नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार आगे बढ़ रहा है, लेकिन पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य सहायता दिए जाने का मुद्दा दोनों देशों की बातचीत में अहम बना हुआ है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फिलीपींस के सेबू में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों से जुड़े सपोर्ट पैकेज पर भारत की चिंता जाहिर की।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 बेड़े के रखरखाव और आधुनिकीकरण से जुड़े पैकेज को मंजूरी दी है। भारत की चिंता केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात को लेकर भी है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली संवेदनशील अमेरिकी सैन्य तकनीक किसी तीसरे देश तक पहुंच सकती है।
राजनाथ सिंह ने बातचीत में पाकिस्तान को उन्नत सैन्य तकनीक उपलब्ध कराने के संभावित सुरक्षा प्रभावों का मुद्दा उठाया। भारत का मानना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए ऐसे फैसलों का व्यापक आकलन जरूरी है।
क्या है पाकिस्तान के लिए 686 मिलियन डॉलर का F-16 पैकेज?
अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों के लिए करीब 686 मिलियन डॉलर यानी 68.6 करोड़ डॉलर का सपोर्ट पैकेज मंजूर किया है। इसका उद्देश्य विमानों के रखरखाव, तकनीकी सहायता और परिचालन क्षमता को बनाए रखने में मदद करना है।
पैकेज में एवियोनिक्स से जुड़े सुधार, संचार और क्रिप्टोग्राफिक उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, प्रशिक्षण, सिम्युलेटर तथा लॉजिस्टिक्स सहायता जैसी सुविधाएं शामिल बताई गई हैं। इन व्यवस्थाओं से पाकिस्तान अपने F-16 बेड़े को लंबे समय तक परिचालन योग्य बनाए रखने में सक्षम हो सकता है।
F-16 अमेरिकी मूल का बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जिसका इस्तेमाल कई देशों की वायु सेनाएं करती हैं। पाकिस्तान भी लंबे समय से इस विमान का उपयोग करता रहा है। ऐसे में विमानों के रखरखाव और तकनीकी सहायता का मामला उसकी सैन्य क्षमता से जुड़ा हुआ है।
भारत की आपत्ति इस बात पर है कि पाकिस्तान को मिलने वाली सैन्य सहायता का क्षेत्रीय सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, सपोर्ट पैकेज को सीधे किसी संभावित सैन्य कार्रवाई से जोड़ने के लिए अलग और ठोस साक्ष्य जरूरी होंगे।

चीन तक पहुंच सकती है संवेदनशील तकनीक? भारत की बड़ी चिंता
राजनाथ सिंह की बातचीत में एक अहम मुद्दा संवेदनशील अमेरिकी तकनीक के किसी तीसरे देश तक पहुंचने की आशंका भी रहा। भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संबंधों के साथ-साथ पाकिस्तान और चीन के करीबी रक्षा सहयोग को देखते हुए यह चिंता रणनीतिक महत्व रखती है।
भारत की आशंका है कि पाकिस्तान को उपलब्ध कराई गई उन्नत तकनीक या उससे जुड़ी जानकारी आगे किसी अन्य देश तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में केवल भारत-पाकिस्तान संबंध ही नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिकी तकनीक की सुरक्षा से जुड़े प्रश्न भी उठ सकते हैं।
हालांकि, पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी तकनीक को किसी तीसरे देश के साथ साझा किए जाने की आशंका को स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। यह भारत की ओर से उठाया गया सुरक्षा संबंधी मुद्दा है, जिस पर संबंधित देशों के बीच बातचीत और तकनीकी सुरक्षा उपाय महत्वपूर्ण होंगे।
आतंकवाद पर भी अमेरिका को भारत का स्पष्ट संदेश
पाकिस्तान को सैन्य सहायता देने के मुद्दे के साथ राजनाथ सिंह ने आतंकवाद पर भी भारत का रुख स्पष्ट किया। भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों को मिलने वाले समर्थन को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताता रहा है।
भारतीय पक्ष ने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उन देशों और तत्वों के प्रति सख्त रुख अपनाना चाहिए जो आतंकवादी संगठनों को धन, प्रशिक्षण या अन्य सहायता उपलब्ध कराते हैं। भारत का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए।
बैठक के दौरान अमेरिकी पक्ष ने भी सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में समर्थन की प्रतिबद्धता दोहराई। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग जारी है, लेकिन पाकिस्तान को सैन्य सहायता का मुद्दा भारत की चिंताओं में शामिल बना हुआ है।
भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी पर भी हुई चर्चा
राजनाथ सिंह और पीट हेगसेथ की मुलाकात केवल पाकिस्तान के F-16 विमानों तक सीमित नहीं थी। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की प्रगति की समीक्षा भी की।
बातचीत में सैन्य तकनीक, सूचना साझा करने, रक्षा उत्पादन में सहयोग, सैन्य आदान-प्रदान और समुद्री सुरक्षा जैसे विषय शामिल रहे। दोनों देशों के बीच दस वर्षीय रक्षा साझेदारी ढांचे के तहत सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
भारत और अमेरिका के रक्षा संबंध पिछले कुछ वर्षों में व्यापक हुए हैं। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग, रक्षा आपूर्ति श्रृंखला और नई तकनीकों के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
ऐसे में पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य सहायता पर भारत की आपत्ति दोनों देशों के संबंधों में एक जटिल मुद्दा है। एक ओर भारत अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग मजबूत करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर वह क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर डाल सकने वाले फैसलों को लेकर अपनी चिंताएं भी सामने रख रहा है।
आगे क्या होगा? अमेरिका के रुख पर रहेगी नजर
पाकिस्तान के F-16 पैकेज पर भारत की आपत्ति के बाद अब इस मुद्दे पर अमेरिका की आगे की प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत पर नजर रहेगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका इस पैकेज में कोई बदलाव करेगा या उसे वापस लेने पर विचार करेगा।
भारत के लिए प्रमुख चिंता यह है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य सहायता का इस्तेमाल किस उद्देश्य से होता है और संवेदनशील तकनीक की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है। वहीं, अमेरिका की ओर से पैकेज का उद्देश्य विमानों के रखरखाव और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं से जुड़ा बताया गया है।

