लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव परिणाम घोषित हो गए हैं। इन नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी (SP) के खाते में 5 सीटें आईं। चुनाव परिणामों ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भाजपा और सपा के बीच मुकाबले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
कई निर्वाचन क्षेत्रों में कड़ी टक्कर देखने को मिली। वहीं, लखनऊ और वाराणसी जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी की जीत ने खास ध्यान खींचा। इन नतीजों को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के संगठन और राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि, विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है, इसलिए इनके नतीजों को सीधे पूरे प्रदेश के जनमत का संकेत नहीं माना जा सकता।
यूपी MLC चुनाव 2026: किस सीट से कौन जीता?
उत्तर प्रदेश की सभी 11 सीटों पर भाजपा और सपा के बीच मुकाबला रहा। विजेताओं की सूची इस प्रकार है:
| निर्वाचन क्षेत्र | विजेता उम्मीदवार | पार्टी |
|---|---|---|
| मेरठ स्नातक | दिनेश कुमार गोयल | भाजपा |
| आगरा स्नातक | डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह | भाजपा |
| इलाहाबाद-झांसी स्नातक | डॉ. मान सिंह यादव | सपा |
| लखनऊ स्नातक | कांति सिंह | सपा |
| वाराणसी स्नातक | आशुतोष सिन्हा | सपा |
| मेरठ शिक्षक | श्रीचंद शर्मा | भाजपा |
| लखनऊ शिक्षक | उमेश द्विवेदी | भाजपा |
| बरेली-मुरादाबाद शिक्षक | डॉ. हरि सिंह ढिल्लो | भाजपा |
| गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक | ध्रुव कुमार त्रिपाठी | भाजपा |
| वाराणसी शिक्षक | लाल बिहारी यादव | सपा |
| आगरा शिक्षक | डॉ. आकाश अग्रवाल | सपा |
इस तरह भाजपा ने मेरठ की दोनों सीटों सहित आगरा स्नातक, लखनऊ शिक्षक, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज की। दूसरी ओर, सपा ने इलाहाबाद-झांसी स्नातक, लखनऊ स्नातक, वाराणसी की दोनों सीटों और आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बाजी मारी।

लखनऊ स्नातक सीट पर सपा की जीत ने क्यों खींचा ध्यान?
लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम राजनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। यहां समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार कांति सिंह ने जीत दर्ज की। इस सीट पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत स्नातक मतदाता मतदान करते हैं। इसलिए यहां का परिणाम शिक्षित मतदाताओं के बीच उम्मीदवारों और दलों के समर्थन को समझने के लिए अहम माना जाता है। सपा की जीत से पार्टी को राजनीतिक बढ़त जरूर मिली है, लेकिन इसके आधार पर पूरे लखनऊ या प्रदेश के मतदाताओं की पसंद का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
वाराणसी में सपा का दबदबा, दोनों सीटों पर जीत
वाराणसी की दोनों विधान परिषद सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में लाल बिहारी यादव विजयी रहे, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में आशुतोष सिन्हा ने जीत दर्ज की।
वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, इसलिए यहां के चुनावी परिणामों पर राजनीतिक दलों की खास नजर रहती है। दोनों सीटों पर सपा की जीत ने भाजपा के लिए समीक्षा की स्थिति पैदा की है।
हालांकि, इन निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता सामान्य लोकसभा या विधानसभा चुनाव के मतदाताओं से अलग होते हैं। इसलिए वाराणसी के MLC नतीजों को आगामी विधानसभा चुनाव का निश्चित संकेत मानना उचित नहीं होगा।
आगरा और मेरठ में क्या रहा परिणाम?
आगरा में मुकाबला दो अलग निर्वाचन क्षेत्रों में हुआ। स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने जीत दर्ज की, जबकि शिक्षक सीट सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल के खाते में गई। इस तरह आगरा में दोनों प्रमुख दलों को एक-एक सीट मिली।
मेरठ में भाजपा ने दोनों सीटें अपने नाम कीं। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में दिनेश कुमार गोयल और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में श्रीचंद शर्मा विजयी रहे। इन परिणामों ने भाजपा को क्षेत्र में अपनी स्थिति बनाए रखने में मदद की।
इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने जीत दर्ज की। वहीं, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट पर भाजपा के डॉ. हरि सिंह ढिल्लो और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर ध्रुव कुमार त्रिपाठी विजयी रहे।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्या है इन नतीजों का संदेश?
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में MLC चुनाव के नतीजों को भाजपा और समाजवादी पार्टी की तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। भाजपा ने कुल 11 में से 6 सीटें जीतकर बढ़त बनाए रखी, जबकि सपा ने 5 सीटों पर जीत दर्ज कर मुकाबले को कड़ा बनाया।
सपा की जीत खासकर लखनऊ स्नातक और वाराणसी की दोनों सीटों पर चर्चा का विषय रही। भाजपा के लिए ये परिणाम अपने संगठन, स्थानीय नेतृत्व और मतदाता संपर्क की समीक्षा करने का अवसर हो सकते हैं। दूसरी ओर, सपा इन जीतों को अपने समर्थन के विस्तार के रूप में पेश कर सकती है।
फिर भी, शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की प्रकृति सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होती है। 2027 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों, गठबंधनों और व्यापक मतदाता समूह की भूमिका निर्णायक होगी।

