नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस की एक दिन की हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लेने के बाद कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर स्थित संबंधित न्यायाधीश के आवास पर पेश किया। सुनवाई के बाद अदालत ने पुलिस को एक दिन की हिरासत दी।
यह मामला जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान 14 वर्षीय सीजेपी कार्यकर्ता निशू आजाद के पिता संजय कुमार उर्फ संजय आजाद के साथ स्वतंत्र भारद्वाज ने कथित तौर पर मारपीट की थी। मामले को लेकर दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू की और शुक्रवार को स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिया।
अदालत में पेशी के बाद एक दिन की पुलिस हिरासत
पुलिस की कार्रवाई के बाद स्वतंत्र भारद्वाज को कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर स्थित न्यायाधीश के आवास पर पेश किया गया। अदालत ने मामले की जांच के लिए उन्हें एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
पुलिस हिरासत का मतलब यह है कि जांच एजेंसी को आरोपी से पूछताछ करने और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है। इस दौरान पुलिस कथित घटना, उपलब्ध वीडियो, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ कर सकती है।
हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आरोप या पुलिस की कार्रवाई अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
गिरफ्तारी के विरोध में संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन
स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद शनिवार को हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए मामले में एससी/एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना था कि पूरे घटनाक्रम के सभी पहलुओं की जांच की जानी चाहिए और उपलब्ध वीडियो व अन्य साक्ष्यों को भी देखा जाना चाहिए।

सोशल मीडिया वीडियो से बढ़ा था विवाद
स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया था। कथित वीडियो में वह संजय आजाद के साथ हुई मारपीट का जिक्र करता सुनाई देता है। वीडियो में कथित तौर पर संजय के सिर में गंभीर चोट लगने और कई टांके आने की बात भी कही गई थी।
हालांकि, वीडियो में किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सोशल मीडिया पर सामने आए दावों को जांच में स्थापित तथ्यों से अलग रखना जरूरी है।
सिर पर हमला करने की बात का कथित वीडियो
वायरल बताए जा रहे वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज कथित तौर पर यह कहते सुनाई देते हैं कि उन्होंने निशू के पिता का सिर फोड़ा था। बातचीत के दौरान वह इस घटना को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 से जोड़ते हुए भी दिखाई देते हैं।
इसी वीडियो में वह दिल्ली के तत्कालीन मंत्री कपिल मिश्रा को अपना बड़ा भाई जैसा बताते हुए कथित तौर पर यह दावा करते हैं कि उनके फोन के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था। वह चिराग पासवान को भी अपना बड़ा भाई जैसा बताते सुनाई देते हैं।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनका वास्तविक कानूनी महत्व जांच तथा अदालत की कार्यवाही से ही स्पष्ट होगा।
पॉडकास्ट में दिए बयान पर स्वतंत्र भारद्वाज की सफाई
मामला बढ़ने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज ने पॉडकास्ट में दिए अपने कथित बयानों पर सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि कपिल मिश्रा और चिराग पासवान को भाई जैसा बताने वाली बात उन्होंने व्यंग्य के तौर पर कही थी।
जंतर-मंतर पर हुई कथित मारपीट को लेकर उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि उन्होंने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी थी। साथ ही उन्होंने प्रशासन के साथ सहयोग करने की बात भी कही।
इस तरह मामले में दोनों पक्षों के दावों और पुलिस की जांच के बीच वास्तविक घटनाक्रम सामने आना अभी बाकी है।
कौन हैं स्वतंत्र भारद्वाज?
स्वतंत्र भारद्वाज बिहार के दरभंगा के रहने वाले बताए जाते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश मिलने के बाद वह दिल्ली आए। वह खुद को हिंदूवादी कार्यकर्ता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर प्रस्तुत करते हैं।
जंतर-मंतर पर संजय आजाद के साथ कथित मारपीट और बाद में सामने आए सोशल मीडिया व पॉडकास्ट बयानों के कारण वह विवाद के केंद्र में आए। अब पुलिस हिरासत और उसके विरोध में हुए प्रदर्शन के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।
आगे क्या?
फिलहाल पुलिस हिरासत के दौरान जांच एजेंसी मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल करेगी। पुलिस कथित मारपीट की परिस्थितियों, वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच कर सकती है।
दूसरी ओर, स्वतंत्र भारद्वाज का पक्ष भी जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सामने आएगा। मामले में लगाए गए आरोप अभी न्यायालय द्वारा सिद्ध नहीं किए गए हैं। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

