नई दिल्ली। महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के बाद तैयार की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। ड्राफ्ट मतदाता सूची से 2,06,88,487 मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हो पाए हैं। इस आंकड़े को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और भाजपा पर तीखा हमला बोला है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मताधिकार को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के लिए बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए इसे ‘वोट चोरी आयोग’ तक कह दिया।
हालांकि, चुनाव अधिकारियों का कहना है कि ड्राफ्ट सूची में नाम शामिल न होने के पीछे कई प्रशासनिक और सत्यापन संबंधी कारण हैं। इनमें मतदाता का अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिलना, घर बदलना, मृत्यु, दूसरी जगह पंजीकरण और डुप्लीकेट प्रविष्टियां शामिल हैं।
2.06 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, SIR के बाद तैयार ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 2,06,88,487 मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हो पाए हैं।
यह संख्या पिछले वोटर बेस के करीब 21.14 प्रतिशत के बराबर बताई गई है।
SIR से पहले महाराष्ट्र में लगभग 9.78 करोड़ मतदाता दर्ज थे। ड्राफ्ट सूची में अब 7.71 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम शामिल हैं।
इनमें करीब 3.95 करोड़ पुरुष, 3.75 करोड़ महिलाएं और 3,087 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
यही आंकड़ा अब महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग अपनी रणनीति बदलते रहते हैं और उनका मकसद किसी भी कीमत पर भाजपा की जीत सुनिश्चित करना है।
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के साथ-साथ 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों तथा पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया का भी जिक्र किया।
उन्होंने महाराष्ट्र के आंकड़ों को सामने रखते हुए सवाल किया कि अलग-अलग चुनावों के दौरान मतदाताओं की संख्या में इतना बड़ा अंतर क्यों दिखाई दे रहा है।

‘हर पांचवां वोटर बाहर’
राहुल गांधी ने दावा किया कि महाराष्ट्र में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 2.07 करोड़ नाम बाहर हैं, यानी लगभग हर पांचवां मतदाता ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं है।
उन्होंने अलग-अलग समय की मतदाता संख्या का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि इनमें से कौन-सी सूची सही थी।
राहुल गांधी का आरोप है कि अगर मतदाता सूची में बड़ी संख्या में पात्र लोगों के नाम शामिल नहीं होते हैं तो इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
चुनाव अधिकारियों ने बताई नाम हटने की वजह
दूसरी ओर, चुनाव अधिकारियों ने नाम शामिल न होने के पीछे कई कारण बताए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मतदाता जो अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले, अपना घर बदल चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिनका नाम किसी दूसरी जगह पहले से दर्ज है, उनके एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं हो सके।
इसके अलावा डुप्लीकेट एंट्री और फॉर्म जमा नहीं करने वाले मतदाताओं के नाम भी इस श्रेणी में शामिल हैं।
इसलिए ड्राफ्ट सूची में नाम न होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित व्यक्ति का मताधिकार स्थायी रूप से समाप्त हो गया है।
पुणे और ठाणे में सबसे ज्यादा फॉर्म जमा नहीं
जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पुणे में करीब 28.6 लाख एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं हो पाए।
इसके बाद ठाणे में करीब 28.5 लाख, मुंबई उपनगर में 26.5 लाख, नागपुर में 14.43 लाख, नासिक में 10.27 लाख और मुंबई शहर में करीब 9.5 लाख फॉर्म जमा नहीं हो सके।
इन आंकड़ों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
पात्र मतदाताओं को 30 सितंबर तक मौका
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने से चिंतित पात्र मतदाताओं के लिए राहत की बात यह है कि दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया है।
मतदाता 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच दावा-आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
यदि कोई पात्र नागरिक ड्राफ्ट सूची में अपना नाम नहीं पाता है तो वह आवश्यक घोषणा के साथ फॉर्म 6 के जरिए नाम शामिल कराने का दावा कर सकता है।
वहीं फॉर्म 7 के माध्यम से किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है, जबकि फॉर्म 8 का इस्तेमाल नाम, पता, उम्र या लिंग जैसी जानकारी में सुधार के लिए किया जा सकता है।
4 नवंबर को आएगी अंतिम वोटर लिस्ट
ड्राफ्ट सूची अभी अंतिम सूची नहीं है। चुनावी रजिस्ट्रेशन अधिकारियों और उनके सहायकों द्वारा 31 अगस्त से 29 अक्टूबर के बीच दावों, आपत्तियों और संबंधित नोटिस पर कार्रवाई की जाएगी।
इसके बाद प्रक्रिया पूरी होने पर 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।
इसका मतलब है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम फिलहाल ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, उनके पास अपनी स्थिति स्पष्ट कराने और आवश्यक दस्तावेजों के साथ दावा करने का अवसर मौजूद है।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या?
महाराष्ट्र में SIR के बाद सामने आए 2.06 करोड़ से अधिक नामों का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण हो गया है।
एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, वहीं चुनाव अधिकारी इसे मतदाता सूची के सत्यापन और शुद्धिकरण की प्रक्रिया बता रहे हैं।
अब सबसे महत्वपूर्ण चरण दावा और आपत्ति का है। 30 सितंबर तक पात्र मतदाताओं की ओर से आने वाले दावों और 4 नवंबर को जारी होने वाली अंतिम सूची से काफी हद तक तस्वीर साफ होगी।

