8 साल पहले मिला था कटा हुआ सिर, अब खुला ऐसा राज कि कांप उठी पुलिस! बाल मजदूर की बेरहमी से हत्या का सनसनीखेज खुलासा

नई दिल्ली/राजकोट। गुजरात के राजकोट में आठ साल पहले सामने आया एक रहस्यमयी मामला आखिरकार सुलझ गया है। साल 2018 में अजी नदी के किनारे एक किशोर का कटा हुआ सिर मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। उस समय पुलिस को यह मामला किसी तांत्रिक अनुष्ठान या धार्मिक बलि से जुड़ा प्रतीत हुआ था। लेकिन समय बीतने के साथ जांच ठंडी पड़ गई और यह मामला अनसुलझा रह गया।

अब राजकोट पुलिस ने इस केस का ऐसा खुलासा किया है जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। जांच में पता चला कि मृतक पश्चिम बंगाल का एक नाबालिग प्रवासी बाल मजदूर था, जिसे काम दिलाने के नाम पर गुजरात लाया गया था। आरोप है कि उसके ठेकेदार ने लगातार शारीरिक यातनाएं देने के बाद उसकी हत्या कर दी और सबूत मिटाने के लिए शव के टुकड़े-टुकड़े कर दिए।

बाल मजदूरी विरोधी अभियान से खुली गुत्थी

इस केस का सबसे अहम मोड़ तब आया जब राजकोट पुलिस ने बाल मजदूरी के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। इस दौरान कई नाबालिग बच्चों को श्रम कार्यों से मुक्त कराया गया और उन्हें उनके घर भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई।

इसी दौरान पश्चिम बंगाल के एक परिवार ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि उनका बेटा लगभग आठ साल पहले काम के लिए राजकोट गया था, लेकिन उसके बाद वह कभी वापस नहीं लौटा। परिवार को लंबे समय से संदेह था कि उसके साथ कुछ अनहोनी हुई है।

परिजनों ने पुलिस को बताया कि एक ठेकेदार अजीत मौला उर्फ अजमत मौला उसे अपने साथ गुजरात लेकर गया था। इसके बाद से उसका कोई सुराग नहीं मिला।

आरोपी पहले से जेल में बंद

परिवार की जानकारी के आधार पर पुलिस ने आरोपी अजीत मौला की तलाश शुरू की। जांच में पता चला कि वह कोलकाता की एक जेल में किसी अन्य अपराध के मामले में सजा काट रहा है।

राजकोट पुलिस की विशेष टीम ने आरोपी से पूछताछ की। शुरुआत में वह लगातार बयान बदलता रहा, लेकिन जब पुलिस ने साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर दबाव बनाया तो आरोपी टूट गया और उसने अपराध स्वीकार कर लिया।

काम में पीछे रहने पर देता था यातनाएं

पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक किशोर निर्माण कार्यों में मजदूरी करता था। आरोपी ठेकेदार उससे लगातार कठिन काम करवाता था। चूंकि बच्चा कम उम्र का था और वयस्क मजदूरों की तरह काम नहीं कर पाता था, इसलिए उसे रोज प्रताड़ित किया जाता था।

जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपी अक्सर उसे पीटता था और मानसिक रूप से भी परेशान करता था। लगातार मारपीट और यातनाओं के कारण एक दिन उसकी मौत हो गई।

शव के किए कई टुकड़े

बच्चे की मौत के बाद आरोपी घबरा गया। गिरफ्तारी के डर से उसने अपराध छिपाने के लिए बेहद भयावह कदम उठाया। पुलिस के अनुसार उसने शव के कई टुकड़े किए और पहचान मिटाने की कोशिश की।

मृतक का सिर अजी नदी के किनारे फेंक दिया गया था, जिसे स्थानीय लोगों ने देखा और पुलिस को सूचना दी थी। यही सिर 2018 में मिले रहस्यमयी मामले का केंद्र बना था।

डीएनए जांच से होगी अंतिम पुष्टि

हालांकि आरोपी के कबूलनामे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को पूरा विश्वास है कि मृतक वही लापता किशोर है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के तहत पहचान की अंतिम पुष्टि डीएनए जांच से की जाएगी।

पुलिस ने मृतक के परिजनों के डीएनए नमूने एकत्र कर लिए हैं। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद आरोपी को ट्रांसफर वारंट पर राजकोट लाकर हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।

बाल मजदूरी पर बड़ा सवाल

इस मामले ने एक बार फिर बाल मजदूरी की भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया है। बेहतर भविष्य और रोजगार के झांसे में कई गरीब परिवार अपने बच्चों को दूसरे राज्यों में भेज देते हैं, जहां वे शोषण और अपराध का शिकार हो जाते हैं।

राजकोट पुलिस का कहना है कि यदि बाल मजदूरी विरोधी अभियान नहीं चलाया जाता तो संभव है कि यह मामला कभी सुलझ नहीं पाता।

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