समंदर के किनारे लहराया तिरंगा! गुजरात के डीजीपी KLN राव ने पाकिस्तान बॉर्डर के पास दी सलामी, VIDEO ने बढ़ाई सरहद की सख्ती

गुजरात: के नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डॉ. के एल एन राव इन दिनों अपने एक खास दौरे को लेकर सुर्खियों में हैं। राज्य की कमान संभालने के बाद उन्होंने जो कदम उठाया, उसने सुरक्षा एजेंसियों के बीच नई ऊर्जा भर दी है। पाकिस्तान सीमा के बेहद नजदीक स्थित कच्छ जिले के समुद्री तट पर उन्होंने तिरंगा फहराकर न केवल जवानों का हौसला बढ़ाया, बल्कि स्पष्ट संदेश भी दिया—सरहद की सुरक्षा सर्वोपरि है।

जखाऊ समुद्री तट पर तिरंगे को सलामी

डीजीपी ने कच्छ मुख्यालय भुज से करीब 108 किलोमीटर दूर स्थित जखाऊ के समुद्री तट पर तिरंगा फहराया। यह स्थान पाकिस्तान की समुद्री सीमा के बेहद करीब माना जाता है। नीले समंदर की लहरों के बीच, जब तिरंगा लहराया गया तो वहां मौजूद पुलिस, बीएसएफ और कोस्ट गार्ड के जवानों के चेहरों पर गर्व साफ झलक रहा था।

इस दौरान डीजीपी ने कहा कि कच्छ की सीमाएं केवल भू-सीमा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समुद्री सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जखाऊ जैसे सुदूर इलाकों में तैनात जवान कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

कच्छ: रणनीतिक दृष्टि से अहम जिला

कच्छ गुजरात का सबसे बड़ा जिला है और पाकिस्तान से सटी इसकी लंबी सीमा इसे रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बनाती है। रण ऑफ कच्छ का इलाका हो या समुद्री सीमा, हर तरफ सुरक्षा एजेंसियों की सतर्क निगरानी रहती है।

डीजीपी राव ने इस दौरे में बॉर्डर सिक्योरिटी, इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन और इंटेलिजेंस शेयरिंग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, ड्रोन सर्विलांस और संयुक्त ऑपरेशन से सीमा पर किसी भी प्रकार की घुसपैठ या तस्करी को रोका जा सकता है।

इंडियन कोस्ट गार्ड और बीएसएफ के साथ जॉइंट पेट्रोलिंग

अपने दौरे के दौरान डीजीपी ने इंडियन कोस्ट गार्ड और बीएसएफ के साथ समुद्र में संयुक्त पेट्रोलिंग की। यह दृश्य बेहद खास था—राज्य पुलिस का सर्वोच्च अधिकारी खुद समुद्री गश्त में शामिल हुआ।

समुद्र में जॉइंट पेट्रोलिंग के दौरान उन्होंने तस्करी, ड्रग्स रूट और मछुआरों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की। कच्छ के समुद्री रास्तों का उपयोग अतीत में ड्रग्स तस्करी के लिए किए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं, ऐसे में यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।

पिंगलेश्वर चौकी का दौरा

डीजीपी ने सुदूर स्थित पिंगलेश्वर चौकी का भी निरीक्षण किया। यहां जवान अत्यंत कठिन मौसम और सीमित संसाधनों में तैनात रहते हैं। उन्होंने जवानों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य पुलिस बल को आधुनिक संसाधनों और बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाएगा। सीमा सुरक्षा में तैनात कर्मियों का मनोबल ऊंचा रखना भी उतना ही जरूरी है जितना आधुनिक हथियार और उपकरण।

नलिया पुलिस स्टेशन को लिया गोद

अपने दौरे के दौरान डीजीपी राव ने नलिया पुलिस स्टेशन का दौरा किया। यह थाना पिछले वर्ष एक हाई-प्रोफाइल केस के कारण चर्चा में आया था, जब गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़ा मामला यहां दर्ज हुआ था।

डीजीपी ने नलिया पुलिस स्टेशन को गोद लेने की घोषणा की और उसके आधुनिकीकरण के लिए 5 लाख रुपये की ग्रांट देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती थानों को टेक्नोलॉजी, बेहतर संचार साधनों और बुनियादी सुविधाओं से लैस करना प्राथमिकता होगी।

क्राइम कॉन्फ्रेंस और NCORD बैठक

कच्छ दौरे के दौरान डीजीपी ने क्राइम कॉन्फ्रेंस और NCORD (नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन) बैठक में भी हिस्सा लिया। इसमें ड्रग्स तस्करी, घुसपैठ, साइबर क्राइम और मछुआरों की सुरक्षा जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए। समुद्री सीमा से होने वाली किसी भी अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

1992 बैच के अधिकारी, तेलंगाना से जुड़ाव

डॉ. के एल एन राव 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और गुजरात कैडर से संबंधित हैं। मूल रूप से तेलंगाना के रहने वाले राव ने राज्य में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। वर्तमान में वे राज्य के इंचार्ज डीजीपी के साथ-साथ सीआईडी क्राइम, रेलवे पुलिस और राज्य की जेलों के प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।

उनकी कार्यशैली सख्त लेकिन संवेदनशील मानी जाती है। कच्छ का यह दौरा उनके नेतृत्व की सक्रियता और फील्ड विजिट को प्राथमिकता देने का संकेत देता है।

‘बड़ा खाना’ से बढ़ाया मनोबल

डीजीपी ने जवानों और स्थानीय अधिकारियों के साथ ‘बड़ा खाना’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की, बल्कि जवानों का मनोबल भी बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि मजबूत मनोबल और टीमवर्क से सुनिश्चित होती है। उन्होंने जवानों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनकी हर जरूरत में साथ खड़ी है।

जनता की शिकायतें भी सुनीं

दौरे के दौरान डीजीपी ने स्थानीय नागरिकों से भी मुलाकात की। मछुआरों, ग्रामीणों और व्यापारियों की समस्याएं सुनीं। कई लोगों ने समुद्री सुरक्षा, तस्करी और रोजमर्रा की पुलिस सेवाओं से जुड़ी शिकायतें रखीं।

डीजीपी ने संबंधित अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्र के नागरिक भी सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

संदेश साफ: सरहद पर कोई समझौता नहीं

जखाऊ के समुद्री तट पर तिरंगा फहराने की घटना प्रतीकात्मक जरूर थी, लेकिन उसका संदेश बेहद स्पष्ट था—गुजरात पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां हर हाल में सीमा की रक्षा के लिए तैयार हैं।

समुद्र की लहरों के बीच लहराता तिरंगा यह बता रहा था कि चाहे चुनौती कितनी भी कठिन क्यों न हो, देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

गुजरात के डीजीपी डॉ. के एल एन राव का कच्छ दौरा केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं था, बल्कि यह एक मजबूत संदेश था कि राज्य की सीमाएं सुरक्षित हाथों में हैं। जखाऊ तट पर तिरंगा फहराना, कोस्ट गार्ड और बीएसएफ के साथ जॉइंट पेट्रोलिंग करना, नलिया पुलिस स्टेशन को गोद लेना और जवानों से सीधे संवाद—इन सभी कदमों ने यह स्पष्ट कर दिया कि नेतृत्व केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है।

कच्छ जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह सक्रियता सुरक्षा एजेंसियों के मनोबल को नई ऊंचाई देती है और नागरिकों में विश्वास मजबूत करती है।

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