बिहार सरकार का बड़ा फैसला, छोटे दुकानदारों को मिली राहत
पटना। बिहार सरकार ने राज्य के लाखों छोटे दुकानदारों, स्वरोजगार से जुड़े लोगों और सूक्ष्म उद्यमियों को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने 10 से कम कर्मचारियों वाली दुकानों और प्रतिष्ठानों के लिए निबंधन (रजिस्ट्रेशन) की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। इस निर्णय को राज्य में व्यापार को बढ़ावा देने और छोटे व्यवसायियों पर प्रशासनिक बोझ कम करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
सरकार के इस फैसले का बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने स्वागत किया है। व्यापारिक संगठनों का मानना है कि इससे छोटे व्यवसायों को राहत मिलेगी और कारोबार करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान होगी।
पहले क्या था नियम?
अब तक बिहार में दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत एक या दो कर्मचारियों वाले छोटे दुकानदारों को भी अपने प्रतिष्ठान का निबंधन कराना पड़ता था। इससे छोटे व्यापारियों को कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, जिसमें समय और संसाधनों दोनों की खपत होती थी।
लेकिन अब बिहार दुकान एवं प्रतिष्ठान (रोजगार विनियमन और सेवा शर्त अधिनियम, 2025) को निरस्त किए जाने के बाद केवल उन प्रतिष्ठानों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।
इस बदलाव से छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
व्यापारिक संगठनों ने जताई खुशी
बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने कहा कि यह फैसला लंबे समय से व्यापारिक समुदाय की मांग थी। उन्होंने बताया कि चैम्बर ने 25 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, श्रम संसाधन एवं प्रवासी कल्याण मंत्री और विभागीय सचिव को पत्र लिखकर इस संबंध में मांग की थी।
चैम्बर का तर्क था कि छोटे दुकानदारों के लिए जटिल नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन करना मुश्किल होता है। इससे उनके ऊपर अतिरिक्त प्रशासनिक दबाव बढ़ता है और व्यापार करने में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न होती हैं।

दिल्ली मॉडल का दिया गया था सुझाव
व्यापारिक संगठन ने सरकार को सुझाव दिया था कि दिल्ली की तर्ज पर बिहार में भी छोटे प्रतिष्ठानों को कुछ श्रम कानूनों की अनिवार्यताओं से छूट दी जाए।
उनका कहना था कि सूक्ष्म और लघु उद्यम राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि इन्हें आसान नियमों के तहत काम करने का अवसर दिया जाए तो नए रोजगार पैदा होंगे और राज्य में निवेश का माहौल बेहतर बनेगा।
अब भी एक और मांग बाकी
हालांकि चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही एक नई मांग भी रखी है। संगठन चाहता है कि निबंधन की अनिवार्यता की सीमा 10 कर्मचारियों से बढ़ाकर 20 कर्मचारी की जाए।
व्यापारिक संगठनों का मानना है कि यदि यह सीमा 20 कर्मचारियों तक कर दी जाए तो राज्य के हजारों अतिरिक्त छोटे और मध्यम उद्यमों को भी राहत मिल सकेगी।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार सरकार का यह कदम राज्य में ‘Ease of Doing Business’ को मजबूत करेगा। छोटे उद्यमियों को कम कागजी कार्यवाही और कम प्रशासनिक हस्तक्षेप का सामना करना पड़ेगा।
इससे न केवल नए व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया आसान होगी बल्कि कई असंगठित व्यवसाय भी औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
रोजगार सृजन पर भी पड़ेगा सकारात्मक असर
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि जब छोटे व्यवसायों पर अनुपालन (Compliance) का बोझ कम होगा तो वे अपने कारोबार का विस्तार करने में अधिक रुचि दिखाएंगे। इसका सीधा असर रोजगार सृजन पर पड़ेगा।
बिहार जैसे राज्य में, जहां बड़ी संख्या में लोग स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों पर निर्भर हैं, यह निर्णय स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है।
व्यापार जगत की नजर अब अगले फैसले पर
अब व्यापारिक संगठनों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि कर्मचारियों की सीमा को 20 तक बढ़ाया जाता है तो राज्य में सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को और अधिक राहत मिल सकती है।
फिलहाल सरकार का यह फैसला लाखों छोटे दुकानदारों के लिए राहत भरी खबर बनकर सामने आया है और इसे राज्य की व्यापारिक नीतियों में एक सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है।
बिहार सरकार द्वारा 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता से मुक्त करना छोटे व्यापारियों के लिए बड़ी राहत है। इससे कारोबार करना आसान होगा, प्रशासनिक जटिलताएं कम होंगी और राज्य में रोजगार एवं औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।