दिल्ली: की सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है। इस बार मुद्दा है आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का नया सरकारी आवास। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उनके 95 लोधी एस्टेट स्थित नए घर की तस्वीरें जारी करते हुए बड़ा आरोप लगाया है, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) ने इन तस्वीरों को पूरी तरह फर्जी करार दिया है।
BJP का आरोप—‘शीशमहल 2’ का खुलासा
दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केजरीवाल के नए घर की तस्वीरें सार्वजनिक कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सादगी की बात करने वाले केजरीवाल आज आलीशान जीवन जी रहे हैं।
वर्मा ने कहा कि यह मामला ‘शीशमहल 2’ जैसा है, जहां सरकारी पैसे से लग्जरी सुविधाएं तैयार की गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब दिल्ली कोरोना महामारी से जूझ रही थी, तब भी केजरीवाल के पुराने आवास पर काम जारी रहा।
AAP का पलटवार—‘फोटो फर्जी हैं’
BJP के आरोपों के तुरंत बाद आम आदमी पार्टी ने तीखा जवाब दिया। दिल्ली की वरिष्ठ नेता आतिशी ने इन तस्वीरों को फर्जी बताते हुए कहा कि यह केजरीवाल के घर की तस्वीरें ही नहीं हैं।
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर सच्चाई सामने लानी है, तो सभी बड़े नेताओं को अपने-अपने घर जनता के लिए खोल देने चाहिए। इसके बाद जनता खुद तय कर लेगी कि कौन कितना आलीशान जीवन जी रहा है।

कब शिफ्ट हुए केजरीवाल?
अरविंद केजरीवाल 24 अप्रैल को इस नए सरकारी आवास में शिफ्ट हुए हैं। यह बंगला उन्हें राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष के रूप में केंद्र सरकार द्वारा आवंटित किया गया था।
इससे पहले वह पंजाब से राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल को आवंटित सरकारी आवास में रह रहे थे। नए आवास के लिए उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख भी किया था, जिसके बाद केंद्र ने उन्हें यह सुविधा उपलब्ध कराई।
बंगले की खासियत क्या है?
95 लोधी एस्टेट स्थित यह सरकारी बंगला करीब 5000 वर्गफुट में फैला हुआ है और यह टाइप-VII कैटेगरी का आवास है, जो सरकारी आवासों की दूसरी सबसे बड़ी श्रेणी में आता है।
इसमें चार बेडरूम, एक बड़ा हॉल, डाइनिंग रूम, ऑफिस स्पेस, वेटिंग एरिया, दो लॉन, एक गैराज और तीन सर्वेंट क्वार्टर शामिल हैं।
यही वजह है कि इस बंगले को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
पुराना ‘शीशमहल’ विवाद फिर चर्चा में
यह विवाद ऐसे समय में उठा है, जब केजरीवाल के पुराने आवास 6, फ्लैगस्टाफ रोड को लेकर पहले ही सवाल उठ चुके हैं।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, उस बंगले के रिनोवेशन पर अनुमानित लागत से करीब 342% ज्यादा खर्च हुआ था।
जहां शुरुआत में खर्च करीब 7.91 करोड़ रुपए आंका गया था, वहीं अंतिम खर्च बढ़कर 33.66 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इसमें महंगे इंटीरियर और सजावटी सामान पर भारी राशि खर्च की गई थी।
सियासी असर क्या होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। BJP इस मामले को ‘सादगी बनाम लग्जरी’ के नैरेटिव के तौर पर पेश कर रही है, जबकि AAP इसे राजनीतिक साजिश बता रही है।
इस विवाद का असर दिल्ली और पंजाब दोनों की राजनीति पर पड़ सकता है, खासकर तब जब चुनावी माहौल धीरे-धीरे बन रहा है।
केजरीवाल के नए आवास को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर सियासी माहौल गरमा दिया है। जहां BJP इसे बड़ा मुद्दा बना रही है, वहीं AAP इसे बेबुनियाद बता रही है। अब देखना होगा कि इस विवाद में सच्चाई क्या सामने आती है और इसका राजनीतिक असर कितना गहरा होता है।