेट
इस साउंडिंग रॉकेट में एक छोटा प्रायोगिक पेलोड भी लगाया गया था, जो मौसम से संबंधित डेटा एकत्र करने में सक्षम है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस प्रकार के डेटा से मौसम विज्ञान, जलवायु अध्ययन और अन्य वैज्ञानिक अनुसंधानों में मदद मिलती है।
यह लॉन्च भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, भारतीय तटरक्षक बल और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय जैसी एजेंसियों से आवश्यक अनुमति और तकनीकी सहयोग प्राप्त करने के बाद सफलतापूर्वक किया गया।
क्या होता है साउंडिंग रॉकेट?
साउंडिंग रॉकेट एक विशेष प्रकार का रॉकेट होता है जिसका उपयोग मुख्य रूप से वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए किया जाता है। यह आमतौर पर एक या दो चरणों वाला ठोस ईंधन (Solid Propellant) रॉकेट होता है।
इन रॉकेटों का इस्तेमाल पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल (लगभग 50 से 1500 किलोमीटर) के बीच वैज्ञानिक प्रयोग करने के लिए किया जाता है। इनके माध्यम से वैज्ञानिक कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाते हैं, जैसे—
-
वायुमंडलीय संरचना
-
तापमान और दबाव
-
मौसम संबंधी परिवर्तन
-
अंतरिक्ष तकनीकों का परीक्षण
साउंडिंग रॉकेट अपेक्षाकृत कम लागत में तेजी से वैज्ञानिक डेटा एकत्र करने का भरोसेमंद तरीका माने जाते हैं।
भारत में साउंडिंग रॉकेट का इतिहास
भारत में साउंडिंग रॉकेट कार्यक्रम की शुरुआत 1965 में हुई थी, जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पहली बार स्वदेशी साउंडिंग रॉकेट लॉन्च किया था। इसके बाद से भारत ने इस क्षेत्र में लगातार प्रगति की है।
आज साउंडिंग रॉकेट का उपयोग न केवल वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए बल्कि नई अंतरिक्ष तकनीकों के परीक्षण के लिए भी किया जाता है।
गुजरात से हुआ यह नया लॉन्च इस दिशा में निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी मजबूत करता है।