नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में जारी तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। भारत ने पाकिस्तान को नवंबर में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद किसी पाकिस्तानी वरिष्ठ मंत्री को भारत आने के लिए दिया गया पहला ऐसा न्योता है।
भारत की ओर से यह आमंत्रण केवल पाकिस्तान को नहीं, बल्कि SCO के सभी 10 सदस्य देशों को भेजा गया है। ऐसे में इस घटनाक्रम को बहुपक्षीय कूटनीति के संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण है। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से अब तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि उसके मंत्री भारत आएंगे या नहीं।
20 से 22 नवंबर तक दिल्ली में होगा SCO फोरम
भारत की राजधानी नई दिल्ली में SCO सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम का आयोजन 20 से 22 नवंबर 2026 तक प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना, साझा ऐतिहासिक विरासत पर संवाद बढ़ाना और लोगों के बीच आपसी संपर्क को प्रोत्साहित करना है।
इस फोरम के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत एवं संस्कृति मंत्री औरंगजेब खान खिची को आमंत्रित किया गया है। यदि वह भारत आने का फैसला करते हैं, तो मई 2023 के बाद किसी पाकिस्तानी मंत्री की यह पहली भारत यात्रा होगी। मई 2023 में तत्कालीन पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी गोवा में SCO के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने आए थे।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पाकिस्तान इस निमंत्रण पर क्या रुख अपनाता है। उसकी भागीदारी की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फोरम में दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने होंगे या नहीं।

पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद बिगड़े रिश्ते
भारत और पाकिस्तान के संबंध अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद और अधिक तनावपूर्ण हो गए थे। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इसके बाद भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस सैन्य अभियान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा और द्विपक्षीय संबंधों पर इसका गहरा असर पड़ा।
ऐसे माहौल में पाकिस्तान को भारत आने का निमंत्रण दिए जाने को लेकर स्वाभाविक रूप से चर्चा हो रही है। हालांकि, इस न्योते को दोनों देशों के बीच संबंधों में व्यापक सुधार या किसी नए समझौते का संकेत मानना अभी उचित नहीं होगा।
दरअसल, SCO एक बहुपक्षीय संगठन है, जहां सदस्य देशों को साझा एजेंडे पर बातचीत और सहयोग के अवसर मिलते हैं। भारत की ओर से पाकिस्तान को बुलाना इसी संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आतंकवाद और सीमा पार से सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर भारत के रुख में बदलाव आ गया है।
राजनाथ सिंह ने SCO मंच से आतंकवाद पर क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में SCO के शासनाध्यक्षों की परिषद की बैठक के दौरान भारत की ओर से इस फोरम की मेजबानी की घोषणा की थी। इस बैठक में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार भी मौजूद थे।
राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने की जरूरत पर जोर दिया था। भारत का कहना है कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए और इसके पूरे तंत्र को खत्म करने के लिए देशों को साझा प्रयास करने चाहिए।
इसलिए पाकिस्तान को SCO फोरम का न्योता देने और आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को अलग-अलग संदर्भों में समझना जरूरी है। भारत बहुपक्षीय मंचों पर भागीदारी जारी रखते हुए सुरक्षा से जुड़े अपने मुद्दे भी उठाता रहा है।
क्या इस न्योते से भारत-पाकिस्तान संबंध सुधरेंगे?
यह सवाल अभी खुला हुआ है। किसी बहुपक्षीय बैठक में एक ही मंच पर मौजूद होना और द्विपक्षीय संबंधों में वास्तविक सुधार होना दो अलग बातें हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से कई विवाद और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं।
यदि पाकिस्तान के मंत्री इस फोरम में शामिल होते हैं, तो यह सांस्कृतिक संवाद और बहुपक्षीय संपर्क का एक अवसर हो सकता है। लेकिन इससे किसी औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता, समझौते या नीतिगत बदलाव की पुष्टि नहीं होती।
भारत के लिए इस आयोजन का एक उद्देश्य SCO के सदस्य देशों के साथ सांस्कृतिक सहयोग और आपसी समझ को बढ़ावा देना है। पाकिस्तान की भागीदारी और आयोजन के दौरान होने वाली संभावित बातचीत पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
SCO में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
शंघाई सहयोग संगठन में कुल 10 पूर्ण सदस्य देश हैं—भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान। यह संगठन क्षेत्रीय सहयोग, सुरक्षा, आर्थिक संपर्क और सांस्कृतिक संवाद जैसे मुद्दों पर काम करता है।
भारत ने 2017 में SCO की पूर्ण सदस्यता हासिल की थी। संगठन के मंच पर भारत और पाकिस्तान की भागीदारी इस बात को भी दर्शाती है कि द्विपक्षीय तनाव के बावजूद बहुपक्षीय संस्थाओं के भीतर संवाद की प्रक्रिया जारी रह सकती है।

