थर्ड एसी में ‘प्लीज को-ऑपरेट’ का कहर: 2 टिकट पर 8 लोगों ने घेरा कंपार्टमेंट, बच्चों को गोद में लेकर 5 घंटे सफर

अहमदाबाद/सूरत। भारतीय रेलवे में आरक्षित डिब्बों में बेटिकट यात्रियों के चढ़ने और सीटों पर कब्जे की शिकायतें नई नहीं हैं, लेकिन गुजरात में एक परिवार के साथ जो हुआ, उसने ‘प्लीज को-ऑपरेट’ कल्चर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूरत से दाहोद तक करीब 300 किलोमीटर की यात्रा के दौरान एक यात्री को कंफर्म थर्ड एसी टिकट होने के बावजूद अपने बच्चों को गोद में बैठाकर पांच घंटे सफर करना पड़ा।

2000 रुपये का टिकट, फिर भी आराम नहीं

यात्री ने एक वेबसाइट पर अपनी आपबीती साझा करते हुए लिखा कि उसने और उसकी पत्नी ने Indian Railways की ट्रेन पश्चिम एक्सप्रेस में थर्ड एसी की कंफर्म सीटें बुक कराई थीं।

यात्रा का समय कम होने के कारण उन्होंने अपनी दो बेटियों के लिए अलग बर्थ रिजर्व नहीं कराई। सोचा कि पांच घंटे का सफर है, मैनेज हो जाएगा। लेकिन हालात कुछ और ही निकले।

दो टिकट, आठ लोगों का कब्जा

यात्री के मुताबिक, सूरत से ट्रेन में चढ़ने के कुछ ही देर बाद पता चला कि उनके कोच में आठ लोगों का एक बड़ा ग्रुप पहले से मौजूद है। आरोप है कि उस ग्रुप के पास केवल दो कंफर्म टिकट थे, लेकिन वे करीब 25 बड़े बैग और सामान के साथ पूरे कंपार्टमेंट पर फैल गए।

सीटों के नीचे की स्टोरेज स्पेस भी लगेज से भर दी गई थी। बैठने की जगह तक सीमित हो गई। जब यात्री ने आपत्ति जताई, तो उन्हें बार-बार “प्लीज को-ऑपरेट” करने के लिए कहा गया।

बच्चों को गोद में लेकर पांच घंटे का सफर

परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि यात्री और उनकी पत्नी को अपनी बेटियों को गोद में लेकर करीब पांच घंटे की यात्रा पूरी करनी पड़ी।

यात्री का कहना है कि थर्ड एसी टिकट के लिए करीब 2000 रुपये खर्च करने के बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधा तक नहीं मिली। उन्होंने लिखा कि ट्रेन में ‘को-ऑपरेट’ कल्चर अब कंट्रोल से बाहर हो चुका है।

पश्चिम एक्सप्रेस का रूट

पश्चिम एक्सप्रेस मुंबई के बांद्रा टर्मिनस से अमृतसर जंक्शन तक चलती है। यह ट्रेन महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली और पंजाब को जोड़ती है। वडोदरा, कोटा और नई दिल्ली जैसे प्रमुख स्टेशनों से होकर गुजरती है।

रेलवे की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस मामले पर रेलवे की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, इससे पहले भी आरक्षित कोच में अवैध कब्जे और भीड़ की शिकायतें सामने आती रही हैं।

यात्री का कहना है कि अगर आरक्षित डिब्बों में भी नियमों का पालन नहीं होगा, तो यात्रियों का भरोसा कैसे बना रहेगा?

सूरत से दाहोद के बीच हुई यह घटना भारतीय रेल में भीड़ प्रबंधन और नियमों के पालन पर सवाल उठाती है। कंफर्म टिकट के बावजूद यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़े, तो यह व्यवस्था पर सीधा सवाल है।

रेलवे के लिए यह जरूरी है कि आरक्षित कोचों में सख्ती से नियम लागू किए जाएं और ‘प्लीज को-ऑपरेट’ के नाम पर अव्यवस्था को बढ़ावा न मिले। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना ही असली सेवा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *