नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में शामिल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) का ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) एक बार फिर विवादों में आ गया है। पहले 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने OSM पोर्टल और उसकी टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े किए थे। अब एक एथिकल हैकर ने भी इस सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
22 वर्षीय बीटेक छात्र और एथिकल हैकर तीर्थ परमार ने दावा किया है कि CBSE के OSM पोर्टल में कई गंभीर तकनीकी खामियां मौजूद थीं, जिनके जरिए सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच बनाना अपेक्षाकृत आसान था। उनके अनुसार, यदि इन कमजोरियों का गलत हाथों में इस्तेमाल होता तो छात्रों के संवेदनशील रिकॉर्ड, उत्तर पुस्तिकाओं और अन्य महत्वपूर्ण डेटा तक पहुंच संभव हो सकती थी।
क्या है CBSE का OSM पोर्टल?
CBSE का ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से परीक्षक ऑनलाइन कॉपियों की जांच करते हैं और अंक दर्ज करते हैं। यह सिस्टम मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और अधिक व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया था।
हालांकि, हालिया दावों ने इस पूरी व्यवस्था की साइबर सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एथिकल हैकर ने क्या दावा किया?
एएनआई से बातचीत में तीर्थ परमार ने कहा कि OSM पोर्टल में कई ऐसे बग और कमजोरियां थीं, जिनके जरिए सिस्टम तक पहुंच बनाना मुश्किल नहीं था।
परमार के अनुसार, कुछ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध फाइलों में डेटाबेस से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और पासवर्ड मौजूद थे। यदि कोई तकनीकी जानकारी रखने वाला व्यक्ति इन फाइलों तक पहुंच जाता, तो वह सिस्टम के अंदर प्रवेश कर सकता था।
उन्होंने दावा किया कि दो प्रमुख तरीकों से सिस्टम तक पहुंच बनाई जा सकती थी—
- सार्वजनिक फाइलों के जरिए डेटाबेस की जानकारी प्राप्त करना।
- पोर्टल में मौजूद तकनीकी खामियों और बग्स का फायदा उठाना।
उनका कहना है कि इन कमजोरियों के कारण छात्रों के डेटा, उत्तर पुस्तिकाओं और अन्य संवेदनशील सूचनाओं तक पहुंच का खतरा मौजूद था।
सुरक्षा ऑडिट पर भी उठे सवाल
तीर्थ परमार का आरोप है कि पोर्टल के विकास और संचालन के दौरान सुरक्षा ऑडिट को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उनके अनुसार, यदि समय पर व्यापक साइबर सुरक्षा परीक्षण किए गए होते तो इन खामियों को पहले ही दूर किया जा सकता था।
उन्होंने कहा कि इतनी गंभीर कमजोरियां किसी भी बड़े सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म में होना चिंता का विषय है। खासकर तब, जब यह प्लेटफॉर्म लाखों छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड से जुड़ा हो।
CBSE को दी थी जानकारी
एथिकल हैकर ने बताया कि उन्होंने जिम्मेदार प्रकटीकरण (Responsible Disclosure) के तहत इन खामियों की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश की थी। उनका दावा है कि उन्होंने CBSE से संपर्क किया और सिस्टम में मौजूद कमियों के बारे में विस्तार से बताया।
हालांकि, उनके मुताबिक अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है।
छात्र द्वारा उठाए गए सवालों के बाद बढ़ी चर्चा
इस पूरे मामले ने तब ज्यादा ध्यान खींचा जब 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने OSM पोर्टल और उससे जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए। इसके बाद शिक्षा जगत और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच इस सिस्टम की विश्वसनीयता पर चर्चा तेज हो गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है क्योंकि यह सीधे छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है।
साइबर सुरक्षा क्यों है अहम?
आज के दौर में शिक्षा क्षेत्र तेजी से डिजिटलीकरण की ओर बढ़ रहा है। बोर्ड परीक्षाओं से लेकर प्रवेश प्रक्रियाओं तक लगभग हर महत्वपूर्ण कार्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निर्भर है। ऐसे में यदि किसी सिस्टम में सुरक्षा खामियां रह जाती हैं तो डेटा लीक, अनधिकृत पहुंच और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ जैसे गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म को नियमित सुरक्षा ऑडिट, पेनिट्रेशन टेस्टिंग और अपडेटेड साइबर प्रोटोकॉल के तहत संचालित किया जाना चाहिए।
जांच और जवाब का इंतजार
फिलहाल CBSE की ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह देश की सबसे बड़ी शैक्षणिक मूल्यांकन प्रणालियों में से एक की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि CBSE इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या किसी स्वतंत्र जांच के जरिए इन दावों की पुष्टि की जाती है या नहीं।